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Sunday, 26 July 2026

बिलासपुर के ओयल निवासी शुभम के लिए सहारा बनी मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना

 योजना के माध्यम से शुरू किया हेयर सैलून का काम, लिख रहे हैं स्वावलंबन की कहानी

जिला बिलासपुर के गांव ओयल निवासी शुभम के लिए प्रदेश सरकार की मुख्य मंत्री सुख आश्रय योजना सहारा बनकर खड़ी हुई है। इस योजना के सहयोग से शुभम न केवल अपने पांव पर खड़े हुए हैं बल्कि कभी बेसहारों सा जीवन जीने को मजबूर शुभम अब जीवन का एक नया अध्याय भी लिख रहे हैं।
बिलासपुर सदर तहसील के गांव ओयल में वर्ष 2001 में जब शुभम का जन्म हुआ तो कुछ समय बाद ही मां-बाप को खो दिया। ऐसे में शुभम के सिर पर न तो मां की ममता रही, न ही पिता का मजबूत हाथ। शुभम के जीवन की डोर अब दादा-दादी के सहारे तक की सिमट गई। तमाम विकट परिस्थितियों के बावजूद दादा-दादी ने शुभम को न केवल पाल-पोसकर बड़ा करने लगे बल्कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए भी हिम्मत दी।
लेकिन इस बीच किस्मत ने एक और इम्तिहान लिया तथा दादा का भी देहांत हो गया। घर में आमदनी का कोई साधन नहीं बचा। हालात ऐसे विकट हो गए कि दो वक्त की रोटी जुटाना भी एक पहाड़ जैसी चुनौती बन गया। शुभम कहते हैं कि सपने आँखों में थे, लेकिन जेब खाली थी। बावजूद शुभम ने हिम्मत नहीं हारी तथा जीवन की कठिनाईयों से जूझते हुए 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई को पूरा किया। इसके बाद रोजी रोटी के जुगाड़ के लिए हेयर ड्रेसर का काम सीखना शुरू किया। लेकिन यहां भी मेहनत तो थी लेकिन शुरुआत करना आसान नहीं था। ऐसे में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना शुभम के जीवन में उम्मीद की रोशनी बनकर सामने आई।
इस योजना के माध्यम से उन्हें प्रतिमाह 4 हजार रुपये की राहत राशि मिलने लगी। प्रदेश सरकार की ओर से मिलने वाली यह केवल आर्थिक सहायता नहीं है बल्कि उन जैसे हजारों अनाथ बच्चों को हौंसला देती है कि प्रदेश सरकार विकट परिस्थितियों में उनके साथ खड़ी है। इसी योजना के माध्यम से स्वरोजगार शुरू करने के लिए सरकार ने उन्हें 2 लाख रूपये की आर्थिक मदद की जिसकी बदौलत वह हेयर डैसर का अपना कारोबार स्थापित कर पाए। आज शुभम बिलासपुर शहर में शुभ आर्टिस्टिक नामक सैलून को बेहतर तरीके से चला रहे हैं।  
बड़े भावुक मन से शुभम कहते हैं कि वह न केवल खुद कमा रहे हैं बल्कि सम्मान के साथ जीवन की डोर को आगे बढ़ा रहे हैं। कहते हैं कि अगर मुख्यमंत्री सुख-आश्रय जैसी योजना न होती, तो शायद मैं भी जिंदगी की भीड़ में खो जाता तथा दो वक्त की रोटी के लिए कहीं संघर्षरत होता। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सुख आश्रय योजना के माध्यम से न केवल उन जैसे हजारों बच्चों और युवाओं को आर्थिक संबल प्रदान किया है बल्कि जीवन जीने एवं आगे बढ़ने का हौंसला भी दिया है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना प्रदेश के हजारों बेसहारा व अनाथ बच्चों और युवाओं के जीवन को न केवल संवार रही है बल्कि जीवन का एक मुकाम भी उपलब्ध करवा रही है।
क्या कहते हैं अधिकारी:
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग बिलासपुर नरेंद्र कुमार का कहना है कि जिला बिलासपुर में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान मुख्य मंत्री सुख आश्रय योजना के तहत कुल 154 पात्रों को लाभान्वित कर विभिन्न घटकों के अंतर्गत लगभग 1.69 करोड़ रूपये की राशि व्यय की है। जिनमें 154 पात्र बच्चों को सामाजिक सुरक्षा पर लगभग 83 लाख रूपये, 15 लाभार्थियों को विवाह अनुदान के तहत 30 लाख, गृह निर्माण के लिए 16 पात्रों को 29 लाख रूपये तथा 12 बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए लगभग साढ़े सात लाख रूपये की राशि शामिल है।
इसके अतिरिक्त व्यावसायिक शिक्षा के 5 मामलों पर लगभग 88 हजार, स्र्टाटअप शुरू करने के लिए 6 मामलों में 7.40 लाख रूपये की राशि भी व्यय की गई है। जिला के 22 बच्चों को एक्सपोजर विजिट भी करवाया गया है तथा अन्य सुविधाओं पर भी धनराशि व्यय की है।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसके माध्यम से जहां पात्र बच्चों को लाभान्वित किया जा रहा है तो वहीं विभिन्न घटकों के माध्यम से बच्चों को आर्थिक मदद भी प्रदान की जा रही है। जिला प्रशासन का पूरा प्रयास है कि सरकार की योजनाओं को पूरी गंभीरता के साथ धरातल पर लागू किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा पात्रों को समयबद्ध लाभान्वित किया जा सके।
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Saturday, 11 July 2026

प्रदेश में दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

 पशुपालकों के चेहरों पर आ रही है मुस्कान, दूध के अब मिल रहे हैं बेहतर दाम

जिला बिलासपुर में 7490 किसानों के माध्यम से प्रतिदिन 30,446 लीटर दूध का हो रहा उत्पादन 

प्रदेश सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादकों के हित में उठाया गया न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारण का कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध का 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया है। इस निर्णय से न केवल किसानों और पशुपालकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, बल्कि उनकी आय में स्थिरता और वृद्धि भी सुनिश्चित हो रही है।

प्रदेश सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां पशुपालन आजीविका का एक प्रमुख साधन है। न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होने से अब पशुपालकों को बाजार के मोल-भाव से राहत मिली है और उन्हें अपने उत्पाद का सुनिश्चित मूल्य प्राप्त हो रहा है। इससे पशुपालन व्यवसाय के प्रति लोगों का रुझान भी बढ़ा है।

जिला बिलासपुर के पशुपालकों की बात करें तो यहां के किसान भी सरकार के इस निर्णय से लाभान्वित हो रहे हैं। जब इस संबंध में दुग्ध उत्पादक किसान किशन लाल निवासी चंगर से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि उन्होंने दो भैंसें पाल रखी है तथा प्रतिदिन 4 से 5 लीटर दूध का विक्रय करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका दूध घर से ही अच्छे दामों में बिक जाता है। दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के लिए प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया है जिससे अब उन्हें दूध के अच्छे दाम मिल पा रहे हैं तथा उनकी आर्थिकी को भी मजबूती मिली है।

इसी तरह बिलासपुर के लखनपुर निवासी पानो देवी का भी कहना है कि वह पशुपालन का कार्य करती हैं। उन्होंने गाय व भैंस पाल रखी है तथा प्रतिदिन तैयार दूध का क्रय वह घर से ही कर रही हैं जिसके उन्हें अच्छे दाम मिल रहे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 61 रूपये तथा भैंस का 71 रूपये निर्धारित करने के लिए आभार जताया। यही नहीं जिला के जुखाला क्षेत्र के गांव धमथल की ही दुग्ध उत्पादक किसान रीना देवी भी गाय व भैंस के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के लिए प्रदेश सरकार का आभार जताती हैं, जिसके कारण अब उन्हें दूध के अच्छे दाम प्राप्त हो रहे हैं। 

जिले के अन्य पशुपालकों का भी कहना है कि दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण उनके लिए आर्थिक संबल का कार्य कर रहा है। समय-समय पर इसमें की जा रही वृद्धि से उनकी आय में निरंतर बढ़ौतरी हो रही है। प्रदेश सरकार की यह पहल न केवल पशुपालकों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि इससे दुग्ध उत्पादन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। 

क्या कहते हैं अधिकारी: 

उप-निदेशक पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन डाॅ. किशोरी लाल शर्मा ने बताया कि जिला बिलासपुर में 7490 किसानों के माध्यम से प्रतिदिन 30,446 लीटर दूध का उत्पादन किया जा रहा है जिसमें कामधेनू हितकारी मंच नम्होल तथा कहलूर मिल्क उत्पादक काॅपरेटिव सोसाइटी नम्होल भी शामिल हैं। 

उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा विभाग के माध्यम से फ्राइट सब्सिड़ी योजना के अंतर्गत दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 3 रूपये फ्राइट सब्सिड़ी तथा तीन रूपये प्रति लीटर दूध पर इंसेंटिव दिया जा रहा है। 

उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है कि प्रदेश सरकार की विभिन्न विभागों के माध्यम से चलाई जा रही विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं को पूरी गंभीरता के साथ धरातल पर क्रियान्वित किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा पात्रों को समयबद्ध लाभान्वित किया जा सके। 

-000- DOP 21/04/2026










Tuesday, 7 July 2026

प्राकृतिक खेती से बदली धमथल जुखाला के किसान रवि दत्त की जिंदगी

 रासायनिक खेती छोड़ अपनाया प्राकृतिक कृषि मॉडल, कम लागत में कर रहे हैं बेहतर उत्पादन

हिमाचल प्रदेश के जिला बिलासपुर के जुखाला क्षेत्र के गांव धमतल निवासी 47 वर्षीय किसान रवि दत्त आज प्राकृतिक खेती के माध्यम से न केवल अपनी आय में वृद्धि कर रहे हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बने हैं। रासायनिक खेती में बढ़ती लागत और मिट्टी की उर्वरता में गिरावट को देखते हुए रविदत्त ने वर्ष 2018 में प्राकृतिक खेती को अपनाने का निर्णय लिया। आज उनके खेतों में उगाई जा रही फसलें जहां पर्यावरण के अनुकूल हैं तो वहीं तैयार उत्पाद स्वास्थ्य की दृष्टि से भी सुरक्षित एवं लाभकारी हैं।

रवि दत्त बताते हैं कि पहले वे भी अन्य किसानों की तरह रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग करते थे, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही थी और मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही थी। इसी दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी प्राप्त की और वर्ष 2018 में इस पद्धति को अपनाने की शुरुआत की। 

उन्होंने बताया कि वह वर्तमान में प्राकृतिक खेती के माध्यम से मक्की, गेहूं, कोदरा, दालें, मटर, टमाटर सहित अन्य सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती से जुड़ने के लिए वर्ष 2018 में ही देसी नस्सल की गिर गाय भी पाली है। वर्तमान में उनके पास गिर नस्सल की दो बड़ी गायें तथा एक बच्छड़ी है। वह कहते हैं कि देशी गाय के गोबर और गौमूत्र से तैयार जीवामृत, घनजीवामृत तथा अन्य प्राकृतिक घोलों का उपयोग करते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसलें स्वस्थ रहती हैं।

रवि दत्त का कहना है कि उन्होंने गत वर्ष प्राकृतिक तौर पर तैयार लगभग 4 क्विंटल मक्की को जिला आत्मा प्रोजेक्ट के माध्यम से विक्रय किया है। उन्हें 40 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से 1600 रूपये की आय प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त वह गेंहू सहित अन्य पारंपरिक फसलों तथा सब्जियों का भी नियमित तौर पर उत्पादन कर रहे हैं जिनका उन्हें अच्छे दाम प्राप्त हो रहे हैं। 

रवि दत्त का कहना है कि प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक तौर पर तैयार होने वाली फसलों गेंहू, मक्की, हल्दी इत्यादि के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित कर एक बेहतरीन कदम उठाया है जिससे प्रदेश के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। 

क्या कहते हैं अधिकारीः 

उपनिदेशक कृषि कुलभूषण धीमान का कहना है कि जिला बिलासपुर में वर्ष 2018 से प्राकृतिक खेती की शुरूआत की गई है। वर्तमान में लगभग 8 हजार किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं तथा 1094 हैक्टेयर में विभिन्न तरह की फसलों का प्राकृतिक खेती के माध्यम से उत्पादन कर रहे हैं। 

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान जिला में आत्मा प्रोजेक्ट के माध्यम से 85 किसानों से लगभग 116 क्विंटल हल्दी की खरीद की गई है। इसी अवधि के दौरान जिला में 32 किसानों से लगभग 49 क्विंटल मक्की तथा 42 किसानों से लगभग 62 क्विंटल गेंहू की भी खरीद की है। उन्होंने बताया कि यह खरीद प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य जिसमें हल्दी के लिए 90 रूपये, मक्की के लिए 40 रूपये तथा गेंहू के लिए 60 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से यह खरीद की गई है। 

उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है कि सरकार द्वारा विभिन्न विभागों के माध्यम से संचालित की जा रही विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों तथा निर्णयों को समयबद्ध क्रियान्वित करने के प्रयास किये जा रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा पात्र लोगों को समयबद्ध लाभान्वित किया जा सके। 

-000- DOP 02/04/2026