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Monday, 14 September 2026

जिला बिलासपुर के बरठीं स्थित टिहरी क्लस्टर में लहलहा रही है अनार की फसल

 शिवा परियोजना ने बदली 45 किसानों की तकदीर, इस वर्ष 70 मीट्रिक टन अनार उत्पादन का लक्ष्य

9 हेक्टेयर में रोपित किए हैं 8555 भगवा किस्म के पौधे, गत वर्ष हुआ था 32 मीट्रिक टन उत्पादन

प्रदेश सरकार शिवा परियोजना के माध्यम से चालू वित्त वर्ष में व्यय कर रही है 325 करोड़ रुपये

बिलासपुर, 06 सितम्बर: हिमाचल प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी एचपी शिवा परियोजना का परिणाम है कि आजकल जिला बिलासपुर के झंडूता ब्लॉक के बरठीं स्थित टिहरी क्लस्टर में अनार की फसल लहलहा रही है। इस परियोजना के तहत लगभग 100 बीघा में स्थापित बगीचे में अनार की फसल पक कर तैयार हो रही है। लाभार्थी किसान इसे बाजार भेजने की तैयारी में जुटे हुए हैं तथा अब तक लगभग 5 मीट्रिक टन अनार बाजार में अच्छे दामों पर बेचा जा चुका है।

वर्ष 2021 में फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन (एफएलडी) के तौर पर टिहरी-एक व टिहरी-दो में लगभग 2 हेक्टेयर क्षेत्र में अनार के पौधों का रोपण किया गया, जिसे वर्ष 2022 में बढ़ाकर 9 हेक्टेयर (लगभग 100 बीघा) भूमि में 45 किसानों को जोड़ते हुए क्लस्टर के तौर पर विकसित किया गया है। क्लस्टर में भगवा प्रजाति के 8555 अनार के पौधे रोपित किए हैं तथा इस वर्ष लगभग 70 मीट्रिक टन अनार उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। गत वर्ष लगभग 32 मीट्रिक टन अनार का उत्पादन हुआ था, जिससे लाभार्थी किसानों को लगभग 16 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई है।

जब इस संबंध में लाभार्थी किसान प्रेम लाल नड्डा से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में बतौर एफएलडी बागवानी विभाग के माध्यम से अनार के पौधे रोपित किए गए हैं तथा वर्ष 2022 में लगभग 100 बीघा क्षेत्र में 45 किसानों को जोड़ते हुए क्लस्टर के तौर पर विकसित किया गया है। गत वर्ष भारी बरसात के कारण बागवानों को हुए नुकसान के बावजूद लगभग 32 लाख रुपये का अनार किसानों ने रिलायंस, स्थानीय मंडी तथा सीधे लोगों को बेचा है तथा लाभार्थी किसानों को लगभग 15-16 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई है।

प्रेम लाल नड्डा ने कहा कि शिवा परियोजना के अंतर्गत स्थापित अनार क्लस्टर में बागवानी एवं जल शक्ति विभाग के माध्यम से विभिन्न विकास कार्य किए गए हैं, जिनमें भूमि का विकास, बेड व पिट तैयार करना, सोलर बाड़बंदी, ड्रिप सिंचाई सुविधा तथा उठाऊ सिंचाई परियोजना के माध्यम से जल उपलब्धता शामिल है।

इसी बीच लाभार्थी किसान राजेन्द्र पाल का कहना है कि इस क्लस्टर में उनके लगभग 2 हजार अनार के पौधे लगे हैं। पिछले वर्ष अच्छी फसल प्राप्त हुई है तथा इस वर्ष भी फसल बेहतर है। शिवा परियोजना के अंतर्गत सरकार की ओर से बागवानी विभाग द्वारा हरसंभव मदद प्रदान की जा रही है। पानी की व्यवस्था पर सरकार ने लगभग 3 से 4 करोड़ रुपये व्यय कर ड्रिप इरिगेशन की सुविधा मुहैया करवाई है, जिसके माध्यम से अब पौधों को खाद, स्प्रे इत्यादि दिया जा रहा है।

उनका कहना है कि नौजवान पीढ़ी रोजगार के लिए घरों से दूर जा रही है, ऐसे में यदि वे बागवानी के साथ जुड़ते हैं तो न केवल जमीन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा बल्कि घर बैठे अच्छा रोजगार भी प्राप्त कर सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश में बागवानी न केवल किसानों व बागवानों के लिए आजीविका का अहम स्रोत है बल्कि यह ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक स्थिरता का भी प्रमुख स्तंभ है। प्रदेश में ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार ने बागवानी को बढ़ावा देते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान प्रदेश में एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से 325 करोड़ रुपये व्यय करने का प्रावधान किया है। सरकार के इस महत्वपूर्ण कदम से प्रदेश के सात जिलों के 52 विकास खंडों में न केवल शिवा परियोजना के माध्यम से बागवानी को बल मिल रहा है बल्कि प्रदेश सरकार के ये प्रयास धरातल पर फलीभूत भी हो रहे हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी:

उपनिदेशक बागवानी डॉ. जगदीश चंद वर्मा ने बताया कि एचपी शिवा परियोजना के प्रथम चरण के माध्यम से जिला बिलासपुर में 357 हेक्टेयर क्षेत्र में स्वीट ऑरेंज, अमरूद, लीची तथा जापानी फल के क्लस्टर या तो स्थापित कर लिए गए हैं या फिर कार्य अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया कि टिहरी क्लस्टर जिला का एकमात्र अनार क्लस्टर है और गत वर्ष लगभग 32 मीट्रिक टन अनार को बाजार में बेचा गया है, जबकि इस वर्ष भी फसल अच्छी है तथा लगभग 70 मीट्रिक टन अनार उत्पादन की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि विभाग बागवानों को बाजार के संभावित खरीदारों से जोड़ने में समन्वयक की भूमिका भी निभा रहा है ताकि उत्पादकों को अनार के अच्छे दाम प्राप्त हो सकें।

उन्होंने बताया कि शिवा परियोजना चरण दो में जिला में ब्लूबेरी, एवोकाडो, मैकाडामिया नट, ड्रैगन फ्रूट के क्लस्टर भी विकसित किए जाएंगे, जिन्हें पहले की शर्त 10 हेक्टेयर के बजाय अब 3 हेक्टेयर में स्थापित किया जा सकेगा। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा किसानों से लाभ उठाने का आह्वान किया है।

उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने कहा कि सरकार ने किसानों व बागवानों के उत्थान को अनेक योजनाएं आरंभ की हैं ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था अधिक सशक्त हो सके। शिवा परियोजना के माध्यम से जिला के किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं और संबंधित विभागों के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से सरकार की विभिन्न योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया है।
-000- DOP 07/09/2026

Sunday, 6 September 2026

जिला बिलासपुर में जापानी फल देगा बागवानों की आर्थिकी को मजबूती

  घुमारवीं उपमंडल की ग्राम पंचायत लंझता में जापानी फल का कलस्टर रोपित

3.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 37 किसानों की जमीन पर रोपित किये हैं 2019 पौधे

जिला बिलासपुर के उपमंडल घुमारवीं की ग्राम पंचायत लंझता में एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से जापानी फल का कलस्टर तैयार किया जा रहा है। लगभग 3.5 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापित इस क्लस्टर में कुल 37 किसानों की जमीन पर 2019 पौधों को इस वर्ष फरवरी माह में रोपित किया गया है। इस क्लस्टर के पूरी तरह क्रियाशील हो जाने पर जहां किसानों एवं बागवानों की आर्थिकी सुधार में एक अहम कदम साबित होगा तो वहीं जिला बिलासपुर जापानी फल तैयार कर प्रदेश के बागवानी क्षेत्र में एक अलग पहचान स्थापित होगी।

प्रदेश बागवानी विभाग द्वारा एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से लंझता क्लस्टर में फूयू प्रजाति के जापानी फल के पौधों को 4 गुणा 4 क्षेत्रफल की दृष्टि से सफलतापूर्वक रोपित किया जा चुका है तथा प्रत्येक पौधे की जियो टैगिंग की गई है। जिससे जहां भविष्य में प्रत्येक पौधे की उपज से लेकर मार्केट तक की पहुंच की निगरानी की जा सकेगी तो वहीं बागवानों को भी बेहतर दाम प्राप्त करने में मदद मिलेगी। जिला बिलासपुर में जहां जापानी फल का यह दूसरा जबकि घुमारवीं उपमंडल का पहला क्लस्टर है।
इस बीच किसान बहुफसली खेती (मल्टी क्रॉप) के तहत लहसुन, प्याज, मिर्च, गेहूं इत्यादि की फसलें भी तैयार कर रहे हैं जिससे उन्हें न केवल अतिरिक्त आमदन होगी बल्कि क्लस्टर में स्थापित जापानी फल के पौधों का बेहतर पोषण भी हो सकेगा।
क्या कहते हैं किसान:
इस संबंध में लाभान्वित किसान अंजलि ठाकुर का कहना है कि बागवानी विभाग के अंतर्गत एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से उन्हें जापानी फल का बागीचा तैयार करने का अवसर मिला है। पहले यह जमीन बेकार पड़ी थी, लेकिन अब जापानी फल के पौधे रोपित हो जाने से जहां भविष्य में बेहतर आमदनी होने की उम्मीद है तो वहीं सिंचाई के लिए पानी की सुविधा प्राप्त हो जाने से इस समस्या का भी समाधान हुआ है। उन्होंने अपनी जमीन में 235 जापानी फल के पौधे रोपित किये हैं।
इसी तरह लाभान्वित किसान राजकुमारी का कहना है कि पहले जमीन में आवारा पशुओं एवं जंगली जानवरों के आंतक के कारण न केवल फसलों को भारी नुक्सान होता था बल्कि जमीन को बंजर छोड़ दिया था। लेकिन अब एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से जापानी फल के पौधे रोपित होने तथा बाड़बंदी के कारण अब उन्हें पारंपरिक फसलों का भी लाभ मिलने लगा है तथा भविष्य में जापानी फल उनकी आर्थिकी को मजबूती प्रदान करेगा।
इसी तरह लाभान्वित किसान पवन कुमार का कहना है कि पौधों की देखरेख, दवाई इत्यादि की तकनीकी जानकारी बागवानी विभाग के अधिकारियों के माध्यम से उन्हें नियमित प्राप्त हो रही है। उनका कहना है कि आगामी 5-6 वर्षों के उपरांत इस बागीचे से सेब की तरह जापानी फल से भी अच्छी आमदनी प्राप्त होगी, जिससे आर्थिक स्थिति बेहतर होने की उम्मीद जताई।
सभी लाभान्वित किसानों ने एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से जापानी फल का बागीचा रोपित करने तथा पौधों की सुरक्षा के लिए बाड़बंदी के साथ-साथ सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार का आभार जताया।
क्या कहते हैं अधिकारी:
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि घुमारवीं उपमंडल के लंझता में एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से पहली बार जापानी फल का बगीचा रोपित किया है। इस बगीचे से अगले तीन वर्षों के उपरांत बेहतर उत्पादन होने की उम्मीद है जिससे इस क्षेत्र के लगभग तीन दर्जन किसान लाभान्वित होंगे।
उनका कहना है कि तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए लाभान्वित किसानों की एक समिति कम्युनिटी हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग एजेंसी गठित की गई है। इस समिति के माध्यम से विपणन की सभी संभावनाओं पर कार्य करते हुए किसानों को उत्पाद के अच्छे दाम प्राप्त हों कार्य किया जाएगा।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है जिला बिलासपुर में जापानी फल का कलस्टर आने वाले समय में ग्रामीणों की आर्थिकी को मजबूती प्रदान करने में अहम साबित होगा। उन्होंने किसानों एवं बागवानों से सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों का लाभ उठाने का आह्वान किया है ताकि उनकी आर्थिकी को अतिरिक्त बल प्रदान किया जा सके।
प्रदेश के 7 जिलों के 52 विकास खंडों में लागू हो रही है एचपी शिवा परियोजना
6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 400 कलस्टर किये जा रहे हैं विकसित, 15 हजार किसान परिवार होंगे लाभान्वित
हिमाचल प्रदेश में एचपी शिवा परियोजना लगभग 1 हजार 292 करोड़ रूपये की लागत से प्रदेश के बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, सोलन, सिरमौर और ऊना जिलों के 52 विकास खंडों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है।
इस परियोजना के माध्यम से लगभग 6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 400 कलस्टर विकसित किये जा रहे हैं, जिससे लगभग 15 हजार किसान परिवार सीधे लाभान्वित होंगे और किसानों को सब ट्रापिकल फलों जैसे मीठा संतरा, अमरूद, अनार, लीची, आम, पलम, जापानी फल इत्यादि की आधुनिक, व्यावसायिक तथा मार्केट आधारित खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश भर में अबतक लगभग एक हजार 140 हेक्टेयर क्षेत्र में फलदार पौधों का रोपण सफलतापूर्वक किया गया है।
इस परियोजना के माध्यम से अब तक लगभग 330 करोड़ रूपये व्यय किये जा चुके हैं तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 325 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।
-000-  DOP 13/07/2026








लीची के बागों से महकने लगी बिलासपुर के लंझता गांव की धरती

  13.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 54 किसानों ने रोपित किये हैं दस हजार से अधिक लीची के पौधे

एचपी शिवा परियोजना ने किसानों को दी समृद्धि की नई राह, अब फल देने लगे हैं वर्षों की मेहनत के पौधे

जिला बिलासपुर के घुमारवीं उपमंडल की ग्राम पंचायत लंझता आज अपनी पहचान बदल रही है। यहां खेतों में अब केवल मौसमी फसलें ही नहीं, बल्कि लीची के हरे-भरे बाग भी भविष्य की समृद्धि का संदेश दे रहे हैं। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी एचपी शिवा परियोजना ने इस बदलाव की मजबूत नींव रखी है। कुछ वर्ष पहले तक जिन किसानों के लिए व्यावसायिक फलोत्पादन केवल एक कल्पना मात्र था, आज वही किसान अपने बागों में लगने वाले फलों को देखकर न केवल उत्साहित हैं बल्कि भविष्य में आर्थिक समृद्धि के लिए भी आशान्वित हैं।

गांव में इस परिवर्तन की शुरुआत वर्ष 2019-20 में हुई, जब ग्राम पंचायत लंझता को एचपी शिवा परियोजना के अंतर्गत फ्रंट लाइन डेमोस्ट्रेशन (एफएलडी) के लिए चयनित किया गया। प्रारंभिक चरण में 500 लीची के पौधों का रोपण किया गया। किसानों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और परियोजना के सफल क्रियान्वयन ने इस पहल को गति दी। परिणामस्वरूप वर्ष 2020-21 तथा 2021-22 में 9,505 अतिरिक्त पौधों का रोपण किया गया। आज यह प्रयास एक संगठित लीची क्लस्टर का रूप ले चुका है, जहां लगभग 13.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 54 किसान आधुनिक लीची फलोत्पादन से जुड़े हैं।
किसी भी बागवानी परियोजना की सफलता केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होती है, बल्कि पौधों के संरक्षण, सिंचाई और वैज्ञानिक देखभाल के लिए मजबूत आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता भी रहती है। इसी परियोजना के अंतर्गत पौधों की सिंचाई के लिए एक लाख लीटर क्षमता का विशाल जल भंडारण टैंक तथा 20-20 हजार लीटर क्षमता के सात अन्य टैंक निर्मित किए गए हैं। साथ ही बागवानी विभाग के अधिकारी समय-समय पर किसानों का तकनीकी एवं वैज्ञानिक तौर पर मार्गदर्शन भी प्रदान कर रहे हैं। इन तमाम प्रयासों एवं सुविधाओं ने जहां किसानों को सिंचाई संबंधी चिंताओं से काफी हद तक राहत प्रदान की है तो वहीं पौधों की नियमित देखभाल एवं निगरानी से पौधों का बेहतर विकास भी सुनिश्चित हुआ है।

इस संबंध में जब लाभार्थी किसान प्रकाश चंद से बातचीत की तो उनके चेहरे की मुस्कान ने इस परियोजना की सफलता की सबसे बड़ी गवाही दी। उन्होंने अपनी जमीन में लगभग 850 लीची के पौधे लगाए हैं। वे कहते हैं कि जब पौधे लगाए गए थे, तब भरोसा नहीं था कि कुछ वर्षों बाद यही पौधे उनकी आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनेंगे। लेकिन आज उन्हीं पौधों पर फल आना शुरू हो गया है। वे कहते हैं, यह केवल लीची का फल नहीं, बल्कि हमारी वर्षों की मेहनत और उम्मीदों का परिणाम है। आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ेगा तो निश्चित रूप से हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।
इसी तरह एक अन्य लाभार्थी किसान लता देवी ने भी अपनी भूमि में 834 लीची के पौधे लगाए हैं तथा पिछले वर्ष से पौधों पर अच्छी गुणवत्ता के फल आने लग गए हैं। वह विश्वास के साथ कहती हैं कि जैसे-जैसे पौधे अधिक परिपक्व होंगे, उन्हें अच्छी फसल प्राप्त होने पर आय में भी वृद्धि होगी। लता देवी कहती हैं कि लीची जैसे व्यावसायिक फलोत्पादन ने उन जैसी अनेक ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई संभावनाएं के द्वार खोले हैं।

किसानों का कहना है कि गत वर्ष इस क्लस्टर से लगभग 12 से 15 क्विंटल लीची का उत्पादन प्राप्त हुआ था, लेकिन इस वर्ष मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण उत्पादन लगभग 4 से 5 क्विंटल ही हुआ है। उनका कहना है कि पौधों की बढ़ती आयु के साथ-साथ उत्पादन में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होगी और आने वाले वर्षों में यह क्लस्टर कहीं अधिक बेहतर परिणाम देगा।
उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार एचपी शिवा परियोजना के अंतर्गत लंझता में प्रथम चरण में एफएलडी तथा दूसरे चरण में पीआरएफ क्लस्टर विकसित किया गया है। इसमें उच्च घनत्व (हाई डेंसिटी) पद्धति से पौधरोपण किया गया है, ताकि सीमित भूमि पर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। विभाग किसानों को नियमित तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण तथा आवश्यक परामर्श उपलब्ध करा रहा है, जिससे वैज्ञानिक बागवानी को बढ़ावा मिल रहा है। क्लस्टर में पौधों एवं फलों को जंगली जानवरों तथा बेसहारा पशुओं से बचाने के लिए बाड़बंदी भी की गई है। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में लीची का यह क्लस्टर जुड़े परिवारों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बनेगा।

उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है कि एचपी शिवा परियोजना ने यह सिद्ध किया है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, आधुनिक तकनीक और किसानों की मेहनत एक साथ जुड़ जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा और नई गति दी जा सकती है। जिला के लंझता गांव के हरे-भरे लीची के बाग आज इसी सकारात्मक परिवर्तन के साक्षी बने हैं। जिला प्रशासन का भी यह प्रयास रहता है कि संबंधित विभागों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का समयबद्ध एवं बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो ताकि योजनाओं का समयबद्ध लाभ पात्रों तक पहुंच सके तथा उनके जीवन में सकारात्मक एवं आर्थिक बदलाव लाया जा सके।  
-000- DOP 07/07/2026






Sunday, 31 August 2025

जिला बिलासपुर के बरठीं के टिहरी क्लस्टर में लहलहा रही है अनार की फसल

शिवा परियोजना ने बदली 44 किसानों की तकदीर, 60 मीट्रिक टन अनार उत्पादन का लक्ष्य 

प्रदेश सरकार एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से चालू वितवर्ष में व्यय कर रही है 100 करोड़

हिमाचल प्रदेश में बागवानी न केवल किसानों व बागवानों के लिए आजीविका का स्त्रोत है बल्कि यह ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक स्थिरता का भी प्रमुख स्तंभ है। प्रदेश में ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार ने बागवानी को बढ़ावा देते हुए वितीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से 100 करोड़ रूपये व्यय करने का प्रावधान किया है। सरकार इस महत्वपूर्ण कदम से न केवल प्रदेश के निचले क्षेत्रों में शिवा परियोजना के माध्यम से बागवानी को बल मिल रहा है बल्कि प्रदेश सरकार के यह प्रयास धरातल में फलीभूत भी हो रहे हैं।

हिमाचल सरकार के निरंतर प्रयासों का ही नतीजा है कि आजकल जिला बिलासपुर के बरठीं के अंतर्गत टिहरी कलस्टर में अनार की फसल लहलहा रही है। एचपी शिवा परियोजना के तहत लगभग 100 बीघा में स्थापित इस बगीचे में अनार की फसल पक कर तैयार हो चुकी है तथा लाभार्थी किसान अब इसे बाजार भेजने की तैयारी में जुट गए हैं। वर्ष 2021 में फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन (एफएलडी) के तौर पर टीहरी-एक व टीहरी-दो में लगभग 2 हैक्टेयर क्षेत्र में अनार के पौधों का रोपण किया गया, जिसे वर्ष 2022 में बढ़ाकर 8 हैक्टेयर (लगभग 100 बीघा) भूमि में 44 किसानों को जोड़ते हुए कलस्टर के तौर पर विकसित किया गया है। इस कलस्टर में भगवा प्रजाति के लगभग 8900 अनार के पौधे रोपित किये हैं तथा इस वर्ष 60 मिट्रिक टन अनार उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। कलस्टर में जुडे़ किसानों की विभिन्न गतिविधियों को संचालित करने के लिए दि बरठीं कन्वर्जिंग हॉर्टिकल्चर प्रोडक्शन मार्केटिंग एसोसिएशन (सीएचपीएमए) सहकारी समिति लिमिटेड का भी गठन किया गया है।

जब इस संबंध में लाभार्थी किसान एवं कलस्टर के अंतर्गत गठित दि बरठीं सीएचपीएमए सहकारी समिति लिमिटेड के प्रधान प्रेम लाल नड्डा से बातचीत की तो बताया कि वर्ष 2021 में बतौर एफएलडी-एक व दो में बागवानी विभाग के माध्यम से अनार के पौधे रोपित किये गए। वर्ष 2022 में अन्य किसानों को जोड़ते हुए लगभग 100 बीघा क्षेत्र में इसे कलस्टर के तौर पर विकसित किया गया है। वर्तमान में लगभग 44 किसान जुड़ चुके हैं, और कुछ किसानों ने गत वर्ष अनार बेचकर लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये तक की आमदनी अर्जित कर ली है। इस वर्ष कुछ किसान लगभग 3 से 4 लाख रुपये तक की आमदनी अर्जित कर सकते हैं।
प्रेम लाल नड्डा ने बताया कि शिवा परियोजना के अंतर्गत स्थापित इस अनार क्लस्टर में बागवानी एवं जलशक्ति विभाग के माध्यम से विभिन्न विकास कार्य किए गए हैं, जिनमें भूमि का विकास, बेड व पिट तैयार करना, सोलर बाड़बंदी, ड्रिप सिंचाई सुविधा तथा उठाऊ सिंचाई परियोजना के माध्यम से जल उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अतिरिक्त जलशक्ति विभाग द्वारा सिंचाई सुविधा हेतु लगभग 2 लाख लीटर क्षमता वाला पानी का टैंक भी निर्मित किया गया है।
इसी बीच लाभार्थी किसान सोम देव शर्मा का कहना है कि गत वर्ष लगभग 1 से डेढ लाख रूपये अनार से आमदनी हुई है। इस वर्ष फसल ज्यादा अच्छी है, लगभग 3 से 4 लाख रूपये आमदनी की उम्मीद है। क्लस्टर में उनके लगभग 125 अनार के पौधे हैं जिनसे औसतन प्रति पौधा 25 से 30 किलोग्राम अनार उत्पादन की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अनार की फसल के साथ-साथ गेंदे का फूल भी लगाया, जिससे भी लगभग 25 हजार रूपये की अतिरिक्त आमदनी हुई है।
लाभार्थी किसानों का कहना है कि भगवा प्रजाति का यह अनार लगभग बिना बीज का होता है, जिसे बच्चे व बुजुर्ग भी आसानी से खा सकते हैं। इसके छिलके पतले होते हैं और इसमें रस की मात्रा अधिक होती है। यह अनार स्वाद में भी अत्यंत उत्तम है। किसानों को उम्मीद है कि इस बार उन्हें अच्छे दाम मिलेंगे और आमदनी में और वृद्धि होगी। बागवानी विभाग ने किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने के लिए फैसिलिटेटर, क्लस्टर इंचार्ज तथा फील्ड ऑपरेटर भी तैनात किए हुए हैं।
उन्होंने युवाओं से भी बागवानी के साथ जुड़ने का आहवान किया है ताकि घर के समीप ही न केवल रोजगार के अवसर सृजित किये जा सकते हैं बल्कि वह स्वावलंबी बनकर दूसरों के लिए रोजगार सृजन का कार्य भी कर सकते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारीः
उपनिदेशक बागवानी डॉ. जगदीश चंद वर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश शिवा परियोजना के माध्यम से जिला बिलासपुर में कुल 37 क्लस्टर स्थापित किए हैं। इन क्लस्टरों के अंतर्गत नींबू प्रजाति, अमरूद और अनार की खेती को बढ़ावा दिया गया है तथा लगभग 134 हेक्टेयर भूमि को कवर किया गया है। उन्होंने कहा कि टिहरी क्लस्टर जिला का एकमात्र अनार का क्लस्टर है, और इस वर्ष लगभग 60 मीट्रिक टन अनार उत्पादन का लक्ष्य है। बागवानी विभाग किसानों को मार्केटिंग की सुविधा भी उपलब्ध करवा रहा है ताकि फसल के बेहतर दाम मिल सकें।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने कहा कि सरकार ने किसानों व बागवानों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं आरंभ की हैं ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अधिक सशक्त हो सके। शिवा परियोजना के माध्यम से जिला के किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं और संबंधित विभागों के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान भी किया। DOP 01/09/2025
















Monday, 4 July 2022

ढेलू हार के परस राम व अन्य के लिये शिवा प्रोजेक्ट बना बागवानी का आधार

एक हेक्टेयर क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन स्थल के तौर पर स्थापित किया है अमरूद का बगीचा

जोगिन्दर नगर उपमंडल की ग्राम पंचायत ढेलू के अंतर्गत ढेलू हार निवासी परसराम ने एचपी शिवा प्रोजेक्ट के माध्यम से अमरूद का बागीचा तैयार कर रहे हैं। लगभग एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में परसराम के साथ उनके अन्य पारिवारिक सदस्यों शुभम ठाकुर, सबनम और श्यामलाल ने मिलकर अपनी जमीन में बागवानी विभाग के माध्यम से अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन स्थल (एफएलडी) तैयार कर रहे हैं। 

जब इस बारे लाभान्वित किसान परसराम से बातचीत की तो उन्होने बताया कि उनके तथा परिवार के दूसरे हिस्सेदारों के पास लगभग एक हेक्टेयर यानि कि 12 बीघा जमीन बेकार में पड़ी थी। इस जमीन में जहां झाडियां व अन्य जंगली पेड़ पौधे उग आए थे तो वहीं देखरेख के अभाव में यह अप्रयुक्त थी। लेकिन जब उन्हे बागवानी विभाग के माध्यम से सरकार द्वारा चलाई जा रही एचपी शिवा प्रोजेक्ट की जानकारी मिली तो उन्होने स्वयं के साथ-साथ परिवार के दूसरे सदस्यों को भी प्रोत्साहित किया तथा मिलकर इस एक हेक्टेयर भूमि में फलदार पौधे रोपित करने का फैसला कर लिया। 

उन्होने बताया कि बागावानी विभाग के माध्यम से एक वर्ष पहले अमरूद के लगभग साढे 16 सौ पौधे नि:शुल्क रोपित किये हैं। इन पौधों को जंगली जानवरों व अन्य बेसहारा पशुओं से बचाने के लिये पूरी जमीन की सोलरयुक्त बाड़बंदी भी विभाग के माध्यम से नि:शुल्क हुई है। वर्तमान में पौधों को पानी की सुविधा वे अपने बोरवैल से उपलब्ध करवा रहे हैं लेकिन जल्द ही जलशक्ति विभाग के माध्यम से सिंचाई की सुविधा भी उपलब्ध होने वाली है। उन्होने बताया कि अमरूद के पौधों की देखरेख, कांट छांट इत्यादि बारे समय-समय पर विभाग के माध्यम से उन्हे मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। इसके अलावा वे पौधों को गोबर की प्राकृतिक खाद भी दे रहे हैं। 

उन्होने उपमंडल के ज्यादा से ज्यादा किसानों व बागवानों से शिवा प्रोजेक्ट का लाभ उठाने का आहवान किया है ताकि जहां उनकी बेकार व बंजर पड़ी जमीन को बागवानी के साथ जोड़ा जा सके तो वहीं घर बैठे आमदनी का भी एक बेहतर जरिया प्राप्त होगा। साथ ही कहा कि बेरोजगार युवाओं के लिये घर बैठे बागवानी एक अच्छा स्वरोजगार का माध्यम भी बन सकती है। 

क्या कहते हैं अधिकारी:

एचपी शिवा प्रोजेक्ट के माध्यम से चौंतड़ा ब्लॉक में तैनात फैसिलिटेटर निशांत ठाकुर का कहना है कि ढेलू हार में परस राम व अन्य पारिवारिक सदस्यों की एक हेक्टेयर जमीन में शिवा प्रोजेक्ट के माध्यम से अमरूद का अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन स्थल (एफएलडी) तैयार किया जा रहा है। एक वर्ष पहले यहां पर अमरूद के 1666 पौधे रोपित किये गए हैं। आने वाले समय में यहां पर लगभग 10 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अमरूद का एक कलस्टर तैयार किया जायेगा जिसके लिये स्थानीय किसान तैयार हो चुके हैं। उन्होने बताया कि वर्तमान में चौंतड़ा ब्लॉक में कुल पांच अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन स्थल (एफएलडी) तैयार किये जा रहे जिसमें ढेलू हार के अतिरिक्त गोलवां में अमरूद, जलाड में संतरा, कोठी-एक में अमरूद व कोठी-दो संतरा का बगीचा शामिल हैं। उन्होने बताया कि गोलवां में भी लगभग 20 हेक्टेयर क्षेत्र में अमरूद का कलस्टर तैयार किया जाएगा जिसके लिये प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 

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