शिवा परियोजना ने बदली 45 किसानों की तकदीर, इस वर्ष 70 मीट्रिक टन अनार उत्पादन का लक्ष्य
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ (श्रीमद् भगवद्गीता)
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Monday, 14 September 2026
जिला बिलासपुर के बरठीं स्थित टिहरी क्लस्टर में लहलहा रही है अनार की फसल
Sunday, 6 September 2026
जिला बिलासपुर में जापानी फल देगा बागवानों की आर्थिकी को मजबूती
घुमारवीं उपमंडल की ग्राम पंचायत लंझता में जापानी फल का कलस्टर रोपित
प्रदेश बागवानी विभाग द्वारा एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से लंझता क्लस्टर में फूयू प्रजाति के जापानी फल के पौधों को 4 गुणा 4 क्षेत्रफल की दृष्टि से सफलतापूर्वक रोपित किया जा चुका है तथा प्रत्येक पौधे की जियो टैगिंग की गई है। जिससे जहां भविष्य में प्रत्येक पौधे की उपज से लेकर मार्केट तक की पहुंच की निगरानी की जा सकेगी तो वहीं बागवानों को भी बेहतर दाम प्राप्त करने में मदद मिलेगी। जिला बिलासपुर में जहां जापानी फल का यह दूसरा जबकि घुमारवीं उपमंडल का पहला क्लस्टर है।
लीची के बागों से महकने लगी बिलासपुर के लंझता गांव की धरती
13.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 54 किसानों ने रोपित किये हैं दस हजार से अधिक लीची के पौधे
एचपी शिवा परियोजना ने किसानों को दी समृद्धि की नई राह, अब फल देने लगे हैं वर्षों की मेहनत के पौधेजिला बिलासपुर के घुमारवीं उपमंडल की ग्राम पंचायत लंझता आज अपनी पहचान बदल रही है। यहां खेतों में अब केवल मौसमी फसलें ही नहीं, बल्कि लीची के हरे-भरे बाग भी भविष्य की समृद्धि का संदेश दे रहे हैं। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी एचपी शिवा परियोजना ने इस बदलाव की मजबूत नींव रखी है। कुछ वर्ष पहले तक जिन किसानों के लिए व्यावसायिक फलोत्पादन केवल एक कल्पना मात्र था, आज वही किसान अपने बागों में लगने वाले फलों को देखकर न केवल उत्साहित हैं बल्कि भविष्य में आर्थिक समृद्धि के लिए भी आशान्वित हैं।
गांव में इस परिवर्तन की शुरुआत वर्ष 2019-20 में हुई, जब ग्राम पंचायत लंझता को एचपी शिवा परियोजना के अंतर्गत फ्रंट लाइन डेमोस्ट्रेशन (एफएलडी) के लिए चयनित किया गया। प्रारंभिक चरण में 500 लीची के पौधों का रोपण किया गया। किसानों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और परियोजना के सफल क्रियान्वयन ने इस पहल को गति दी। परिणामस्वरूप वर्ष 2020-21 तथा 2021-22 में 9,505 अतिरिक्त पौधों का रोपण किया गया। आज यह प्रयास एक संगठित लीची क्लस्टर का रूप ले चुका है, जहां लगभग 13.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 54 किसान आधुनिक लीची फलोत्पादन से जुड़े हैं।
किसी भी बागवानी परियोजना की सफलता केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होती है, बल्कि पौधों के संरक्षण, सिंचाई और वैज्ञानिक देखभाल के लिए मजबूत आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता भी रहती है। इसी परियोजना के अंतर्गत पौधों की सिंचाई के लिए एक लाख लीटर क्षमता का विशाल जल भंडारण टैंक तथा 20-20 हजार लीटर क्षमता के सात अन्य टैंक निर्मित किए गए हैं। साथ ही बागवानी विभाग के अधिकारी समय-समय पर किसानों का तकनीकी एवं वैज्ञानिक तौर पर मार्गदर्शन भी प्रदान कर रहे हैं। इन तमाम प्रयासों एवं सुविधाओं ने जहां किसानों को सिंचाई संबंधी चिंताओं से काफी हद तक राहत प्रदान की है तो वहीं पौधों की नियमित देखभाल एवं निगरानी से पौधों का बेहतर विकास भी सुनिश्चित हुआ है।
इस संबंध में जब लाभार्थी किसान प्रकाश चंद से बातचीत की तो उनके चेहरे की मुस्कान ने इस परियोजना की सफलता की सबसे बड़ी गवाही दी। उन्होंने अपनी जमीन में लगभग 850 लीची के पौधे लगाए हैं। वे कहते हैं कि जब पौधे लगाए गए थे, तब भरोसा नहीं था कि कुछ वर्षों बाद यही पौधे उनकी आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनेंगे। लेकिन आज उन्हीं पौधों पर फल आना शुरू हो गया है। वे कहते हैं, यह केवल लीची का फल नहीं, बल्कि हमारी वर्षों की मेहनत और उम्मीदों का परिणाम है। आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ेगा तो निश्चित रूप से हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।
इसी तरह एक अन्य लाभार्थी किसान लता देवी ने भी अपनी भूमि में 834 लीची के पौधे लगाए हैं तथा पिछले वर्ष से पौधों पर अच्छी गुणवत्ता के फल आने लग गए हैं। वह विश्वास के साथ कहती हैं कि जैसे-जैसे पौधे अधिक परिपक्व होंगे, उन्हें अच्छी फसल प्राप्त होने पर आय में भी वृद्धि होगी। लता देवी कहती हैं कि लीची जैसे व्यावसायिक फलोत्पादन ने उन जैसी अनेक ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई संभावनाएं के द्वार खोले हैं।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है कि एचपी शिवा परियोजना ने यह सिद्ध किया है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, आधुनिक तकनीक और किसानों की मेहनत एक साथ जुड़ जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा और नई गति दी जा सकती है। जिला के लंझता गांव के हरे-भरे लीची के बाग आज इसी सकारात्मक परिवर्तन के साक्षी बने हैं। जिला प्रशासन का भी यह प्रयास रहता है कि संबंधित विभागों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का समयबद्ध एवं बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो ताकि योजनाओं का समयबद्ध लाभ पात्रों तक पहुंच सके तथा उनके जीवन में सकारात्मक एवं आर्थिक बदलाव लाया जा सके।
Sunday, 31 August 2025
जिला बिलासपुर के बरठीं के टिहरी क्लस्टर में लहलहा रही है अनार की फसल
शिवा परियोजना ने बदली 44 किसानों की तकदीर, 60 मीट्रिक टन अनार उत्पादन का लक्ष्य
प्रदेश सरकार एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से चालू वितवर्ष में व्यय कर रही है 100 करोड़
हिमाचल प्रदेश में बागवानी न केवल किसानों व बागवानों के लिए आजीविका का स्त्रोत है बल्कि यह ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक स्थिरता का भी प्रमुख स्तंभ है। प्रदेश में ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार ने बागवानी को बढ़ावा देते हुए वितीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से 100 करोड़ रूपये व्यय करने का प्रावधान किया है। सरकार इस महत्वपूर्ण कदम से न केवल प्रदेश के निचले क्षेत्रों में शिवा परियोजना के माध्यम से बागवानी को बल मिल रहा है बल्कि प्रदेश सरकार के यह प्रयास धरातल में फलीभूत भी हो रहे हैं।
हिमाचल सरकार के निरंतर प्रयासों का ही नतीजा है कि आजकल जिला बिलासपुर के बरठीं के अंतर्गत टिहरी कलस्टर में अनार की फसल लहलहा रही है। एचपी शिवा परियोजना के तहत लगभग 100 बीघा में स्थापित इस बगीचे में अनार की फसल पक कर तैयार हो चुकी है तथा लाभार्थी किसान अब इसे बाजार भेजने की तैयारी में जुट गए हैं। वर्ष 2021 में फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन (एफएलडी) के तौर पर टीहरी-एक व टीहरी-दो में लगभग 2 हैक्टेयर क्षेत्र में अनार के पौधों का रोपण किया गया, जिसे वर्ष 2022 में बढ़ाकर 8 हैक्टेयर (लगभग 100 बीघा) भूमि में 44 किसानों को जोड़ते हुए कलस्टर के तौर पर विकसित किया गया है। इस कलस्टर में भगवा प्रजाति के लगभग 8900 अनार के पौधे रोपित किये हैं तथा इस वर्ष 60 मिट्रिक टन अनार उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। कलस्टर में जुडे़ किसानों की विभिन्न गतिविधियों को संचालित करने के लिए दि बरठीं कन्वर्जिंग हॉर्टिकल्चर प्रोडक्शन मार्केटिंग एसोसिएशन (सीएचपीएमए) सहकारी समिति लिमिटेड का भी गठन किया गया है।
Monday, 4 July 2022
ढेलू हार के परस राम व अन्य के लिये शिवा प्रोजेक्ट बना बागवानी का आधार
एक हेक्टेयर क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन स्थल के तौर पर स्थापित किया है अमरूद का बगीचा
जोगिन्दर नगर उपमंडल की ग्राम पंचायत ढेलू के अंतर्गत ढेलू हार निवासी परसराम ने एचपी शिवा प्रोजेक्ट के माध्यम से अमरूद का बागीचा तैयार कर रहे हैं। लगभग एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में परसराम के साथ उनके अन्य पारिवारिक सदस्यों शुभम ठाकुर, सबनम और श्यामलाल ने मिलकर अपनी जमीन में बागवानी विभाग के माध्यम से अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन स्थल (एफएलडी) तैयार कर रहे हैं।
जब इस बारे लाभान्वित किसान परसराम से बातचीत की तो उन्होने बताया कि उनके तथा परिवार के दूसरे हिस्सेदारों के पास लगभग एक हेक्टेयर यानि कि 12 बीघा जमीन बेकार में पड़ी थी। इस जमीन में जहां झाडियां व अन्य जंगली पेड़ पौधे उग आए थे तो वहीं देखरेख के अभाव में यह अप्रयुक्त थी। लेकिन जब उन्हे बागवानी विभाग के माध्यम से सरकार द्वारा चलाई जा रही एचपी शिवा प्रोजेक्ट की जानकारी मिली तो उन्होने स्वयं के साथ-साथ परिवार के दूसरे सदस्यों को भी प्रोत्साहित किया तथा मिलकर इस एक हेक्टेयर भूमि में फलदार पौधे रोपित करने का फैसला कर लिया। उन्होने बताया कि बागावानी विभाग के माध्यम से एक वर्ष पहले अमरूद के लगभग साढे 16 सौ पौधे नि:शुल्क रोपित किये हैं। इन पौधों को जंगली जानवरों व अन्य बेसहारा पशुओं से बचाने के लिये पूरी जमीन की सोलरयुक्त बाड़बंदी भी विभाग के माध्यम से नि:शुल्क हुई है। वर्तमान में पौधों को पानी की सुविधा वे अपने बोरवैल से उपलब्ध करवा रहे हैं लेकिन जल्द ही जलशक्ति विभाग के माध्यम से सिंचाई की सुविधा भी उपलब्ध होने वाली है। उन्होने बताया कि अमरूद के पौधों की देखरेख, कांट छांट इत्यादि बारे समय-समय पर विभाग के माध्यम से उन्हे मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। इसके अलावा वे पौधों को गोबर की प्राकृतिक खाद भी दे रहे हैं।उन्होने उपमंडल के ज्यादा से ज्यादा किसानों व बागवानों से शिवा प्रोजेक्ट का लाभ उठाने का आहवान किया है ताकि जहां उनकी बेकार व बंजर पड़ी जमीन को बागवानी के साथ जोड़ा जा सके तो वहीं घर बैठे आमदनी का भी एक बेहतर जरिया प्राप्त होगा। साथ ही कहा कि बेरोजगार युवाओं के लिये घर बैठे बागवानी एक अच्छा स्वरोजगार का माध्यम भी बन सकती है।
क्या कहते हैं अधिकारी:
एचपी शिवा प्रोजेक्ट के माध्यम से चौंतड़ा ब्लॉक में तैनात फैसिलिटेटर निशांत ठाकुर का कहना है कि ढेलू हार में परस राम व अन्य पारिवारिक सदस्यों की एक हेक्टेयर जमीन में शिवा प्रोजेक्ट के माध्यम से अमरूद का अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन स्थल (एफएलडी) तैयार किया जा रहा है। एक वर्ष पहले यहां पर अमरूद के 1666 पौधे रोपित किये गए हैं। आने वाले समय में यहां पर लगभग 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अमरूद का एक कलस्टर तैयार किया जायेगा जिसके लिये स्थानीय किसान तैयार हो चुके हैं। उन्होने बताया कि वर्तमान में चौंतड़ा ब्लॉक में कुल पांच अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन स्थल (एफएलडी) तैयार किये जा रहे जिसमें ढेलू हार के अतिरिक्त गोलवां में अमरूद, जलाड में संतरा, कोठी-एक में अमरूद व कोठी-दो संतरा का बगीचा शामिल हैं। उन्होने बताया कि गोलवां में भी लगभग 20 हेक्टेयर क्षेत्र में अमरूद का कलस्टर तैयार किया जाएगा जिसके लिये प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
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