Himdhaara Search This Blog

Friday, 23 August 2019

मनरेगा के अंतर्गत चौंतड़ा ब्लॉक मेें साढ़े तीन करोड़ व्यय, 1.34 लाख मानव दिवस अर्जित

गत वर्ष पौने नौ करोड़ रूपये हुए खर्च, 3.21 लाख मानव कार्य दिवस हुए अर्जित
महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत चौंतड़ा विकास खंड में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान अब तक 1 लाख 34 हजार 411 मानव कार्य दिवस अर्जित कर 3.40 करोड़ रूपये व्यय हो चुके हैं। इस अवधि में तीन कार्यों को पूर्ण कर लिया गया है जबकि 706 विकास कार्य प्रगति पर हैं।
चौंतड़ा विकास खंड में कुल 19 हजार 338 जॉब कार्ड जारी किये गए हैं जिनमें से 11 हजार 136 क्रियाशील हैं जबकि 6032 जॉब कार्ड धारकों ने काम की मांग की है। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान कुल 3 लाख 9 हजार 688 मानव दिवस अर्जित करने के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले अब तक 1 लाख 34 हजार 411 कार्य दिवस अर्जित कर लिए गए हैं। इसी अवधि के दौरान ग्राम पंचायत कोलंग ने 11, 219 मानव दिवस अर्जित कर कुल 25.49 लाख रूपये, भडियाड़ा पंचायत ने 9421 मानव दिवस अर्जित कर 19.18 लाख, 7494 मानव दिवस अर्जित कर भडियाड़ा बूहला पंचायत ने 17 लाख जबकि 6166 मानव दिवस अर्जित कर लांगणा पंचायत ने 12.05 लाख रूपये का बजट खर्च कर लिया है। इसके अतिरिक्त अब तक कुल 34 लोगों ने एक सौ दिन का कार्य पूर्ण कर लिया है। 
वर्ष 2018-19 की बात करें तो चौंतड़ा विकास खंड में कुल 8.74 करोड़ रूपये मनरेगा के अंतर्गत व्यय किए गए। इस अवधि के दौरान 907 विकास कार्यों को पूर्ण किया गया जबकि 860 कार्य प्रगति पर रहे। इस दौरान निर्धारित लक्ष्य 2 लाख 11 हजार 630 मानव दिवस अर्जित करने के मुकाबले 3 लाख 21 हजार, 164 मानव दिवस अर्जित किये गए, जो निर्धारित लक्ष्य से डेढ़ गुणा अधिक रहा। इसी अवधि के दौरान ग्राम पंचायत कोलंग ने कुल 20 हजार 824 मानव दिवस अर्जित कर 65.35 लाख व्यय कर पूरे ब्लॉक में पहला स्थान, लांगणा पंचायत ने 15 हजार 894 मानव दिवस अर्जित कर कुल 37.51 लाख रूपये व्यय कर दूसरा जबकि पिपली पंचायत ने 23 हजार 897 मानव दिवस अर्जित कर कुल 48.87 लाख रूपये व्यय कर तीसरे स्थान पर रही। इस अवधि के दौरान चौंतड़ा विकास खंड में कुल 554 लोगों ने एक सौ दिन का कार्य पूर्ण किया है।  
पंचायत प्रधान कोलंग देश राज का कहना है कि गत वित्तीय वर्ष के दौरान कोलंग पंचायत पूरे चौंतड़ा विकास खंड में अव्वल रही। इस दौरान पंचायत में लगभग साढ़े तीन लाख रूपये की लागत से पुली का निर्माण, तीन लाख रूपये की लागत से दो सिंचाई कूहलों का निर्माण, विभिन्न बस्तियों के लिए साढ़े पांच लाख रूपये की लागत से 6 पक्के रास्तों का निर्माण, 6 लाख रूपये की लागत से क्रेटवॉल, लगभग 6 लाख रूपये की लागत से 3 संपर्क मार्गों का निर्माण, 9 लाख रूपये की लागत से तीन चैक डैम का निर्माण, 4 लाख रूपये की लागत से भूमि विकास के कार्य इत्यादि किये गए हैं। उनका कहना है कि मनरेगा के माध्यम से जहां ग्रामीण विकास सुनिश्चित हुआ है तो वहीं स्थानीय लोगों को घर-द्वार रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हुए हैं। इसी तरह भडियाड़ा और लांगणा पंचायतों में भी पक्के रास्तों, भूमि विकास, चैक डैम इत्यादि के विभिन्न विकास कार्यों को किया पूरा किया गया है। 
क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में खंड विकास अधिकारी चौंतड़ा राजेश्वर भाटिया का कहना है कि चालू वित्त वर्ष में अब तक मनरेगा के तहत लगभग साढ़े तीन करोड़ रूपये से अधिक की धनराशि व्यय की जा चुकी है जबकि गत वित्तीय वर्ष में लगभग पौने नौ करोड़ रूपये व्यय हुए हैं। उन्होने बताया कि शत प्रतिशत कार्यशील मनरेगा वर्कर्ज को आधार कार्ड से जोड़ दिया गया है। मनरेगा बजट खर्च करने में गत वित्तीय वर्ष में पहले तीन स्थानों पर रही ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहित करने के लिए स्मृति चिन्ह प्रदान कर पुरस्कृत भी किया गया है।




Saturday, 17 August 2019

स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भूमिका

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने अपने निधन (1940) से पहले 1921 और 1930 के सत्याग्रहों में भाग लिया था और उन्हें कारावास भी सहना पड़ा। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म 1889 में हुआ जबकि महात्मा गांधी के नेतृत्व में तीन सत्याग्रह वर्ष 1921, 1930 और 1942 में हुए। 
साल 1897 में रानी विक्टोरिया के राज्यारोहण के हीरक महोत्सव के निमित्त स्कूल में बांटी गई मिठाई 8 साल के केशव ने ना खाकर कूड़े में फेंक दी। यह अंग्रेजों के प्रति उनका पहला प्रतिकार था। नागपुर में स्वतंत्रता आन्दोलन की चर्चा 1904-1905 से शुरू हुई। 
साल 1907 में रिस्ले सेक्युलर नाम से वंदे मातरम का सार्वजनिक उद्घोष पर पाबंदी का अन्यायपूर्ण आदेश घोषित किया गया।उसके विरोध में केशव ने अपने विद्यालय में सरकारी निरीक्षक के सामने अपनी कक्षा के सभी विद्यार्थियों द्वारा वंदे मातरम्उद्घोष करवाया। डॉ हेडगेवार को स्कूल में अंग्रेज अफसर के निरीक्षण के समय वंदे मातरम् के उद्घोष के बाद अंग्रेजो से माफी मांगने से इनकार करने पर रेजिंलेण्ड क्रडोक के निर्देश पर पुलिस महानिरीक्षक सीआर क्लीवलैंड की अनुशंसा पर स्कूल से निष्काषित कर दिया गया। (गोविन्द गणेश आवदे, महाराष्ट्र, 28 जुलाई, 1940, पृष्ठ 12)
डॉ. हेडगेवार ने 16 वर्ष की आयु में युवाओं में राष्ट्रीय घटनाओं पर चर्चा के लिए 1901 में 'देशबंधु समाजÓ की शुरुआत की। (बी.एस. हरदास, आर्म्ड स्ट्रगल फ़ॉर फ्रीडम, पृष्ठ 372) रामपायली में अक्तूबर 1908 में दशहरे के रावण दहन कार्यक्रम में उन्होंने देशभक्ति पूर्ण जोशीला भाषण दिया, पूरी भीड़ वन्देमातरम का नारा लगाने लगी। डॉ. हेडगेवार पर अंग्रेजो ने राजद्रोही भाषण आईपीसी धारा 108 में केस दर्ज कर लिया। (पोलिटिकल क्रिमिनल हूज हु, पृष्ठ 97)
बंगाल के क्रांतिकारियों से संपर्क
डॉक्टरी पढऩे के लिए मुंबई में सुविधा होने के बावजूद क्रांतिकारियों का केंद्र होने के नाते उन्होंने कलकत्ता को पसंद किया। वहां वे क्रांतिकारियों की शीर्षस्थ संस्था (अनुशीलन समिति) के विश्वासपात्र सदस्य बने थे। डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार युगान्तर और अनुशीलन समिति जैसे संगठनों में डॉक्टर पांडुरंग खानखोजे, श्री अरविन्द, वारिंदर घोष, त्रैलोक्य नाथ चक्रवर्ती आदि के सहयोगी रहे। रासबिहारी बोस और शचीन्द्र सान्याल द्वारा प्रथम विश्वयुद्ध के समय 1915 में सम्पूर्ण भारत की सैनिक छावंनियो में क्रांति की योजना में वे मध्यभारत के प्रमुख थे। (राष्ट्रीय आंदोलन और संघ, सुरुचि प्रकाशन, 2016, पृष्ठ 1)
डॉ. हेडगेवार बंगाल और मध्य प्रान्त की क्रन्तिकारी गतिविधियों के बीच कड़ी का भी काम कर रहे थे। (जी.वी. केतकर, रणझुनकर, पी.सी. खानखोजेयांचा चरित्र, पृष्ठ 12) प्रमुख क्रांतिकारियों ने उनकी भूमिका को सम्मानीय एवं उच्च स्तर का बताया है। जेल में 24 साल बिताने वाले जोगेश चन्द्र चटर्जी ने भी अपनी पुस्तक में उनकी अहम् भूमिका स्वीकार की है।(जोगेश चन्द्र चटर्जी, इन सर्च ऑफ़ फ्रीडम, पृष्ठ 27)
साल 1921 में जब प्रांतीय कांग्रेस की बैठक में क्रांतिकारियों की निंदा करने वाला प्रस्ताव रखा गया तो डॉ. हेडगेवार ने इसका जबरदस्त विरोध किया, परिणामस्वरूप प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। बैठक की अध्यक्षता लोकमान्य अणे ने की थी। उन्होंने लिखा, 'डॉ. हेडगेवार क्रांतिकारियों की निंदा एकदम पसंद नहीं करते थे। वह उन्हें ईमानदार देशभक्त मानते थे। उनका मानना था कि कोई उनके तरीकों से मतभिन्नता रख सकता है, परंतु उनकी देशभक्ति पर उंगली उठाना अपराध है।Ó
नागपुर वापसी
वर्ष 1916 में  हेडगेवार डॉक्टर बनकर नागपुर वापस आए। डॉ. हेडगेवार के मन में स्वतंत्रता प्राप्ति की इतनी तीव्रता और अर्जेंसी थी कि उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन का कोई विचार न करते हुए अपनी सारी शक्ति, समय और क्षमता राष्ट्र को अर्पित करते हुए स्वतंत्रता के लिए चलने वाले हर प्रकार के आन्दोलन से अपने आपको जोड़ दिया।
प्रथम विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन का ध्यान भारत में स्वतंत्रता के आन्दोलनों को कुचलने पर केन्द्रित हो रहा था। डॉ. हेडगेवार को इस सन्दर्भ में लोकमान्य बालगंगाधर तिलक से सहयोग की अपेक्षा थी। वह डॉ. बी.एस. मुंजे का पत्र लेकर उनसे मिलने पूना गए। दो दिन तक डॉ. हेडगेवार लोकमान्य के साथ रहे। (द गजट ऑफ़ महाराष्ट्र स्टेट, नागपुर डिविजन, पृष्ठ 113)
लोकमान्य तिलक के नेतृत्व में नागपुर में होने जा रहे 1920 के कांग्रेस अधिवेशन की सारी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी डॉ. हर्डीकर और डॉ. हेडगेवार को दी गई थी और उसके लिए उन्होंने 1,200 स्वयंसेवकों की भर्ती करवाई थी। उस समय डॉ. हेडगेवार कांग्रेस की नागपुर शहर इकाई के संयुक्त सचिव थे। उस अधिवेशन में पारित करने हेतु कांग्रेस की प्रस्ताव समिति के सामने डॉ. हेडगेवार ने ऐसे प्रस्ताव का सुझाव रखा था कि कांग्रेस का उद्देश्य भारत को पूर्ण स्वतंत्र कर भारतीय गणतंत्र की स्थापना करना और विश्व को पूंजीवाद के चंगुल से मुक्त करना होना चाहिए।
डॉ. हेडगेवार को कारावास और बाद की गतिविधियाँ
मराठी मध्य प्रान्त की तरफ से डॉ. हेडगेवार की अगुआई में एक असहयोग आन्दोलन समिति की स्थापना की गयी। इसका उद्देश्य कार्यकर्ताओं को असहयोग आन्दोलन के लिए तैयार करना था। इस समिति ने 11 नवम्बर, 1920 से एक सप्ताह 'असहयोग सप्ताहÓ के रूप में मनाया। डॉ. हेडगेवार ने दर्जन सभाओं को संबोधित किया। साल 1921 की शुरुआत से उनके नेतृत्व में सभाओं और प्रदर्शनों का दौर भी तेज हो गया। (डॉ.राकेश सिन्हा, आधुनिक भारत के निर्माता - डॉ .केशव बलिराम हेडगवार, पेज 42)
ब्रिटिश सरकार ने जनवरी 1921 से लेकर जून 1922 तक 25 राष्ट्रवादियों पर राजद्रोही भाषण देने के लिए मुकदमा चलाया गया था, जिनमे से 11 लोगो को कठोर कारावास, 2 लोगों को सामान्य कारावास एवं दो लोगों को विशेष कारावास की सजा दी गयी। डॉ. हेडगेवार पर मई 1921 में ब्रिटिश सरकार के विरोध में भाषण देने पर मुकदमा चलाया गया। (डॉ राकेश सिन्हा, आधुनिक भारत के निर्माता-डॉ केशव बलिराम हेडगवार, पेज 44)
डॉ. हेडगेवार ने 13 अप्रैल, 1922 को जेल के अन्दर 'जलियांवाला बाग दिवसÓ मनाने का निर्णय लिया। उन्होंने एक छोटी सभा को संबोधित किया जिसमें उन्होंने भारतीय राष्ट्रवाद का विषय रखा। एक वर्ष जेल में रहने के बाद डॉ. हेडगेवार 11 जुलाई, 1922 को रिहा हुए। महाराष्ट्र समाचारपत्र ने लिखा, 'उनकी (डॉ. हेडगेवार) की देशभक्ति सभी विवादों से परे है।Ó (महाराष्ट्र, 12 जुलाई, 1922, पृष्ठ 5)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना
वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन विशेष रूप से निमंत्रित 25 व्यक्तियों के साथ विचार विमर्श करके एक नए संघठन एवं नई कार्य पद्धति का श्रीगणेश किया। भाऊ जी कावरे, अन्ना सोहोनी, विश्वनाथ राव केलकर, बालाजी हुद्दार, बापुराव भेदी उपस्थित लोगों में प्रमुख थे। इनमे अधिकांश डॉ. हेडगेवार के बाल्यकाल जीवन के साथी एवं बाद में गांधीवादी आन्दोलन के दौरान सहकर्मी थे।
डॉ. मनमोहन वैद्य लिखते है, 'स्वतंत्रता प्राप्ति का महत्व तथा प्राथमिकता को समझते हुए भी एक प्रश्न डॉ. हेडगेवार को सतत् सताता रहता था कि, 7000 मील से दूर व्यापार करने आए मु_ी भर अंग्रेज, इस विशाल देश पर राज कैसे करने लगे? जरूर हममें कुछ दोष होंगे। उनके ध्यान में आया कि हमारा समाज आत्म-विस्मृत, जाति प्रान्त-भाषा-उपासना पद्धति आदि अनेक गुटों में बंटा हुआ, असंगठित और अनेक कुरीतियों से भरा पड़ा है जिसका लाभ लेकर अंग्रेज यहां राज कर सके। स्वतंत्रता मिलने के बाद भी समाज ऐसा ही रहा तो कल फिर इतिहास दोहराया जाएगा। वे कहते थे कि नागनाथ जाएगा तो सांपनाथ आएगा। इसलिए इस अपने राष्ट्रीय समाज को आत्मगौरव युक्त, जागृत, संगठित करते हुए सभी दोष, कुरीतियों से मुक्त करना और राष्ट्रीय गुणों से युक्त करना अधिक मूलभूत आवश्यक कार्य है और यह कार्य राजनीति से अलग, प्रसिद्धि से दूर, मौन रहकर सातत्यपूर्वक करने का है, ऐसा उन्हें प्रतीत हुआ। उस हेतु 1925 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। संघ स्थापना के पश्चात् भी सभी राजनीतिक या सामाजिक नेताओं, आन्दोलन एवं गतिविधि के साथ उनके समान नजदीकी के और आत्मीय संबंध थे।Ó (पांचजन्य, 17 सितंबर, 2018)
स्वतंत्रता प्राप्ति का लक्ष्य
संघ में देशभक्ति से ओतप्रोत बौधिक कार्यकर्मों एवं खेलों का आयोजन किया जाता था। वर्धा में 27-28 अप्रैल, 1929 को एक सौ स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण शिविर लगाया गया था। सभी वक्ताओं ने अपील की थी की स्वराज्य प्राप्ति के लिए वे अपना सर्वस्व त्याग करने हेतु तैयार रहे और सार्वजानिक तौर पर घोषणा की गयी की संघ का अंतिम लक्ष्य स्वराज्य प्राप्त करना है। डॉ.हेडगेवार ने कहा कि ब्रिटेन की सरकार ने अनेक बार भारत को स्वतंत्र करने का आश्वाशन दिया, परन्तु वह झूठा साबित हुआ। अब यह साफ़ हो गया की भारत अपने ही बल पर स्वतंत्रता हासिल करेगा। (राकेश सिन्हा, आधुनिक भारत के निर्माता-डॉ केशव बलिराम हेडगेवार, पृष्ठ 89)
दिसम्बर 1929 में कांग्रेस ने अपने लाहौर अधिवेशन में ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया। जिसमें पूर्ण स्वतंत्रता को अपना ध्येय घोषित करते हुए 26 जनवरी, 1930 को देशभर में स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्देश दिया। डॉ. हेडगेवार को इसका पूर्वाभ्यास था और उन्होंने कांग्रेस के निर्णय पर अपनी प्रसंन्नता प्रकट की। (राकेश सिन्हा, आधुनिक भारत के निर्माता- डॉ.केशव बलिराम हेडगेवार, पृष्ठ 91)
सविनय अवज्ञा आन्दोलन
1930 में गांधी जी के आह्वान पर सविनय अवज्ञा आन्दोलन 6 अप्रैल को दांडी (गुजरात) में नमक सत्याग्रह के नाम से शुरू हुआ। नवम्बर 1929 में ही संघचालकों की त्रिदिवसीय बैठक में इस आन्दोलन को बिना शर्त समर्थन करने का निर्णय संघ में हुआ था।
संघ की नीति के अनुसार डॉ. हेडगेवार ने व्यक्तिगत तौर पर अन्य स्वयंसेवकों के साथ इस सत्याग्रह में भाग लेने का निर्णय लिया। संघ कार्य अविरत चलता रहे इस हेतु उन्होंने सरसंघचालक पद का दायित्व अपने पुराने मित्र डॉ. परांजपे को सौंप कर बाबा साहब आप्टे और बापू राव भेदी को शाखाओं के प्रवास की जिम्मेदारी दी। इस सत्याग्रह में उनके साथ प्रारंभ में 21 जुलाई, को 3-4 हजार लोग थे। वर्धा, यवतमाल होकर पुसद पहुंचते-पहुंचते सत्याग्रह स्थल पर 10,000 लोग इक_े हुए। इस सत्याग्रह में उन्हें 9 महीने का कारावास हुआ। वहां से छूटने के पश्चात् सरसंघचालक का दायित्व पुन: स्वीकार कर वे फिर से संघ कार्य में जुट गए।
जुलाई 1930 में सत्याग्रह हेतु यवतमाल जाते समय पुसद नामक स्थान पर आयोजित जनसभा में डॉ. हेडगेवार ने अपने संबोधन में कहा, 'स्वतंत्रता के लिए अंग्रेजो के बूट की पालिश करने से लेकर, उसके बूट को पैर से निकालकर उससे उनके ही सिर को लहुलुहान करने तक के सब मार्ग मेरे स्वतंत्रता प्राप्ति के साधन हो सकते हैं।मैं तो इतना ही जानता हूँ कि देश को स्वतंत्र कराना है।Ó डॉ. साहब के साथ गए सत्याग्रह जत्थे में आप्पाजी जोशी, दादाराव परमार्थ आदि प्रमुख 12 स्वयंसेवक थे. उनको 9 महीने का सश्रम कारावास दिया गया। उसके बाद श्री मार्तंडराव जोग, श्री अप्पाजी हलदे आदि अनेक कार्यकर्ताओं और शाखाओं के स्वयंसेवकों के जत्थों ने भी सत्याग्रहियों की सुरक्षा के लिए 100 स्वयंसेवकों की टोली बनाई जिसके सदस्य सत्याग्रह के समय उपस्थित रहते थे।
वर्ष 1931 की विजयादशमी पर डॉ. हेडगेवार जेल में थे, उनकी अनुपस्थिति में गाँव-गाँव में संघ की शाखाओं पर एक सन्देश पढ़ा गया, जिसमें कहा गया था, 'देश की परतंत्रता नष्ट होकर जब तक सारा समाज बलशाली और आत्मनिर्भर नही होता तब तक हमें किसी सुख को नही भोगना है।Ó (राष्ट्रीय आन्दोलन और संघ, सुरुचि प्रकाशन, पृष्ठ 9)
संघ पर पहला प्रतिबन्ध
मध्यप्रांत की ब्रिटिश सरकार ने एक नोटिस जारी करके सरकारी कर्मचारियों के संघ में प्रवेश पर प्रतिबन्ध लगा दिया। पुलिस एवं गुप्तचरों की रिपोर्टों को आधार बना तैयार किये गए इस परिपत्रक में संघ को साम्प्रदायिक कहा गया और राजनैतिक आन्दोलनों में भाग लेने के आरोप लगाए गए। यह परिपत्रक 15 दिसंबर, 1932 को जारी किया गया और दूसरे ही दिन ब्रिटिश सरकार द्वारा अनेक संस्थानों में इसे लागू कर दिया। परिपत्र के अनुसार, 'सरकार (ब्रिटिश) ने यह निर्णय लिया है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सदस्य बनने अथवा उसके कार्यक्रमों में भाग लेने की अनुमति नहीं रहेगी।Ó राष्ट्रीय अभिलेखागार, गृह-राजनीतिक, फाइल 88/33)
डॉक्टर साहब ने स्पष्ट कहा सरकार को यह जान लेना चाहिए की संघ जो कार्य देश की आज़ादी के लिए कर रहा है उसे दबाया नही जा सकता। मध्यप्रांत की विधानसभा में 7 मार्च, 1934 को जब इस परिपत्रक से संबधित प्रस्ताव पर चर्चा हुई तो अधिकतर सदस्यों ने प्रस्ताव का विरोध किया। आखिरकार संघ पर से प्रतिबन्ध हटा लिया गया। (नरेंदर सहगल, भारतवर्ष की सर्वांग स्वतंत्रता, पृष्ठ 157)
भारत छोड़ो आन्दोलन
8 अगस्त, 1942 को मुंबई के गोवलिया टैंक मैदान पर कांग्रेस अधिवेशन में महात्मा गांधीजी ने अंग्रेज! भारत छोड़ो यह ऐतिहासिक घोषणा की। दूसरे दिन से ही देश में आन्दोलन ने गति पकड़ी और जगह जगह आन्दोलन के नेताओं की गिरफ्तारी शुरू हुई।
विदर्भ में बावली (अमरावती), आष्टी (वर्धा) और चिमूर (चंद्रपुर) में विशेष आन्दोलन हुए। चिमूर के समाचार बर्लिन रेडियो पर भी प्रसारित हुए। यहां के आन्दोलन का नेतृत्व कांग्रेस के उद्धवराव कोरेकर और संघ के अधिकारी दादा नाईक, बाबूराव बेगडे, अण्णाजी सिरास ने किया। इस आन्दोलन में अंग्रेज की गोली से एकमात्र मृत्यु बालाजी रायपुरकर इस संघ स्वयंसेवक की हुई। कांग्रेस, श्री तुकडो महाराज द्वारा स्थापित श्री गुरुदेव सेवा मंडल एवं संघ स्वयंसेवकों ने मिलकर 1943 का चिमूर का आन्दोलन और सत्याग्रह किया। इस संघर्ष में 125 सत्याग्रहियों पर मुकदमा चला और असंख्य स्वयंसेवकों को कारावास में रखा गया। भारतभर में चले इस आन्दोलन में स्थान-स्थान पर संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता, प्रचारक स्वयंप्रेरणा से कूद पड़े। 
स्वतंत्रता संग्राम में संघ के स्वयंसेवकों को कांग्रेस के आंदोलनों में भाग लेने के लिए कभी भी नही रोका गया। अलबता भारी संख्या में स्वयंसेवक गांधीजी के द्वारा संचालित सत्याग्रह में जाया करते थे। इतना ही नही हजारों स्वयंसेवक कांग्रेस की सभी प्रकार की गतिविधियों में सक्रियता से भागीदारी करते थे। अपने जिन कार्यकर्ताओं ने स्थान-स्थान पर अन्य स्वयंसेवकों को साथ लेकर इस आन्दोलन में भाग लिया उनके कुछ नाम इस प्रकार हैं-राजस्थान में प्रचारक जयदेवजी पाठक, जो बाद में विद्या भारती में सक्रिय रहे। आर्वी (विदर्भ) में डॉ. अण्णासाहब देशपांडे। जशपुर (छत्तीसगढ़) में रमाकांत केशव (बालासाहब) देशपांडे, जिन्होंने बाद में वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना की। दिल्ली में वसंतराव ओक जो बाद में दिल्ली के प्रान्त प्रचारक रहे। बिहार (पटना), में वहां के प्रसिद्ध वकील कृष्ण वल्लभप्रसाद नारायण सिंह (बबुआजी) जो बाद में बिहार के संघचालक रहे। दिल्ली में ही चंद्रकांत भारद्वाज, जिनके पैर में गोली धंसी और जिसे निकाला नहीं जा सका। बाद में वे प्रसिद्ध कवि और अनेक संघ गीतों के रचनाकार हुए। पूर्वी उत्तर प्रदेश में माधवराव देवड़े जो बाद में प्रान्त प्रचारक बने और इसी तरह उज्जैन (मध्य प्रदेश) में दत्तात्रेय गंगाधर (भैयाजी) कस्तूरे का अवदान है जो बाद में संघ प्रचारक हुए। अंग्रेजों के दमन के साथ-साथ एक तरफ सत्याग्रह चल रहा था तो दूसरी तरफ अनेक आंदोलनकर्ता भूमिगत रहकर आन्दोलन को गति और दिशा देने का कार्य कर रहे थे। ऐसे समय भूमिगत कार्यकर्ताओं को अपने घर में पनाह देना किसी खतरे से खाली नहीं था।
1942 के आन्दोलन के समय भूमिगत आन्दोलनकर्ता अरुणा आसफ अली दिल्ली के प्रान्त संघचालक लाला हंसराज गुप्त के घर रही थीं और महाराष्ट्र में सतारा के उग्र आन्दोलनकर्ता नाना पाटील को भूमिगत स्थिति में औंध के संघचालक पंडित सातवलेकर ने अपने घर में आश्रय दिया था। 
डॉ. साहब 15 वर्षों तक संघ के पहले सरसंघचालक रहे। इस दौरान संघ शाखाओं के द्वारा संगठन खड़ा करने की प्रणाली डॉ. साहब ने विचारपूर्वक विकसित कर ली थी। संगठन के इस तंत्र के साथ राष्ट्रीयता का महामंत्र भी बराबर रहता था। वे दावे के साथ आश्वासन देते थे कि अच्छी संघ शाखाओं का निर्माण कीजिये, उस जाल को अधिक्ताम घना बुनते जाइए, समूचे समाज को संघशाखाओं के प्रभाव में लाइए, तब राष्ट्रीय आज़ादी से लेकर हमारी सर्वांगीण उन्नति करने की सभी समस्याएं निश्चित रूप से हल हो जायेगी। (सी.पी. भिशिकर, केशव - संघ निर्माता, सुरुचि साहित्य : नई दिल्ली, 1979, पृष्ठ 48) 
इन वर्षों में जिससे भी उनका संपर्क हुआ उन्होंने उनकी और उनके कार्यों की हमेशा सरहना की। जिनमें महर्षि अरविन्द, लोकमान्य तिलक, मदनमोहन मालवीय, विनायक दामोदर सावरकर, बी. एस. मुंजे, बि_लभाई पटेल, महात्मा गाँधी, सुभाषचन्द्र बोस, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और के. एम. मुंशी जैसे नाम प्रमुख थे।
राजगुरु और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
शिवराम हरि राजगुरु (1908-1931) की पढाई भोंसलें वेदशाला में हुई थी। यहां उनकी मुलाकात डॉ. हेडगेवार से 1925 में हुई। (अनिल वर्मा, राजगुरु द इन्विशिब्ल रेवोलुशनरी, पब्लिकेशन डिविजन-नई दिल्ली, 2010, पृष्ठ 25) 
इसके बाद राजगुरु का नागपुर स्थित मोहिते बाड़ा शाखा में कई बार आना हुआ। दरअसल राजगुरु को व्यायाम से गहरा लगाव था। (एस. पी. सेन, डिक्शनरी ऑफ़ नेशनल बायोग्राफी, खंड 3, इंस्टिट्यूट ऑफ़ हिस्टोरिकल स्टडीज-कोलकाता, 1974, पृष्ठ 447) क्रांतिकारियों गतिविधियों से जुडऩे के लिए वे वाराणसी आ गए। यहां उनका संपर्क भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारियों से हुआ। वायसराय ने 8 नवम्बर, 1927 को घोषणा की कि भारत में शासन सुधारों के लिए सायमन की अध्यक्षता में एक कमीशन बनाया गया है। यह कमीशन मुंबई में 3 फरवरी, 1928 को पहुंचा। दिल्ली आने के बाद 30 अक्तूबर 1928 में लाहौर आया। यहां लाला लाजपत के नेतृत्व में उसका विरोध किया गया। रेलवे स्टेशन पर पुलिस अधीक्षक स्कॉट ने सहायक पुलिस अधीक्षक सांडर्स को लाठी-चार्ज की अनुमति दी हुई थी। लाजपत राय को गंभीर चोंटे आई और 17 नवम्बर, 1928 को उनका निधन हो गया। भगत सिंह, चन्द्रशेखर आज़ाद, राजगुरु और जयगोपाल ने इसका बदला लेने का निर्णय लिया। चारों ने मिलकर 27 दिसंबर 1928 को पुलिस अधीक्षक स्कॉट को मारने का प्लान बनाया। हालाँकि उन्होंने सहायक पुलिस अधीक्षक सांडर्स को गोली मार दी। पिस्तौल का ट्रिगर राजगुरु ने दबाया और भगत सिंह ने भी पांच बार फायर किये।
ब्रिटिश सरकार ने राजगुरु और अन्य क्रांतिकारियों को पकडऩे के प्रयास शुरू कर दिए। राजगुरु को पकडे जाने का कोई डर नहीं था। वे अपनी नियमति गतिविधियों में संलग्न रहे और युवाओं को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ जागने का काम करते रहे। सांडर्स की हत्या के बाद एक अन्य क्रन्तिकारी के साथ वे अमरावती आ गए। यहां वे हनुमान प्रसारक मंडल के ग्रीष्मकालीन कैंप से जुड़ गए। यहां से वे अकोला गए और राज राजेश्वर मंदिर के समीप एक किराए के घर में रहने लगे। जिसका इन्तेजाम बापू साहब सहस्त्रबुद्धे ने किया था। इसके बाद उनका अमरावती, नागपुर और वर्धा लगातार जाना लगा रहा। (अनिल वर्मा, राजगुरु द इन्विशिब्ल रेवोलुशनरी, पब्लिकेशन डिविजन -नई दिल्ली, 2010, पृष्ठ 96-97) 
इसी दौरान 1929 में जब राजगुरु नागपुर में थे तब उनकी मुलाकात डॉ. हेडगेवार से हुई। सरसंघचालक ने उन्हें सलाह दी कि वे पुणे न जाए। ब्रिटिश सरकार से बचाने के लिए उन्होंने राजगुरु के रहने की व्यवस्था भैयाजी दाणी के उमरेड स्थित एक स्थान पर कर दी थी। हालाँकि उन्होंने इस सलाह को नहीं माना और वे पुणे चले गए। जहां उन्हें 30 सितम्बर, 1929 को गिरफ्तार कर लिया गया। (ची. प. भिशीकर, केशव-संघ निर्माता, सुरुचि-नई दिल्ली, 1979, पृष्ठ 70)
भारत छोड़ो आन्दोलन में संघ कार्यकर्ताओं की भूमिका
8 अगस्त, 1942 को मुंबई के गोवलिया टैंक मैदान पर कांग्रेस अधिवेशन में महात्मा गांधी जी ने अंग्रेज! भारत छोड़ो' यह ऐतिहासिक घोषणा की। भारत भर चले इस आन्दोलन में स्थान-स्थान पर संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता, प्रचारक स्वयंप्रेरणा से कूद पड़े। दूसरे दिन से ही देश में आन्दोलन ने गति पकड़ी और जगह जगह आन्दोलन के नेताओं की गिरफ्तारी शुरू हुई। 
1. विदर्भ में बावली (अमरावती), आष्टी (वर्धा) और चिमूर (चंद्रपुर) में विशेष आन्दोलन हुए। चिमूर आन्दोलन के समाचार बर्लिन रेडियो पर भी प्रसारित हुए। यहां के आन्दोलन का नेतृत्व कांग्रेस के उद्धवराव कोरेकर और संघ के अधिकारी दादा नाईक, बाबूराव बेगडे, अण्णाजी सिरास ने किया। 
2. इस आन्दोलन में अंग्रेज की गोली से एकमात्र मृत्यु बालाजी रायपुरकर की हुई। जो संघ के स्वयंसेवक थे।
3. श्री तुकडो जी महाराज द्वारा स्थापित श्री गुरुदेव सेवा मंडल एवं संघ स्वयंसेवकों ने मिलकर 1943 का चिमूर का आन्दोलन और सत्याग्रह किया। इस संघर्ष में 125 सत्याग्रहियों पर मुकदमा चला और असंख्य स्वयंसेवकों को कारावास में रखा गया। 
(जिन कार्यकर्ताओं ने स्थान-स्थान पर अन्य स्वयंसेवकों को साथ लेकर इस आन्दोलन में भाग लिया उनके कुछ नाम इस प्रकार हैं)
4. राजस्थान में प्रचारक जयदेवजी पाठक, जो बाद में विद्या भारती में सक्रिय रहे। 
5. आर्वी (विदर्भ) में डॉ. अण्णासाहब देशपांडे। 
6. जशपुर (छत्तीसगढ़) में रमाकांत केशव (बालासाहब) देशपांडे, जिन्होंने बाद में वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना की। 
7. दिल्ली में वसंतराव ओक जो बाद में दिल्ली के प्रान्त प्रचारक रहे। 
8. बिहार (पटना), में वहां के प्रसिद्ध वकील कृष्ण वल्लभप्रसाद नारायण सिंह (बबुआजी) जो बाद में बिहार के संघचालक रहे। 
9. दिल्ली में ही चंद्रकांत भारद्वाज, जिनके पैर में गोली धंसी और जिसे निकाला नहीं जा सका। बाद में वे प्रसिद्ध कवि और अनेक संघ गीतों के रचनाकार हुए। 
10. पूर्वी उत्तर प्रदेश में माधवराव देवड़े जो बाद में प्रान्त प्रचारक बने 
11. उज्जैन (मध्य प्रदेश) में दत्तात्रेय गंगाधर (भैयाजी) कस्तूरे का अवदान है जो बाद में संघ प्रचारक हुए। (अंग्रेजों के दमन के साथ-साथ एक तरफ सत्याग्रह चल रहा था तो दूसरी तरफ अनेक आंदोलनकर्ता भूमिगत रहकर आन्दोलन को गति और दिशा देने का कार्य कर रहे थे। ऐसे समय भूमिगत कार्यकर्ताओं को अपने घर में पनाह देना किसी खतरे से खाली नहीं था)
12. 1942 के आन्दोलन के समय भूमिगत आन्दोलनकर्ता अरुणा आसफ अली दिल्ली के प्रान्त संघचालक लाला हंसराज गुप्त के घर रही थीं।
13. महाराष्ट्र में सतारा के उग्र आन्दोलनकर्ता नाना पाटील को भूमिगत स्थिति में औंध के संघचालक पंडित सातवलेकर ने अपने घर में आश्रय दिया था। 
( स्त्रोत- विश्व संवाद केंद्र भारत दिल्ली)

Tuesday, 6 August 2019

अथराह (व्यूहं) गांव के धर्म सिंह मुर्गी पालन से प्रतिमाह कमा रहे 25 हजार


पशु पालन विभाग की 5 हजार ब्रायलर चूजा योजना बनी मददगार

जोगिन्दर नगर उप-मंडल की ग्राम पंचायत व्यूंह के गांव अथराह निवासी धर्म सिंह मुर्गी पालन से जुडक़र प्रतिमाह औसतन 25 हजार रूपये घर बैठे कमा रहे हैं। धर्म सिंह के लिए पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन विभाग की 5 हजार ब्रायलर चूजा योजना न केवल मददगार साबित हुई है बल्कि मुर्गी पालन आज उनके लिए आर्थिकी का एक प्रमुख स्त्रोत बन गया है। साथ ही एक स्थानीय व्यक्ति को भी 6 हजार रूपये प्रतिमाह पर रोजगार भी प्रदान किया है।

लोक निर्माण विभाग से वर्ष 2012 में चुतुर्थ श्रेणी पद से सेवानिवृत 69 वर्षीय धर्म सिंह के लिए सेवानिवृति उपरान्त बिना सरकारी पेंशन परिवार का खर्चा वहन करना न केवल मुश्किल होने लगा बल्कि दिनोंदिन आर्थिक तंगी बढ़ती गई। लेकिन ऐसे में पारंपरिक खेती बाडी न केवल एक बोझ बन रही थी बल्कि पर्याप्त पानी न होने के साथ-साथ जंगली व आवारा जानवरों के चलते खेती घाटे का सौदा साबित हो रही थी। ऐसे में वर्ष 2016 में उन्हे राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपली के गांव कुराटी में आयोजित किसान जागरूकता शिविर में शामिल होने का मौका मिला तथा इस दौरान उन्हे न केवल मुर्गीपालन बारे जानकारी हासिल हुई बल्कि पशु पालन विभाग की विभिन्न योजनाओं को भी जानने का सुअवसर मिला। इस दौरान उन्होने मुर्गी पालन को अपनाने का निर्णय लिया।

धर्म सिंह का कहना है कि उन्हे विभाग द्वारा सुंदरनगर स्थित मुर्गीपालन प्रशिक्षण संस्थान में वैज्ञानिक मुर्गीपालन बारे एक सप्ताह का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण उपरान्त सिंतबर, 2016 में 200 चूजों की क्षमतायुक्त मुर्गी बाड़े का निर्माण किया तथा पहली खेप विभाग के माध्यम से सुंदरनगर हैचरी से प्राप्त हुई। इस बीच उनके 35 चूजों की विभिन्न कारणों से मौत हो गई। लेकिन हिम्मत न हारते हुए वर्ष 2017 में मुर्गी बाड़े का विस्तार करते हुए 2 हजार चूजे पालने का निर्णय लिया। इसके बाद पशु पालन विभाग द्वारा उन्हे पांच हजार ब्रायलर चूजा योजना के तहत एक हजार चूजों की खेप व पक्षी आहार प्राप्त हुआ। इन चूजों की वैज्ञानिक तरीके से बेहतर देखभाल करते हुए चैबरो मुर्गों का 17 क्विटंल ब्रायलर मांस प्राप्त हुआ जिसे बेचकर लगभग डेढ़ लाख रूपये की आय हुई। इसी तरह वर्ष 2018 में 21 क्विंटल ब्रायलर मांस बेचकर लगभग दो लाख तथा मार्च 2019 में पांच हजार चूजा ब्रायलर स्कीम की आखिरी खेप से 20 क्विंटल मांस को 115 रूपये प्रति किलो की दर से बेचकर लगभग दो लाख 30 हजार रूपये की आमदन हुई है। उनका कहना है कि ब्रायलर चूजा पालन के तहत उन्होने मात्र 15 महीनों में ही लगभग चार लाख रूपये व औसतन 25 हजार रूपये प्रतिमाह आय अर्जित की है।
धर्म सिंह ने बताया कि पांच हजार ब्रायलर चूजा योजना के पूर्ण होने के बाद उन्होने नालागढ़ से उन्नत नस्ल के दो सौ सफेद चूजों को खरीदा है जिनकी समूह सक्रियता व वजन वहन क्षमता काफी बेहतरीन है। उनका कहना है कि वे कडक़नाथ नामक भारतीय जंगली मुर्गे को भी पालना चाहते हैं जिसकी मार्केट में काफी मांग रहती है, लेकिन अब तक उन्हे इस नस्ल के मुर्गे उपलब्ध नहीं हो सके हैं। धर्म सिंह मुर्गी पालन युक्त मिश्रित खेती की ओर बढ़ते हुए मछली पालन इकाई भी स्थापित की है जिसमें ट्राउट मछली के बीज डाले हैं। इसके अतिरिक्त उनके पास दो दुधारू जर्सी गाय भी हैं तथा पारंपरिक खेती-बाड़ी के साथ-साथ मौसमी सब्जियों का उत्पादन भी कर रहे हैं।
इस तरह धर्म सिंह मुर्गीपालन से न केवल अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रहे हैं बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा स्त्रोत भी बने हैं। उनका कहना है कि वैज्ञानिक तरीके से पूरी मेहनत व लग्न के साथ इस कार्य को किया जाए तो घर बैठे ही रोजगार का यह एक बेहतरीन साधन हो सकता है।
क्या कहते हैं अधिकारी
वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी जोगिन्दर नगर डॉ. अनीश कुमार का कहना है कि धर्म सिंह एक प्रगतिशील किसान हैं तथा मुर्गी पालन से घर बैठे अच्छी कमाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार पांच हजार ब्रायलर कुक्कुट इकाई स्थापना के तहत स्वरोजगार शुरू करने को पांच हजार चूजे प्रति लाभार्थी को पांच किश्तों में प्रदान किये जाते हैं। जिस पर 60 प्रतिशत सरकारी अनुदान लाभार्थी को कुक्कुट बाड़ा, आहार, वर्तन व चूजों की कीमत पर दिया जाता है जबकि 40 प्रतिशत लाभार्थी को स्वयं वहन करना होता है। इसके अलावा अनुसूचित जाति वर्ग के लिए बैकयॉर्ड पोल्ट्री स्कीम के अंतर्गत स्वरोजगार शुरू करने को एक दिन की आयु के चूजे को प्रति लाभार्थी 21 रूपये की दर से वितरित किया जाता है। उन्होने ज्यादा से ज्यादा बेरोजगार युवाओं से सरकार की इन योजनाओं का लाभ उठाते हुए घर पर ही रोजगार के साधन सृजित करने का आहवान् किया है। 

Wednesday, 24 July 2019

जोगिन्दर नगर वन मंडल में इस वर्ष 80 हैक्टेयर क्षेत्र में रोपे जाएंगे वन

विशेष पौधारोपण अभियान के तहत 65 हैक्टेयर क्षेत्रफल में नए पौधे रोपने का लक्ष्य   
हरित आवरण को बढ़ाने तथा नए पौधे लगाने के दृष्टिगत इस वर्ष जोगिन्दर नगर वन मंडल में लगभग 80 हैक्टेयर क्षेत्रफल में पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 20 से 24 जुलाई के दौरान प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे विशेष पौधारोपण अभियान के अंतर्गत पूरे वन मंडल में लगभग 65 हैक्टेयर क्षेत्रफल में सामुदायिक भागीदारी से नए पौधे रोपित किए जाएंगे। इस अभियान का शुभारंभ मुख्य मंत्री जय राम ठाकुर ने 19 जुलाई को मंडी के पनारसा से राज्य स्तरीय वन महोत्सव का शुभारंभ करते हुए किया था।
इस विशेष पौधारोपण अभियान के तहत पूरे वन मंडल की सभी वन रेंज में सामुदायिक भागीदारी से पौधारोपण किया जा रहा है। जिनमें स्थानीय पंचायतीराज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के अतिरिक्त युवक एवं महिला मंड़लों, स्वयं सहायता समूहों व स्थानीय जन समुदाय के व्यापक सहयोग से निर्धारित लक्ष्य को पूर्ण किया जा रहा है। 24 जुलाई तक चलने वाले इस 5 दिवसीय विशेष पौधारोपण अभियान की मोबाइल ऐप्प के माध्यम से ऑनलाईन निगरानी की जा रही है। साथ ही जन भागीदारी को बढ़ाने के लिए पौधारोपण के दौरान सेल्फी लेने को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। वास्तव में बिना सामुदायिक भागीदारी से कोई भी लक्ष्य प्राप्त करना संभव नहीं होता है। ऐसे में पौधारोपण अभियान के माध्यम से न केवल जन समुदाय की समुचित भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है बल्कि इससे वनों के संरक्षण व रोपित पौधों की समुचित देखभाल को भी बल मिलेगा। इस विशेष पौधारोपण अभियान के दौरान देवदार, बान, आंवला, दाडू, जामुन, हरड़, बेहड़ा, खैर इत्यादि पौधे संबंधित वन रेंज की जलवायु के आधार पर रोपित किए जा रहे हैं।
इसके अलावा सरकार की विद्यार्थी वन मित्र योजना के माध्यम से स्कूली बच्चों को वन व पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने तथा वनों से जोडऩे के लिए चयनित वन क्षेत्र में स्कूली बच्चों द्वारा पौधारोपण के साथ-साथ इनकी देखभाल भी सुनिश्चित बनाई जा रही है। जोगिन्दर नगर वन मंडल में राजकीय छात्र वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जोगिन्दर तथा नौहली स्कूलों के लिए क्रमश: आधा-आधा हैक्टेयर वन भूमि चिन्हित की गई है। चिहिन्त भूमि की बाड़बंदी तथा पौधे वन विभाग द्वारा मुहैया करवाए जा रहे हैं तथा पौधारोपण के साथ-साथ इनकी देखभाल का जिम्मा संबंधित स्कूल के बच्चों का है।
वर्तमान में जोगिन्दर नगर वन मंडल के अधीन कुल 25 हजार 775 हैक्टेयर क्षेत्रफल वनों के अधीन है। जिनमें जोगिन्दर नगर वन रेंज के तहत 6999 हैक्टेयर, उरला वन रेंज के अंतर्गत 5669, लड-भड़ोल वन रेंज के तहत 3091, कमलाह वन रेंज के तहत 1818, धर्मपुर वन रेंज के तहत 2172 जबकि टिक्कन वन रेंज के अंतर्गत 6024 हैक्टेयर क्षेत्रफल शामिल है।
क्या कहते हैं अधिकारी
सहायक वन अरण्यपाल जोगिन्दर नगर शशी किरण का कहना है कि प्रदेश सरकार ने गत वर्ष चले तीन दिवसीय विशेष पौधारोपण अभियान से प्रोत्साहित होकर इस वर्ष 5 दिवसीय विशेष अभियान चलाया है। जिसके तहत जोगिन्दर नगर वन मंडल में भी लगभग 65 हैक्टेयर क्षेत्रफल में जन भागीदारी से पौधा रोपण किया जा रहा है तथा इस वर्ष जोगिन्दर नगर वन मंडल में कुल 80 हैक्टेयर क्षेत्रफल में पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा वन विभाग के माध्यम से चलाई जा रही अन्य योजनाओं का भी बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित बनाया जा रहा है ताकि जहां हमारी अमूल्य वन संपदा सुरक्षित रहे तो वहीं पर्यावरण को भी साफ-सुथरा बनाए रखा जा सके। उन्होने ज्यादा से ज्यादा लोगों से पौधारोपण अभियान का हिस्सा बनने का आहवान् किया है।

Thursday, 18 July 2019

मझारनू के डुमणू राम के लिए सोलरयुक्त बाड़बंदी बनी वरदान

जंगली जानवरों के आतंक से मिली निजात, कृषि उपज में भी हो रही बढ़ौतरी
जिला मंडी में सोलरयुक्त बाडबंदी पर चालू वित्तीय वर्ष में व्यय होंगे 4.16 करोड़ रूपये

जोगिन्दर नगर उप-मंडल की ग्राम पंचायत नेर घरवासड़ा के गांव मझारनू निवासी 67 वर्षाीय डुमणू राम के लिए प्रदेश सरकार की सोलरयुक्त बाड़बंदी किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई है। डुमणू राम ने अपनी कृषि योग्य लगभग तीन बीघा भूमि में सोलरयुक्त बाड़बंदी को लगाया है। जिसके कारण हमेशा जंगली सुअरों व बंदरों के कारण नष्ट होने वाली खेती को अब न केवल सहारा मिला है बल्कि जंगली जानवरों की पहरेदारी से भी छुटकारा हो गया है।  

इस संबंध में जब बीपीएल परिवार में शामिल कृषक डुमणू राम से बातचीत की तो कहना है कि उन्हे कृषि विभाग के माध्यम से सरकार की सोलरयुक्त बाडबंदी का पता चला। बाडबंदी लगाने के लिए उन्होने अपनी ओर से लगभग 64 हजार रूपये खर्च किए हैं जबकि सरकार ने लगभग अढ़ाई लाख रूपये बतौर उपदान उपलब्ध करवाए हैं। विभाग के माध्यम से सोलरयुक्त बैटरी के संचालन बारे भी जानकारी उपलब्ध करवाई गई है तथा वे अब स्वयं ही इसकी देखभाल कर रहे हैं।

दो लडक़े व दो लड़कियों के पिता डुमणू राम का कहना है कि खेती-बाड़ी ही उनका प्रमुख पेशा रहा है तथा वे जीवन भर खेती बाड़ी व बागवानी से जुड़े रहे हैं। समय के बदलाव बारे कहते हैं कि अब जहां खेतीबाड़ी की नई-नई तकनीकें सामने आई हैं तो वहीं नकदी फसलों के कारण आमदन में भी बढ़ौतरी हुई है। उनका कहना है कि पारंपरिक खेती बाजरा, मक्की, गेहूं के साथ-साथ वे अब मौसमी सब्जियों का भी उत्पादन कर रहे हैं। साथ ही बागवानी के क्षेत्र में भी आगे बढ़ते हुए जहां लगभग 250 अमरूद के तो वहीं अनार, आम, जामुन व आडू के फलदार पौधे भी लगाए हैं। इसके अलावा नींबू व गल-गल के फलदार पौधे भी तैयार किए हैं।

डुमणू राम का कहना है कि जंगली सुअरों व बंदरों के कारण उनकी फसल तथा फलदार पौधों को नुकसान हो रहा था, लेकिन अब बाड़बंदी हो जाने से उन्हे न केवल राहत मिली है बल्कि फसल भी बच रही है। उनका कहना है कि गांव में पानी, बिजली इत्यादि की कोई कमी नहीं लेकिन जंगली जानवरों के कारण फसलों को अक्सर नुकसान होता था, लेकिन सरकार की मुख्य मंत्री खेत संरक्षण योजना के अंतर्गत सोलरयुक्त बाड़बंदी हो जाने के कारण उनकी यह समस्या भी हल हो गई है। डुमणू राम न केवल प्रदेश की जयराम ठाकुर सरकार का धन्यवाद व्यक्त करते हैं बल्कि किसान हित में चलाई जा रही योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर जोर देते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान लाभान्वित हो सकें।  
कैसे करें आवेदन
मुख्य मंत्री खेत संरक्षण योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए किसान को निर्धारित प्रपत्र के साथ जमीन की नकल व तमीमा लगाकर अपने नजदीकी कृषि विकास अधिकारी या विषयवाद विशेषज्ञ के कार्यालय में आवेदन करना होता है। इसके बाद सोलरयुक्त बाडबंदी लगाने के लिए अधिकृत कंपनी एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा संबंधित किसान की जमीन का दौरा कर प्राक्कलन तैयार किया जाता है। तदोपरान्त तैयार प्राक्कलन को स्वीकृति हेतु उपनिदेशक कृषि को भेजा जाता है। स्वीकृति मिलने के बाद प्राधिकृत कंपनी द्वारा सोलरयुक्त बाडबंदी की जाती है तथा कंपनी और किसान के मध्य एक समझौता भी किया जाता है। इस योजना के तहत व्यक्तिगत तौर पर बाडबंदी को 80 प्रतिशत जबकि सामूहिक तौर पर 85 प्रतिशत तक अनुदान मुहैया करवाया जाता है। इस योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी कृषि विभाग के कृषि विकास अधिकारी, कृषि प्रसार अधिकारी, विषयवाद विशेषज्ञ या उपनिदेशक कृषि के कार्यालय से संपर्क  कर सकते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
इस बारे उपनिदेशक कृषि मंडी डॉ. जीत सिंह ठाकुर का कहना है कि जिला में वर्ष 2018-19 में सोलरयुक्त बाड़बंदी को 4.55 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया था जिसके तहत पूरे जिला में 189 किसानों की बाडबंदी को स्वीकृति प्रदान की गई है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में सरकार ने सोलरयुक्त बाडबंदी के लिए 4.16 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया है और अब तक 35 किसानों को सोलरयुक्त बाड़बंदी लगाने को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। उन्होने बताया कि सरकार मुख्य मंत्री खेत संरक्षण योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत तौर पर 80 प्रतिशत जबकि सामूहिक तौर पर सोलरयुक्त बाड़बंदी को 85 प्रतिशत तक का अनुदान मुहैया करवा रही है। उन्होने ज्यादा से ज्यादा किसानों से इस योजना का लाभ उठाने का आहवान किया है।

Wednesday, 12 June 2019

हिम केयर योजना के तहत पांच लाख रूपये तक मिलेगा मुफ्त ईलाज

20 जून, 2019 तक जारी रहेगा हिम केयर योजना में पंजीकरण
केंद्र की मोदी सरकार ने देश के गरीब परिवारों के स्वास्थ्य की चिंता करते हुए दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत-प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना को प्रारंभ किया है। इस योजना के अंतर्गत जहां पूरे भारत वर्ष में लगभग 11 करोड़ गरीब परिवारों की लगभग 55 करोड़ आबादी को बीमारी में अस्पताल में भर्ती होने पर अब पंजीकृत अस्पताल में पांच लाख रूपये तक के फ्री ईलाज की सुविधा का प्रावधान किया है। इस योजना के अंतर्गत अकेले जिला ऊना में ही अब तक लगभग 24 हजार 324 गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं। जबकि इस योजना से लाभान्वित होने वाले पात्र परिवारों की संख्या लगभग 43 हजार के आसपास है। जिला में आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाने की सुविधा जिला के समस्त लोकमित्र केन्द्रों के साथ-साथ ऊना के क्षेत्रीय अस्पताल के कमरा न0 100 में तथा फील्ड के स्वास्थ्य संस्थानों जिनमें अम्ब, हरोली, गगरेट, दौलतपुर चौक, चिन्तपुरनी, बंगाणा तथा आयुर्वेदिक अस्पताल ऊना व ईसपुर शामिल है में उपलब्ध है।
आयुष्मान भारत योजना से प्रेरित होकर प्रदेश की श्री जय राम ठाकुर सरकार ने प्रदेश के ऐसे सभी परिवारों को पांच लाख रूपये तक के ईलाज की सुविधा पंजीकृत अस्पतालों व चिकित्सा संस्थानों में मुहैया करवाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है जो आयुष्मान भारत योजना के दायरे में शामिल नहीं हो सके हैं। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश सहित जिला ऊना का कोई भी परिवार निर्धारित शुल्क अदा कर इस योजना का लाभ उठा सकता है। जिला ऊना में इस योजना के अंतर्गत अब तक लगभग पांच हजार परिवारों ने अपना नाम पंजीकृत करवा लिया है तथा आगामी 20 जून, 2019 तक पंजीकरण की प्रक्रिया जारी रहेगी। वर्तमान में जिला ऊना में 15 अस्पतालों में इस योजना का लाभ मिल रहा है जिसमें चार निजी अस्पताल भी शामिल हैं। पूरे प्रदेश भर में अब तक लगभग दो लाख लोगों ने इस योजना के अंतर्गत पंजीकरण करवा लिया है।
हिमकेयर योजना के अंतर्गत ये रहेंगी प्रीमियम की दरें
हिमकेयर योजना के अन्तर्गत श्रेणियों को ध्यान में रखते हुए प्रीमियम की दरें तय की गई हैं। गरीबी रेखा से नीचे (बी.पी.एल.), पंजीकृत रेहड़ी-फड़ीवाले (जो कि आयुष्मान भारत में पंजीकृत नहीं है) और मनरेगा के अन्तर्गत जिन्होने पिछले वर्ष 50 दिन या उससे अधिक कार्य किया है, से प्रीमियम नहीं लिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त एकल नारी, 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग, 70 वर्ष आयु से अधिक वरिष्ठ नागरिक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी सहायिकाएं, आशा कार्यकर्ता, मिड-डे मील कार्यकर्ता, दिहाड़ीदार (सरकारी, स्वायत्त संस्थानों, सोसायटी, बोर्ड एवं निगम के कर्मचारी), अंशकालिक कार्यकर्ता (सरकारी, स्वायत्त संस्थानों, सोसायटी, बोर्ड एवं निगम के कर्मचारी), अनुबन्ध कर्मचारी (सरकारी, स्वायत्त संस्थानों, सोसायटी, बोर्ड एवं निगम के कर्मचारी) और आउटसोर्स कर्मचारी से केवल 365 रूपये पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति नियमित सरकारी कर्मचारी या सेवानिवृत कर्मचारी नहीं है केवल 1000 रूपये देकर योजना के अन्तर्गत कार्ड बनवा सकते हैं।
इस योजना के अन्तर्गत लोकमित्र केन्द्र/कॉमन सर्विस सैंटर नामांकन करने और निर्धारित दस्तावेजो को अपलोड करने के लिए लाभार्थी से प्रीमियम के अतिरिक्त 50 रूपये का शुल्क लिया जा रहा है। जिन लाभार्थियों के कार्डों की पॉलिसी अवधि समाप्त हो चुकी है या हो रही है उन्हे वैबसाइट पर आधारकार्ड, राशनकार्ड, मोबाईल नम्बर और श्रेणी प्रमाण पत्र अपलोड करवाकर और निर्धारित प्रीमियम का भुगतान ऑनलाइन करके नवीनीकरण करवाना होगा। नवीनीकरण नजदीकी लोकमित्र केन्द्र में जाकर भी करवाया जा सकता है जिसके लिए 50 रूपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
योजना में सभी तरह की आम व गंभीर बीमारियों को शामिल किया गया है। लाभार्थी देश व प्रदेश में आयुष्मान भारत के अन्तर्गत पंजीकृत अस्पतालों में जाकर ईलाज प्राप्त कर सकते हैं। इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए जिला समन्वयक दीपक चब्बा के मोबाईल न0 98824-87364 पर सम्पर्क किया जा सकता है।


Wednesday, 5 June 2019

सारंगी का केंद्रीय मंत्री परिषद् में शामिल होना एक ऐतिहासिक घटना

सारंगी के बहाने बदलते भारतीय समाज का विश्लेषण
पिछले दिनों प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की कैबिनेट में ओडीसा राज्य से आने वाले प्रताप चंद सारंगी का केंद्रीय मंत्री परिषद् में शामिल होना शायद देश के इतिहास में एक बड़ी घटना कही जा सकती है। जिस तरह से अचानक सारंगी का नाम केंद्रीय मंत्री परिषद् में शामिल हुआ, इस वाकया ने पूरे देश में न केवल एक नई बहस को ही जन्म नहीं दिया है बल्कि देश के 135 करोड़ लोगों को एक संदेश भी दिया है। वास्तव में किसी ऊंचे पद को पाने की लालसा या फिर मन पसंद कार्य के लिए लोग न जाने क्या-क्या नहीं करते हैं। ऊपर से लेकर नीचे तक साम, दाम, दंड, भेद का जहां तक इस्तेमाल हो सके करते हैं। बस केवल निजी स्वार्थ एवं इच्छा पूर्ति के लिए। 
लेकिन सारंगी का मंत्री परिषद् में शामिल होना देश के उन करोड़ों लोगों के लिए एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रहा है जो लोग पूरी मेहनत, ईमानदारी, लगन व कर्तव्य निष्ठा के साथ से न केवल अपने कत्र्तव्यों का बेहतरीन निर्वहन कर रहे हैं बल्कि अपनी गोटियां फिट करने के बजाए अपनी कार्य क्षमता के बेहतर इस्तेमाल को तरजीह देते हैं। ये वो लोग होते हैं जिन्हे न तो किसी पद की लालसा होती है न ही पद को पाने के लिए जोड़-तोड़ करने के लिए पसीना बहाने की जरूरत। ऐसे लोगों का बस एक की मकसद होता है नि:स्वार्थ भाव से देश व समाज की सेवा करना। दूसरी तरफ चालाक व मौकापरस्त लोग इच्छा पूर्ति के लिए न जाने क्या-क्या नहीं करते हैं। इस पर चर्चा करने की शायद आवश्यकता नहीं है।
लेकिन सांरगी का मंत्री परिषद् में शामिल होना उन करोड़ों लोगों को एक सकारात्मकता का संदेश दे रहा है जो पूरी ईमानदारी व कर्तव्य निष्ठा के साथ देश के निर्माण में जुटे हुए हैं। वास्तव में आज हमें इसी तरह के मॉडल पर कार्य करने की आवश्यकता है। लेकिन ऐसा नहीं है यह मॉडल नया है बल्कि आज भी हमारे समाज में ऐसे कई लोग व विचार कार्य कर रहे हैं जो बिना किसी निजी स्वार्थ के वर्षों से अपना जीवन देश के लिए समर्पित किए हुए हैं। वास्तव में आज उन लोगों एवं विचार की भी ये एक बहुत बड़ी जीत है जो हमेशा देश व राष्ट्र निर्माण के लिए अपने-अपने दायित्वों का कार्य क्षेत्र में रहकर बेहतरीन निष्पादन कर रहे हैं। सचमुच यह घटना आने वाले समय में एक बहुत बड़ा सामाजिक बदलाव लाने तथा लोगों की सोच को परिवर्तित करने में अहम भूमिका निभाने वाली है। यह विषय आज देश के समाजशास्त्रीयों एवं राजनैतिक वैज्ञानिकों को भी नए शोध करने को प्रेरित कर रहा है कि आखिर किस तरह हमारे समाज में एक छोटे से व्यक्ति को समाज की मुख्यधारा से न केवल जोड़ा जा सकता है बल्कि देश के उत्थान व कल्याण में वह एक बहुत बड़ी भूमिका में खड़ा हो सकता है। कुल मिलाकर यह घटना आज पूरे समाज में न केवल चर्चा का विषय बनी हुई है बल्कि एक कौतुहल भी पैदा कर रही है।

Sunday, 2 June 2019

आम आदमी भी बधाई देना चाहता है सरकार (व्यंग्य)

यदि नई नवेली सरकार को बधाईयां देने वालों का तांता खत्म हो चुका हो। चाटुकार, मौकापरस्त, चालाक, चापलूस व आवभगत में हमेशा नम्बर वन रहने वालों ने अपनी-2 गोटियां फिट कर ली हों। सोशल मीडिया में ढूंढ़-2 कर फोटो अपलोड कर नेताओं के खासमखास होने का दावा करने वालों की लाईन खम्म हो चुकी हो, तो ऐसे में हजूर देश का आम आदमी व समाज की अंतिम पंक्ति में रहकर सरकार निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाला आम व गरीब आदमी भी 135 करोड़ भारतवासियों की नई मोदी सरकार को बधाई देना चाहता है। सरकार, आव भगत के लिए मेरे पास न तो बड़े-बड़े फूलों के हार व गुलदस्ते हैं, न ही राजनैतिक व सत्ता के गलियारों में मेरी पहुंच। लेकिन दिल में बधाई देने की उमंग रह-रह कर बाहर फूट रही है। दिल को बार-बार समझाने पर भी यह कमबख्त समझ नहीं रहा है, बस एक ही रट्ट लगाए बैठा है, भई मैं कहने को आम व गरीब जरूर हूं लेकिन मैं भी नई सरकार को बधाई देने में पीछे क्यों रहूं? मैं भी इसी देश का उतना ही महत्वपूर्ण नागरिक हूं, जितने ये मलाईचाट, चाटुकार, मौकापरस्त व चापलूस लोग। बस इसी धुन में सवार होकर आज आम आदमी भी मोदी सरकार को बधाई देने के लिए लालायित हो उठा है। हजूर, अब आप इसे मोदी जी का करिश्मा कहें या फिर उनकी कार्यशैली आखिर मैं भी आज बधाई देने वालों में शामिल होना चाहता हूं। 
वास्तव में यह हमारे देश का वह अहम व महत्वपूर्ण वर्ग है जो बड़ी उम्मीदों भरी निगहों से दूर कोने में बैठकर अपने जीवन की बेहतरी की आस सीने में हमेशा जगाए रहता है। यह वह आम व्यक्ति है जो अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में गुणवत्तायुक्त शिक्षा की आस बंधाता है, सरकारी अस्पतालों की लंबी व कभी खत्म न होने वाली कतारों में खड़ा होकर बेहतर ईलाज की चाहत में जीवन की अंतिम सांसे गंवा बैठता है। रहने के लिए अदद एक कमरे की तलाश में घास-फूस के बार-बार जलते व बनते आशियाने में जीवन त्याग देता है। दो वक्त की रोटी के लिए दिन-रात पसीना बहाता है, देश-प्रदेश भटकता है। यह वह आम व्यक्ति है जिसकी पहुंच राजनेताओं व सरकार की चौखट तक संभव नहीं हो पाती है।
बस इसी आस के साथ आज नई नवेली सरकार को बधाई देना चाहता है कि अब शुरूआत बड़े-बड़े लोगों से नहीं बल्कि सुदूर किसी अंचल के कोने में बैठे मेरे जैसे गरीब आदमी के दु:ख , दर्द व तकलीफ देखकर होगी। माई बाप आप मेरे इसी दु:ख व दर्द को ध्यान में रखकर नीतियां व योजनाओं का न केवल खाका तैयार करेंगे बल्कि मेरे जैसे करोड़ों गरीब व आम आदमी तक पहुंच सुनिश्चित भी होगी।
अरे भई! इस बात में कोई संदेह ही नहीं है कि जिस प्रचंड बहुमत व समर्थन से देश में पुन: मोदी जी आए हैं निश्चित तौर पर मेरे जैसे करोड़ों गरीब व आम भारतीयों के उत्थान व कल्याण में दो कदम आगे बढ़ते हुए कोई कोर कसर भी तो नहीं छोडऩे वाले हैं। बस फिर क्या था? इसी उम्मीद, नए जोश व उमंग तथा रोशनी के साथ दूर कोने में टुकर-टुकर सी नजर गड़ाए बैठे गरीब व आम आदमी ने भी इस नए उल्लास के साथ बधाई दे ड़ाली है कि पुन: एक बार देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी व उनकी पूरी टीम उनके जैसे करोड़ों लोगों के सपनों को साकार करने में नए मील के पत्थर रखेगी। 
जय हिंद। वंदे मातरम्।
(मौलिक लेखन चुराईटर सावधान रहें अन्यथा कानूनी कार्रवाई हो सकती है)

Wednesday, 24 April 2019

युवा वोटरों के लिए रोल मॉडल बनेंगे शतायु मतदाता


चिंतपूर्णी विस क्षेत्र में 100 साल से अधिक के 20 वोटर
 ''जब वोट देने का अधिकार है तो सरकार बनाने में भागीदार तो ज़रूर बनूंगा।'' चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले धुसाड़ा गांव के 105 वर्षीय मतदाता धनी राम बड़े ही गर्व के साथ यह बात कहते हैं। शतायु धनी राम बताते हैं कि वह पहले चुनाव से ही वोट डालते आ रहे हैं, जब से देश आज़ाद हुआ और मत डालने का अधिकार मिला, तब से ही वह हर चुनाव में वोट डालते आ रहे हैं।
टकारला की रहने वाली 108 वर्षीय ब्रह्मी देवी भी युवा मतदाताओं से अपना वोट डालने की अपील कर रही हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पहले के चुनावों में भी कई बार मताधिकार का प्रयोग किया है और इस बार भी वह अवश्य वोट डालने जाएंगी। हालांकि अब उनका स्वास्थ्य उतना अच्छा नहीं रहता। चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र के ही अंतर्गत आने वाले नंदग्राम के 109 वर्षीय लीखू राम ने भी मताधिकार के लिए कमर कस ली है। उनका कहना है कि 19 मई को इस बार लोकसभा के लिए वोट डाले जाएंगे और वह अपना वोट डालने हर हाल में जाएंगे। यही नहीं लीखू राम कहते हैं कि वह अपने परिवार को भी मतदान के लिए साथ लेकर जाएंगे।
चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत 20 मतदाता ऐसे हैं, जिनकी आयु एक सौ वर्ष या उससे अधिक है। ऐसे में चुनाव आयोग सभी शतायु मतदाताओं को रोल मॉडल बनाने की तैयारी कर रहा है। ताकि इस बार चुनाव में वोट प्रतिशत बढ़ाया जा सके। इन बुजुर्ग वोटरों का जोश देखकर युवा मतदाता भी लोकतंत्र के इस महायज्ञ में अपनी-अपनी आहुति डालने के लिए मतदान केंद्र पर ज़रूर आएं।
शतायु मतदाताओं के बारे में जिला निर्वाचन अधिकारी व उपायुक्त ऊना राकेश कुमार प्रजापति ने कहा कि ऐसे सभी मतदाताओं को निर्वाचन विभाग की ओर से मतदान का निमंत्रण दिया जाएगा और इसके लिए बाकायदा कार्ड छापे जा रहे हैं। निर्वाचन विभाग के कर्मचारी स्वयं जाकर उन्हें निमंत्रण पत्र देंगे, ताकि वह लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी भागीदारी सुनिश्चित बना सकें।
उपायुक्त ने कहा कि कई बुजुर्ग ऐसे भी हैं, जो ज्यादा उम्र और कमजोरी की वजह से मतदान करने से गुरेज कर रहे हैं, लेकिन फिर भी निर्वाचन विभाग की कोशिश है कि उन्हें इस बार मतदान के लिए पोलिंग बूथ तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए पूरे जिला में विशेष अभियान छेड़ा गया है, ऐसे में बुजुर्ग मतदाता बाकी सब के लिए प्रेरणास्त्रोत बन सकते हैं। 
साथ ही उन्होंने कहा कि शतायु मतदाताओं को अगर किसी भी तरह की कोई परेशानी हो तो, वह तहसीलदार (निर्वाचन) या फिर टोल फ्री नंबर 1950 संपर्क कर सकते हैं। उपायुक्त ने भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। 

Wednesday, 10 April 2019

युवा मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए सोशल मीडिया का व्यापक इस्तेमाल

आईपीएस शालिनी अग्रिहोत्री, कॉमेडियन प्रिंस गर्ग व कबड्डी खिलाडी अजय ठाकुर के संदशों को लोग कर रहे पसंद
जिला ऊना में ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को मतदान के प्रति प्रेरित करने व मतदान केंद्र तक लाने के लिए जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं ताकि जिला ऊना आगामी 19 मई को होने वाले लोकसभा चुनाव में मतदान करने में भी पीछे न रहे। एक तरफ जहां मतदाता जागरूकता के लिए सुव्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचक सहभागिता (स्वीप) कार्यक्रम के अंतर्गत मतदाता जागरूकता से जुड़े अनेेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं तो वहीं परंपरागत प्रचार-प्रसार माध्यमों का भी व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी कड़ी में 21वीं सदी में इंटरनेट व मोबाइल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के कारण आज सोशल मीडिया भी प्रचार-प्रसार का एक सशक्त माध्यम बन गया है। लोकसभा चुनाव की दृष्टि से जिला ऊना में मतदाता जागरूकता के लिए सोशल मीडिया का भी व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है जिसके न केवल सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं बल्कि नए एवं युवा मतदाताओं द्वारा इसे पसंद भी किया जा रहा है। 
इस बारे जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त ऊना राकेश कुमार प्रजापति का कहना है कि प्रदेश में 19 मई को निर्धारित लोकसभा चुनाव के दौरान जिला ऊना के अधिक से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने तथा मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने के लिए परंपरागत प्रचार माध्यमों के अतिरिक्त सोशल मीडिया का भी व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होने कहा कि मतदाता जागरूकता की दृष्टि से जिला की आईपीएस बेटी एवं वर्तमान में कुल्लू की पुलिस अधीक्षक शालिनी अग्रिहोत्री, कॉमेडियन प्रिंस गर्ग तथा अंतर्राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी पदमश्री अजय ठाकुर की मतदाताओं के नाम अपील को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित किया जा रहा है। उन्होने कहा कि जिला निर्वाचन कार्यालय ऊना के फेसबुक पेज के साथ-साथ टवीटर व यू-टयूब पर भी इन जागरूकता संदेशों को प्रसारित किया जा रहा है तथा बडी संख्या में इन संदेशों को लोगों द्वारा देखा जा रहा है। 
इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया के माध्यम से जिला के शतायु मतदाताओं की अपील को भी प्रचारित  व प्रसारित किया जा रहा है ताकि मतदाता विशेषकर युवा मतदाता न केवल अपने वोट का पंजीकरण करें बल्कि मतदान प्रक्रिया में भी बढ़चढक़र भाग ले सकें। उन्होने कहा कि युवा मतदाताओं को मताधिकार बारे जागरूक करने में सोशल मीडिया एक अहम भूमिका निभा सकता है जिसका जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होने कहा कि आने वाले समय में अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की मतदाताओं के नाम अपील को भी प्रसारित किया जाएगा, साथ ही मतदाता जागरूकता की दृष्टि से नई पहल भी की जाएगी।  

Thursday, 4 April 2019

कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) भूकंप 4 अप्रैल, 1905

खबरदार! हम मौत व तबाही के आगोश में हैं। आप सोच रहे हैं कि आज मैं यह क्या लिख रहा हूं, लेकिन हिमाचल के संदर्भ में यह सच है। आज ही के दिन यानि कि 4 अप्रैल, 1905 को हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत कांगड़ा घाटी में भूकंप ने तबाही का मंजर लिख दिया था, हजारों लोग असमय ही मौत की नींद सो गए थे जबकि हजारों लोग जख्मी हो गए थे। भले की वक्त के साथ-साथ प्राकृतिक आपदा द्वारा दिए गए ये जख्म काफी हद तक भर दिए हों, लेकिन जिस तेजी के साथ हिमाचल प्रदेश में निर्माण हुआ है, आने वाले समय में इसे किसी भयानक खतरे से कम नहीं आंका जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश जहां अपनी प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ व शंात वातावरण के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन दूसरी तरफ हर वक्त भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा हमेशा तबाही का कब मंजर लिख दे, उसका डर भी बना रहता है। यदि आज के संदर्भ में कहूं तो महज 6 तीव्रता वाला भूकंप तबाही के लिए काफी है। लेकिन ऐसे में प्रश्न यह उठ रहा है कि तो क्या हम यहां से भाग खड़े हों या फिर इस भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए तैयार रहें।
यहां हमें यह नहीं भूलना चाहिए भूकंप जैसी किसी भी प्राकृतिक आपदा को रोकना हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन भूकंप के प्रति जागरूकता तथा प्रदेश की अतिसंवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए भूकंप रोधी निर्माण हमें इस तबाही से काफी हद तक बचा सकता है। तो आओ भूकंप को लेकर न केवल स्वयं बल्कि
परिवार व समाज के दूसरे लोगों को भी जागरूक करने का प्रण लें ताकि कल यदि 1905 वाला मंजर प्रकृति दोहराती है तो कम से कम जानी माल का नुकसान हो, इस दिशा में तो हम प्रयास कर ही सकते हैं। यहां मुझे एक पंक्ति याद आ रही है कि इतिहास हमेशा स्वयं को दोहराता है। इसलिए भूकंप को लेकर स्वयं भी सतर्क व जागरूक रहें व दूसरों को जागरूक करें।
(फोटोग्राफ को इंटरनेट से लिया गया है।)
-000-

Saturday, 29 December 2018

जिला रोजगार कार्यालय व कॉलेज युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार बारे देंगे परामर्श

प्रदेश सरकार के प्रयासों से अब पढ़ाई के दौरान ही युवाओं को रोजगार बारे मिलेगी जानकारी
प्रदेश सरकार ने स्कूलों व कॉलेजों में शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार की संभावनाओं बारे जागरूक बनाने के लिए प्रदेश के जिला रोजगार कार्यालयों एवं बड़े कॉलेजों में रोजगार सैल स्थापित करने का अहम निर्णय लिया है। सरकार के इस महत्वपूर्ण निर्णय से अब युवाओं को उपलब्ध रोजगार की संभावनाओं की तलाश में इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। वास्तव में प्रदेश व प्रदेश के बाहर उपलब्ध विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त करने तथा स्वरोजगार की संभावनाओं को लेकर युवाओं को जहां रोजगार हासिल करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है बल्कि सही जानकारी व परामर्श के अभाव में वर्षों तक बेरोजगारी का दंश भी झेलना पड़ता है। लेकिन प्रदेश के युवाओं के इस दर्द को समझते हुए मुख्य मंत्री जय राम ठाकुर ने रोजगार व स्वरोजगार के विभिन्न क्षेत्रों बारे जागरूक बनाने के लिए जिला रोजगार कार्यालयों एवं चुनिंदा महाविद्यालयों में रोजगार सैल स्थापित कर परामर्श सुविधा उपलब्ध करवाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए इस बारे सरकार ने आवश्यक दिशा निर्देश भी जारी कर दिए हैं। 
सरकार ने जिला स्तर पर परामर्श टीम के संचालन के साथ-साथ जिला व राज्य स्तर पर इसकी निगरानी के लिए कमेटियों का भी गठन किया गया है। जिला स्तर पर उप-मंडलाधिकारी नागरिक की अध्यक्षता में यह परामर्श टीम कार्य करेगी। इस टीम में कृषि, बागवानी, पशु पालन, पर्यटन, उद्योग, आयुर्वेद, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, परिवहन, जिला अग्रणी बैंक एवं आरसेटी, विश्वविद्यालय, औद्योगिक संगठनों, हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम तथा सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग का एक-एक प्रतिनिधि शामिल रहेगा जबकि जिला रोजगार अधिकारी इस परामर्श टीम का सदस्य सचिव होगा। परामर्श टीम की निगरानी के लिए जहां जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में तो वहीं राज्य स्तर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (श्रम एवं रोजगार) की अध्यक्षता में कमेटी कार्य करेगी। जिला स्तरीय निगरानी समिति में उपनिदेशक एवं परियोजना अधिकारी डीआरडीए, उपनिदेशक उद्योग, कृषि, बागवानी, उच्च शिक्षा, प्रारंभिक शिक्षा, जिला पर्यटन अधिकारी इसके सदस्य होंगे जबकि जिला रोजगार अधिकारी समिति के सदस्य सचिव होंगे। इसी तरह राज्य स्तरीय निगरानी समिति में प्रधान सचिव शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, पर्यटन, बागवानी, उद्योग, तकनीकी विश्व विद्यालय, बागवानी विवि, कृषि विवि व हिमाचल प्रदेश विश्व विद्यालय के कुल सचिव तथा हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के प्रबंध निदेशक सदस्य जबकि श्रमायुक्त एवं निदेशक रोजगार विभाग इसके सदस्य सचिव होंगे। 
कब और कैसे मिलेगा स्कूली व कॉलेज विद्यार्थियों को परामर्श:
परामर्श टीम के संचालन के लिए सरकार ने दिशा निर्देश जारी करते हुए बताया कि प्रत्येक माह के आखिरी शुक्रवार को 9वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को जिला रोजगार कार्यालय जबकि प्रत्येक माह के आखिरी शनिवार को संबंधित जिला के कॉलेजों में सांय 3 से 5 बजे के दौरान परामर्श सत्र का आयोजन किया जाएगा। जिसमें विद्यार्थियों को रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार के विभिन्न क्षेत्रों बारे व्यापक जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी। 
सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अंतर्गत 9वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को कला, विज्ञान तथा कॉमर्स संकाय में उपलब्ध रोजगार की संभावनाओं के साथ उपलब्ध कौशलों एवं प्रशिक्षण की जानकारी दी जाएगी। इसी तरह कॉलेज में शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को अतिरिक्त कौशल सुधार के साथ-साथ विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं, प्लेसमेंट तथा रोजगार की संभावनाओं पर परामर्श उपलब्ध करवाया जाएगा।
इसके अतिरिक्त सरकार ने इस संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित बनाने के लिए भी संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 
ऐसे में निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि सरकार द्वारा स्कूली व कॉलेज विद्यार्थियों को रोजगार व स्वरोजगार के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं बारे परामर्श प्राप्त होने से जहां युवाओं को रोजगार प्राप्त करने में आसानी होगी तो वहीं स्वरोजगार को लेकर भी युवा जागरूक हो सकेंगे। साथ ही प्रदेश सरकार के इस महत्वपूर्ण कदम से युवाओं को पढ़ाई पूर्ण होते ही रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटकने से भी निजात मिलेगी।
क्या कहते हैं अधिकारी:
इस बारे उपायुक्त ऊना राकेश कुमार प्रजापति का कहना है कि सरकार की ओर से स्कूली व कॉलेज विद्यार्थियों को रोजगार व स्वरोजगार हेतु रोजगार सैल के माध्यम से परामर्श देने के लिए दिशा-निर्देश प्राप्त हुए हैं तथा जिला में संबंधित विभागों के माध्यम से इस पर जल्द ही अमल किया जाएगा।





(साभार: पंजाब केसरी, दिव्य हिमाचल, दैनिक जागरण, दैनिक सवेरा टाईम्स, आपका फैसला, अजीत समाचार, 29 दिसम्बर, 2018 में प्रकाशित)