विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से हो रहा कामगार परिवारों का सशक्तिकरण
हिमधारा
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ (श्रीमद् भगवद्गीता)
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Sunday, 6 September 2026
मजदूरों के उत्थान में मददगार बन रहा भवन एवं अन्य निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड
जिला बिलासपुर में जापानी फल देगा बागवानों की आर्थिकी को मजबूती
घुमारवीं उपमंडल की ग्राम पंचायत लंझता में जापानी फल का कलस्टर रोपित
प्रदेश बागवानी विभाग द्वारा एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से लंझता क्लस्टर में फूयू प्रजाति के जापानी फल के पौधों को 4 गुणा 4 क्षेत्रफल की दृष्टि से सफलतापूर्वक रोपित किया जा चुका है तथा प्रत्येक पौधे की जियो टैगिंग की गई है। जिससे जहां भविष्य में प्रत्येक पौधे की उपज से लेकर मार्केट तक की पहुंच की निगरानी की जा सकेगी तो वहीं बागवानों को भी बेहतर दाम प्राप्त करने में मदद मिलेगी। जिला बिलासपुर में जहां जापानी फल का यह दूसरा जबकि घुमारवीं उपमंडल का पहला क्लस्टर है।
लीची के बागों से महकने लगी बिलासपुर के लंझता गांव की धरती
13.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 54 किसानों ने रोपित किये हैं दस हजार से अधिक लीची के पौधे
एचपी शिवा परियोजना ने किसानों को दी समृद्धि की नई राह, अब फल देने लगे हैं वर्षों की मेहनत के पौधेजिला बिलासपुर के घुमारवीं उपमंडल की ग्राम पंचायत लंझता आज अपनी पहचान बदल रही है। यहां खेतों में अब केवल मौसमी फसलें ही नहीं, बल्कि लीची के हरे-भरे बाग भी भविष्य की समृद्धि का संदेश दे रहे हैं। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी एचपी शिवा परियोजना ने इस बदलाव की मजबूत नींव रखी है। कुछ वर्ष पहले तक जिन किसानों के लिए व्यावसायिक फलोत्पादन केवल एक कल्पना मात्र था, आज वही किसान अपने बागों में लगने वाले फलों को देखकर न केवल उत्साहित हैं बल्कि भविष्य में आर्थिक समृद्धि के लिए भी आशान्वित हैं।
गांव में इस परिवर्तन की शुरुआत वर्ष 2019-20 में हुई, जब ग्राम पंचायत लंझता को एचपी शिवा परियोजना के अंतर्गत फ्रंट लाइन डेमोस्ट्रेशन (एफएलडी) के लिए चयनित किया गया। प्रारंभिक चरण में 500 लीची के पौधों का रोपण किया गया। किसानों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और परियोजना के सफल क्रियान्वयन ने इस पहल को गति दी। परिणामस्वरूप वर्ष 2020-21 तथा 2021-22 में 9,505 अतिरिक्त पौधों का रोपण किया गया। आज यह प्रयास एक संगठित लीची क्लस्टर का रूप ले चुका है, जहां लगभग 13.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 54 किसान आधुनिक लीची फलोत्पादन से जुड़े हैं।
किसी भी बागवानी परियोजना की सफलता केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होती है, बल्कि पौधों के संरक्षण, सिंचाई और वैज्ञानिक देखभाल के लिए मजबूत आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता भी रहती है। इसी परियोजना के अंतर्गत पौधों की सिंचाई के लिए एक लाख लीटर क्षमता का विशाल जल भंडारण टैंक तथा 20-20 हजार लीटर क्षमता के सात अन्य टैंक निर्मित किए गए हैं। साथ ही बागवानी विभाग के अधिकारी समय-समय पर किसानों का तकनीकी एवं वैज्ञानिक तौर पर मार्गदर्शन भी प्रदान कर रहे हैं। इन तमाम प्रयासों एवं सुविधाओं ने जहां किसानों को सिंचाई संबंधी चिंताओं से काफी हद तक राहत प्रदान की है तो वहीं पौधों की नियमित देखभाल एवं निगरानी से पौधों का बेहतर विकास भी सुनिश्चित हुआ है।
इस संबंध में जब लाभार्थी किसान प्रकाश चंद से बातचीत की तो उनके चेहरे की मुस्कान ने इस परियोजना की सफलता की सबसे बड़ी गवाही दी। उन्होंने अपनी जमीन में लगभग 850 लीची के पौधे लगाए हैं। वे कहते हैं कि जब पौधे लगाए गए थे, तब भरोसा नहीं था कि कुछ वर्षों बाद यही पौधे उनकी आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनेंगे। लेकिन आज उन्हीं पौधों पर फल आना शुरू हो गया है। वे कहते हैं, यह केवल लीची का फल नहीं, बल्कि हमारी वर्षों की मेहनत और उम्मीदों का परिणाम है। आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ेगा तो निश्चित रूप से हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।
इसी तरह एक अन्य लाभार्थी किसान लता देवी ने भी अपनी भूमि में 834 लीची के पौधे लगाए हैं तथा पिछले वर्ष से पौधों पर अच्छी गुणवत्ता के फल आने लग गए हैं। वह विश्वास के साथ कहती हैं कि जैसे-जैसे पौधे अधिक परिपक्व होंगे, उन्हें अच्छी फसल प्राप्त होने पर आय में भी वृद्धि होगी। लता देवी कहती हैं कि लीची जैसे व्यावसायिक फलोत्पादन ने उन जैसी अनेक ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई संभावनाएं के द्वार खोले हैं।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है कि एचपी शिवा परियोजना ने यह सिद्ध किया है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, आधुनिक तकनीक और किसानों की मेहनत एक साथ जुड़ जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा और नई गति दी जा सकती है। जिला के लंझता गांव के हरे-भरे लीची के बाग आज इसी सकारात्मक परिवर्तन के साक्षी बने हैं। जिला प्रशासन का भी यह प्रयास रहता है कि संबंधित विभागों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का समयबद्ध एवं बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो ताकि योजनाओं का समयबद्ध लाभ पात्रों तक पहुंच सके तथा उनके जीवन में सकारात्मक एवं आर्थिक बदलाव लाया जा सके।
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प्रदेश में दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
पशुपालकों के चेहरों पर आ रही है मुस्कान, दूध के अब मिल रहे हैं बेहतर दाम
जिला बिलासपुर में 7490 किसानों के माध्यम से प्रतिदिन 30,446 लीटर दूध का हो रहा उत्पादन
प्रदेश सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादकों के हित में उठाया गया न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारण का कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध का 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया है। इस निर्णय से न केवल किसानों और पशुपालकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, बल्कि उनकी आय में स्थिरता और वृद्धि भी सुनिश्चित हो रही है।
प्रदेश सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां पशुपालन आजीविका का एक प्रमुख साधन है। न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होने से अब पशुपालकों को बाजार के मोल-भाव से राहत मिली है और उन्हें अपने उत्पाद का सुनिश्चित मूल्य प्राप्त हो रहा है। इससे पशुपालन व्यवसाय के प्रति लोगों का रुझान भी बढ़ा है।
जिला बिलासपुर के पशुपालकों की बात करें तो यहां के किसान भी सरकार के इस निर्णय से लाभान्वित हो रहे हैं। जब इस संबंध में दुग्ध उत्पादक किसान किशन लाल निवासी चंगर से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि उन्होंने दो भैंसें पाल रखी है तथा प्रतिदिन 4 से 5 लीटर दूध का विक्रय करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका दूध घर से ही अच्छे दामों में बिक जाता है। दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के लिए प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया है जिससे अब उन्हें दूध के अच्छे दाम मिल पा रहे हैं तथा उनकी आर्थिकी को भी मजबूती मिली है।
इसी तरह बिलासपुर के लखनपुर निवासी पानो देवी का भी कहना है कि वह पशुपालन का कार्य करती हैं। उन्होंने गाय व भैंस पाल रखी है तथा प्रतिदिन तैयार दूध का क्रय वह घर से ही कर रही हैं जिसके उन्हें अच्छे दाम मिल रहे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 61 रूपये तथा भैंस का 71 रूपये निर्धारित करने के लिए आभार जताया। यही नहीं जिला के जुखाला क्षेत्र के गांव धमथल की ही दुग्ध उत्पादक किसान रीना देवी भी गाय व भैंस के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के लिए प्रदेश सरकार का आभार जताती हैं, जिसके कारण अब उन्हें दूध के अच्छे दाम प्राप्त हो रहे हैं।जिले के अन्य पशुपालकों का भी कहना है कि दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण उनके लिए आर्थिक संबल का कार्य कर रहा है। समय-समय पर इसमें की जा रही वृद्धि से उनकी आय में निरंतर बढ़ौतरी हो रही है। प्रदेश सरकार की यह पहल न केवल पशुपालकों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि इससे दुग्ध उत्पादन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी:
उप-निदेशक पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन डाॅ. किशोरी लाल शर्मा ने बताया कि जिला बिलासपुर में 7490 किसानों के माध्यम से प्रतिदिन 30,446 लीटर दूध का उत्पादन किया जा रहा है जिसमें कामधेनू हितकारी मंच नम्होल तथा कहलूर मिल्क उत्पादक काॅपरेटिव सोसाइटी नम्होल भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा विभाग के माध्यम से फ्राइट सब्सिड़ी योजना के अंतर्गत दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 3 रूपये फ्राइट सब्सिड़ी तथा तीन रूपये प्रति लीटर दूध पर इंसेंटिव दिया जा रहा है।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है कि प्रदेश सरकार की विभिन्न विभागों के माध्यम से चलाई जा रही विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं को पूरी गंभीरता के साथ धरातल पर क्रियान्वित किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा पात्रों को समयबद्ध लाभान्वित किया जा सके।
-000- DOP 21/04/2026























































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