Himdhaara Search This Blog

Sunday, 6 September 2026

लीची के बागों से महकने लगी बिलासपुर के लंझता गांव की धरती

  13.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 54 किसानों ने रोपित किये हैं दस हजार से अधिक लीची के पौधे

एचपी शिवा परियोजना ने किसानों को दी समृद्धि की नई राह, अब फल देने लगे हैं वर्षों की मेहनत के पौधे

जिला बिलासपुर के घुमारवीं उपमंडल की ग्राम पंचायत लंझता आज अपनी पहचान बदल रही है। यहां खेतों में अब केवल मौसमी फसलें ही नहीं, बल्कि लीची के हरे-भरे बाग भी भविष्य की समृद्धि का संदेश दे रहे हैं। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी एचपी शिवा परियोजना ने इस बदलाव की मजबूत नींव रखी है। कुछ वर्ष पहले तक जिन किसानों के लिए व्यावसायिक फलोत्पादन केवल एक कल्पना मात्र था, आज वही किसान अपने बागों में लगने वाले फलों को देखकर न केवल उत्साहित हैं बल्कि भविष्य में आर्थिक समृद्धि के लिए भी आशान्वित हैं।

गांव में इस परिवर्तन की शुरुआत वर्ष 2019-20 में हुई, जब ग्राम पंचायत लंझता को एचपी शिवा परियोजना के अंतर्गत फ्रंट लाइन डेमोस्ट्रेशन (एफएलडी) के लिए चयनित किया गया। प्रारंभिक चरण में 500 लीची के पौधों का रोपण किया गया। किसानों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और परियोजना के सफल क्रियान्वयन ने इस पहल को गति दी। परिणामस्वरूप वर्ष 2020-21 तथा 2021-22 में 9,505 अतिरिक्त पौधों का रोपण किया गया। आज यह प्रयास एक संगठित लीची क्लस्टर का रूप ले चुका है, जहां लगभग 13.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 54 किसान आधुनिक लीची फलोत्पादन से जुड़े हैं।
किसी भी बागवानी परियोजना की सफलता केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होती है, बल्कि पौधों के संरक्षण, सिंचाई और वैज्ञानिक देखभाल के लिए मजबूत आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता भी रहती है। इसी परियोजना के अंतर्गत पौधों की सिंचाई के लिए एक लाख लीटर क्षमता का विशाल जल भंडारण टैंक तथा 20-20 हजार लीटर क्षमता के सात अन्य टैंक निर्मित किए गए हैं। साथ ही बागवानी विभाग के अधिकारी समय-समय पर किसानों का तकनीकी एवं वैज्ञानिक तौर पर मार्गदर्शन भी प्रदान कर रहे हैं। इन तमाम प्रयासों एवं सुविधाओं ने जहां किसानों को सिंचाई संबंधी चिंताओं से काफी हद तक राहत प्रदान की है तो वहीं पौधों की नियमित देखभाल एवं निगरानी से पौधों का बेहतर विकास भी सुनिश्चित हुआ है।

इस संबंध में जब लाभार्थी किसान प्रकाश चंद से बातचीत की तो उनके चेहरे की मुस्कान ने इस परियोजना की सफलता की सबसे बड़ी गवाही दी। उन्होंने अपनी जमीन में लगभग 850 लीची के पौधे लगाए हैं। वे कहते हैं कि जब पौधे लगाए गए थे, तब भरोसा नहीं था कि कुछ वर्षों बाद यही पौधे उनकी आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनेंगे। लेकिन आज उन्हीं पौधों पर फल आना शुरू हो गया है। वे कहते हैं, यह केवल लीची का फल नहीं, बल्कि हमारी वर्षों की मेहनत और उम्मीदों का परिणाम है। आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ेगा तो निश्चित रूप से हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।
इसी तरह एक अन्य लाभार्थी किसान लता देवी ने भी अपनी भूमि में 834 लीची के पौधे लगाए हैं तथा पिछले वर्ष से पौधों पर अच्छी गुणवत्ता के फल आने लग गए हैं। वह विश्वास के साथ कहती हैं कि जैसे-जैसे पौधे अधिक परिपक्व होंगे, उन्हें अच्छी फसल प्राप्त होने पर आय में भी वृद्धि होगी। लता देवी कहती हैं कि लीची जैसे व्यावसायिक फलोत्पादन ने उन जैसी अनेक ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई संभावनाएं के द्वार खोले हैं।

किसानों का कहना है कि गत वर्ष इस क्लस्टर से लगभग 12 से 15 क्विंटल लीची का उत्पादन प्राप्त हुआ था, लेकिन इस वर्ष मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण उत्पादन लगभग 4 से 5 क्विंटल ही हुआ है। उनका कहना है कि पौधों की बढ़ती आयु के साथ-साथ उत्पादन में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होगी और आने वाले वर्षों में यह क्लस्टर कहीं अधिक बेहतर परिणाम देगा।
उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार एचपी शिवा परियोजना के अंतर्गत लंझता में प्रथम चरण में एफएलडी तथा दूसरे चरण में पीआरएफ क्लस्टर विकसित किया गया है। इसमें उच्च घनत्व (हाई डेंसिटी) पद्धति से पौधरोपण किया गया है, ताकि सीमित भूमि पर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। विभाग किसानों को नियमित तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण तथा आवश्यक परामर्श उपलब्ध करा रहा है, जिससे वैज्ञानिक बागवानी को बढ़ावा मिल रहा है। क्लस्टर में पौधों एवं फलों को जंगली जानवरों तथा बेसहारा पशुओं से बचाने के लिए बाड़बंदी भी की गई है। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में लीची का यह क्लस्टर जुड़े परिवारों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बनेगा।

उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है कि एचपी शिवा परियोजना ने यह सिद्ध किया है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, आधुनिक तकनीक और किसानों की मेहनत एक साथ जुड़ जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा और नई गति दी जा सकती है। जिला के लंझता गांव के हरे-भरे लीची के बाग आज इसी सकारात्मक परिवर्तन के साक्षी बने हैं। जिला प्रशासन का भी यह प्रयास रहता है कि संबंधित विभागों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का समयबद्ध एवं बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो ताकि योजनाओं का समयबद्ध लाभ पात्रों तक पहुंच सके तथा उनके जीवन में सकारात्मक एवं आर्थिक बदलाव लाया जा सके।  
-000- DOP 07/07/2026






No comments:

Post a Comment