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Tuesday, 3 July 2018

गृहिणी सुविधा योजना के तहत ऊना जिला में लाभान्वित होंगे 2487 परिवार

गृहिणी सुविधा योजना के अंतर्गत जिला ऊना में प्रथम चरण में 2487 पात्रों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। गृहिणी सुविधा योजना हिमाचल प्रदेश सरकार की एक महत्त्वाकांक्षी योजना है, जिसका शुभारंभ 26 मई, 2018 को प्रदेश के मुख्य मत्री जय राम ठाकुर ने शिमला से किया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जहां महिलाओं का सशक्तिकरण करना है तो वहीं प्रदेश के पात्र उपभोक्ताओं को स्वच्छ व धुंआ रहित ईंधन उपलब्ध करवाकर पर्यावरण का संरक्षण भी करना है।
किन्हे मिलेगा योजना का लाभ:
गृहिणी सुविधा योजना के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश के ऐसे महिला परिवार वाले स्थायी निवासी जिनके पास एल.पी.जी. कनैक्शन नहीं है, को एक घरेलू एल.पी.जी. कनैक्शन हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध करवाया जा रहा है। इस योजना में महिलाओं वाले ऐसे हिमाचली परिवार (किसी भी श्रेणी से संबंधित) जिनके पास अपना या किसी भी सरकारी योजना जैसे उज्ज्वला इत्यादि के तहत घरेलू गैस कनैक्शन नही हैं, को लाभान्वित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, आग्रि, भूकंप इत्यादि से प्रभावित परिवारों को भी इस योजना के अन्तर्गत लाभान्वित किया जाएगा। प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों को संबंधित कार्यकारी दंडाधिकारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा।
किन्हे नहीं मिलेगा लाभ:
 इस योजना के अन्तर्गत ऐसे परिवारों को लाभान्वित नहीं किया जाएगा जिनके पास पहले से ही एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध है तथा ऐसे परिवार जिनका कोई भी सदस्य सरकारी/अद्र्ध सरकारी, स्वायत्त संस्था, बोर्ड, कॉर्पोरेशन में कार्यरत इत्यादि में नियमित या अनुबंध के आधार पर कार्यरत न हो। इसके अलावा ऐसे परिवार जिनका कोई भी सदस्य ठेकेदार के नाते सरकार के साथा पंजीकृत है को भी लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही ऐसे परिवार जिनका कोई भी सदस्य राज्य/केन्द्र सरकार, बोर्ड, कॉर्पोरेशन, बैंक, स्वायत्त संस्था से पारिवारिक पेंशन तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन लेता हो।
कैसे मिलेगा लाभ:
इस योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों का चयन संबंधित ग्राम पंचायत जबकि शहरी क्षेत्रों में संबंधित शहरी निकाय संस्थाओं द्वारा निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। प्राप्त आवेदन पत्रों को किसी प्रकार आपत्ति के लिए संबंधित पंचायत या शहरी निकाय के नोटिस बोर्ड में 10 दिन के लिए प्रदर्शित किया जाएगा तथा किसी प्रकार का आपत्ति होने पर जिला नियंत्रक खाद्य, नागरिक आपूर्ति को 15 दिन के भीतर मामला प्रस्तुत करना होगा। इसके उपरान्त चयनित पात्र लोगों की सूची को तेल कंपनियों को भेजा जाएगा तथा निदेशक खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले गैस कनेक्शन के लिए धनराशि जारी करेंगे। गैस एजैंसी तथा संबंधित विभाग द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रम में पात्रों को एलपीजी गैस कनेक्शन वितरित किए जाएंगे।
क्या कहते हैं अधिकारी:
जिला नियन्त्रक खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले ऊना राजीव शर्मा ने बताया कि इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र लोग अपनी ग्राम पंचायत या शहरी निकाय के कार्यालयों से संपर्क कर निर्धारित प्रपत्र प्राप्त कर सकते हैं। उन्होने बताया कि सरकार ने इस योजना के प्रथम चरण में ऊना जिला में 2487 पात्रों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा है तथा वर्तमान में संबंधित पंचायतों एवं स्थानीय नगर निकायों से प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग 5958 लोगों ने अपने आवेदन पत्र प्रस्तुत कर दिए हैं। उन्होने कहा कि पात्रों के चयन प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए लगभग 2 माह का समय लगेगा। उन्होने बताया कि इस योजना बारे लोगों को जागरूक करने के लिए पंचायत स्तर पर विभागीय अधिकारियों द्वारा जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं।







Monday, 28 May 2018

बकरी पालन से जुडक़र बीपीएल परिवार मजबूत करें आर्थिकी


बकरी पालन हेतु सरकार दे रही 60 प्रतिशत तक अनुदान, तीन वर्ष का बीमा मुफ्त 

सरकार द्वारा बीपीएल परिवारों की आर्थिकी में उत्थान लाने के उदेश्य से कृषक बकरी पालन योजना को प्रारंभ किया गया है। इस योजना के माध्यम से बीपीएल परिवार को बकरी पालने के लिए सरकार 60 प्रतिशत तक का अनुदान उपलब्ध करवा रही है। 
इस स्कीम के तहत सरकार पशुपालन विभाग के माध्यम से गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों को कृषक बकरी पालन योजना के तहत दो बकरियां (मादा) तथा एक बकरा (नर), चार बकरियां (मादा) तथा एक बकरा (नर) या दस बकरियां (मादा) तथा एक बकरा (नर) की इकाईयों में उपलब्ध करवाया जा रहा है। इस योजना के तहत बीपीएल परिवार के लाभार्थी को लागत का चालीस प्रतिशत भाग बतौर लाभार्थी शेयर के रूप में जमा करवाना होता जबकि 60 प्रतिशत सरकार द्वारा वहन किया जाता है। बीपीएल कृषक बकरी पालन योजना के अंतर्गत सामान्य वर्ग के 66 प्रतिशत अनुसूचित जाति के 25 प्रतिशत तथा अनुसूचित जनजाति के 9 प्रतिशत परिवारों के हिसाब से इकाईयां वितरित की जा रही हैं।
इस योजना के माध्यम से दो जमा एक इकाई की कुल लागत 21 हजार 88 रूपये है जिनमें से सरकार की ओर से अनुदान 60 प्रतिशत 13 हजार 888 रूपये तथा लाभार्थी का 40 प्रतिशत की दर से शेयर 72 सौ रूपये बनता है। इसी तरह जहां चार जमा एक इकाई की कुल लागत 34 हजार 356 रूपये है जिनमें से सरकार की ओर से अुनदान 23 हजार 156 रूपये बतौर 60 प्रतिशत तथा लाभार्थी का शेयर 11 हजार 200 रूपये जो 40 प्रतिशत है जबकि दस जमा एक इकाई की कुल लागत 72 हजार 160 रूपये है जिनमें से सरकार की ओर से अनुदान 48 हजार 960 रूपये बतौर 60 प्रतिशत तथा लाभार्थी का शेयर 23 हजार 200 रूपये बतौर 40 प्रतिशत दिया जाता है।
इस योजना के माध्यम से अबतक पूरे प्रदेश भर में 1153 विभिन्न इकाईयां बकरियों की आवंटित की गई हैं। जिनमें दस जमा एक इकाई की 194, चार जमा एक इकाई की 430 तथा दो जमा एक इकाई की 529 इकाईयां शामिल हैं। जिलावार आंकडों का विश्लेषण करें तो जिला बिलासपुर को 164 इकाईयां आवंटित की गई है जिनमें दस जमा एक इकाई की 22, चार जमा एक की 50 तथा दो जमा एक इकाई की 92 इकाईयां शामिल है। चंबा जिला को कुल 56 इकाईयां आवंटित की गई हैं जिनमें दस जमा एक इकाई की दस, चार जमा एक की 24 इकाई तथा दो जमा एक की 22 इकाईयां शामिल हैं। हमीरपुर जिला को कुल 196 इकाईयां आवंटित की गई है जिनमें दस जमा एक इकाई की 27, चार जमा एक की 145 तथा दो जमा एक इकाई की 24 शामिल हैं। कांगडा जिला को कुल 129 इकाईयां आवंटित की हैं जिनमें दस जमा एक की 37, चार जमा एक की 45 तथा दो जमा एक इकाई की 37 इकाईयां शामिल हैं। किन्नौर जिला को 37 ईकाईयां बकरियों की आवंटित की गई हैं जिनमें दस जमा एक ईकाई की आठ, चार जमा एक इकाई की 10 तथा दो जमा एक इकाई की 19 युनिट शामिल हैं। 
इसी तरह जहां कुल्लू जिला को कुल 70 इकाईयां बकरियों की आवंटित की गई है जिनमें दस जाम एक इकाई की 10, चार जमा एक इकाई की 28 तथा दो जमा एक इकाई की 32 बकरियां शामिल है तो वहीं जिला लाहौल एवं स्पिति को कुल 41 बकरियों की इकाइयों को आवंटित किया गया है जिनमें दस जमा एक इकाई की नौ, चार जमा एक इकाई की 11 तथा दो जमा एक इकाई की 21 इकाईयां शामिल है। यही नहीं मंडी जिला को कुल 75 इकाईयां का आवंटन किया गया है जिनमें दस जमा एक युनिट के आठ, चार जमा एक युनिट के 25 तथा दो जमा एक युनिट के 42 मामले शामिल हैं जबकि जिला शिमला को बकरियों की कुल 143 युनिट का आवंटन किया गया है जिनमें दस जमा एक युनिट के 27, दस जमा चार युनिट के 26 तथा दो जमा एक युनिट के 90 मामले शामिल हैं। 
इसी योजना के तहत जिला सिरमौर के लिए कुल 67 बकरियों की इकाईयां आवंटित की गई हैं जिनमें सात दस जमा एक, 39 चार जमा एक तथा 21 दो जमा एक युनिट जबकि सोलन जिला के लिए 49 इकाइयां आवंटित की गई हैं जिनमें दस जमा एक की पांच, चार जमा एक की 12 तथा दो जमा एक की 32 युनिट शामिल है। इसी तरह जिला ऊना के लिए कुल 126 बकरियों की इकाईयां आवंटित की गई हैं जिनमें दस जमा एक की 24, चार जमा एक की 15 तथा दो जमा एक की 87 इकाईयां शामिल है। 
इस योजना के माध्यम से सरकार दो जमा एक इकाई पर 13888 रूपये, चार जमा एक इकाई पर 23156 तथा दस जमा एक इकाई पर 48960 रूपये बतौर उपदान मुहैया करवा रही है। इसके अलावा बकरियों का तीन वर्ष का बीमा भी सरकार की ओर किया जाता है ताकि किसानों को किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना न करना पड़े। साथ ही बकरियों की इकाईयां वितरण करते वक्त सरकार की ओर से संबंधित किसान को तीन माह का चारा (फीड) भी दी जा रही है।
क्या कहते हैं मंत्री:
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर का कहना है कि प्रदेश में बीपीएल परिवारों की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए सरकार ने बीपीएल बकरी पालन योजना शुरू की है। इस योजना के माध्यम से सरकार 60 प्रतिशत अनुदान पर बकरियां उपलब्ध करवा रही है। उन्होने बताया कि दस (मादा) जमा एक (नर) की युनिट से एक परिवार वर्ष में कम से कम दो से अढ़ाई लाख रूपये तक की आय अर्जित कर सकता है। किसान पर विपरीत परिस्थितियों में बोझ न पड़े इसके लिए बकरियों का तीन वर्ष का बीमा भी मुफ्त किया जाता है।

Thursday, 10 May 2018

गैर आवासीय विशेष प्रशिक्षण केंद्रों (एनआरएसटीसी) के माध्यम से 15 हजार बच्चे लाभान्वित

जिला ऊना में वर्तमान में 47 एनआरएसटीसी केंद्रों में 1200 बच्चों को 47 अध्यापक दे रहे शिक्षा
सार्वभौमिक प्रारंभिक शिक्षा के लक्ष्य की पूर्ति के लिए सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से सरकार द्वारा अनेक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि 6-14 वर्ष आयु वर्ग का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसी लक्ष्य की पूर्ति के लिए सरकार ने शिक्षा गारंटी योजना (ईजीएस), वैकल्पिक शिक्षा स्कूल (एएलएस), वैकल्पिक अभिनव शिक्षा(एआईई), गैर आवासीय ब्रिज कोर्स (एनआरबीसी) तथा गैर आवासीय विशेष प्रशिक्षण केंद्र(एनआरएसटीसी) जैसे अनेक कार्यक्रम शुरू किए हैं। जिला ऊना में वर्ष 2003 में गैर आवासीय प्रशिक्षण केंद्र (एनआरएसटीसी) केंद्रों की शुरूआत हुई। शुरू में जिला में 150 बच्चों के साथ ऐसे कुल सात केंद्र झुग्गी-झोंपडी वाले क्षेत्रों में स्थापित किए गए तथा जिनकी संख्या अब बढक़र 47 हो गई है। 
वर्तमान में इन 47 एनआरएसटीसी केंद्रों में 12सौ बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिन्हे 47 अध्यापक शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इस योजना के माध्यम से जिला में अबतक लगभग 15 हजार बच्चों को लाभान्वित किया जा चुका है। इसके अलावा इन केंद्रों के माध्यम से लगभग 60 परिवारों को रोजगार भी मुहैया करवाया गया है।
एनआरएसटीसी केंद्रों में सरकार दे रही ये सुविधा
एनआरएसटीसी केंद्रों में सरकार बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए पढऩे व लिखने का सामान, लाईब्रेरी की किताबें, स्वच्छता किट, पठन-पाठन सामाग्री, मोबाइल टॉयलेटस, कांऊसलिंग शिविर तथा टीचर ट्रेनिंग की सुविधा दे रही है। इसके अलावा इन केंद्रों में पठन-पाठन प्रक्रिया के अतिरिक्त खेलकूद, अन्य प्रतियोगिताएं एवं अन्य विभिन्न तरह की गतिविधियों का भी आयोजन किया जाता है।
कैसे लाया गया बच्चों में परिवर्तन
इस संबंध में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाईट) ऊना के प्रधानाचार्य एवं प्रोजैक्ट डायरेक्टर एसएसए-आरएमएसए कमलदीप सिंह से बातचीत की तो उनका कहना है कि एनआरएसटीसी केंद्रों के माध्यम से सबसे पहले झुगी-झोंपडी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के अभिभावकों को इन केंद्रों में शिक्षा हासिल करने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हे बताया कि गया कि यदि बच्चे शिक्षित एवं विभिन्न कौशलों में प्रशिक्षित होंगे तो वे जीवन में बेहतर रोजगार के साधन जुटा सकते हैं तथा रोजगार प्राप्त करने के अवसर में भी बढ़ौतरी होगी। 
शुरूआती दौर में जहां झुग्गी-झोंपडियों में रहने वाले अप्रवासी एवं मेहनत-मजदूरी करने वाले परिवारों के बच्चे स्वच्छता के प्रति जागरूक भी नहीं थे। जिसके प्रति इन केंद्रों के माध्यम से जहां स्वच्छता को लेकर जागरूकता लाई गई तो वहीं उन्हे स्वच्छता किट भी वितरित किए गए। साथ ही बताया का आरंभिक दौर में अभिभावक बच्चों के पठन-पाठन तथा पढऩे-लिखने के लिए सामाग्री उपलब्ध करवाने के प्रति भी जागरूक नहीं थे। इस बारे भी बच्चों को सरकार के माध्यम से पढऩे-लिखने के लिए पुस्तकें, स्कूल बैग, ड्रैस इत्यादि उपलब्ध करवाकर उन्हे शिक्षा हासिल करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके अलावा बच्चों की समय पर कांऊसलिंग भी की गई  तथा एनआरएसटीसी केंद्रों के बच्चों को एक्सपोजर देने के लिए केंद्र, ब्लॉक व जिला स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके अलावा आसपास के सरकारी व निजी स्कूलों में भी इन बच्चों का भ्रमण करवाया जाता है ताकि इन्हे समाज की मुख्यधारा में जोड कर इनके जीवन में व्यापक बदलाव लाया जा सके। 

क्या कहते हैं उपायुक्त 
इस बारे उपायुक्त ऊना राकेश कुमार प्रजापति का कहना है कि एनआरएसटीसी योजना के माध्यम से जिला ऊना में कार्यरत 47 केंद्रों के तहत वर्तमान में लगभग 12 सौ बच्चों को शिक्षित किया जा रहा है। उन्होने बताया कि बच्चों को शिक्षित करने के लिए 10 डाईट के अध्यापक तथा 37 गैर सरकारी संस्थाओं जिनमें राष्ट्रीय एकता मंच, सनराईज एजुकेशन सोसाइटी तथा शिक्षा सुधार समिति शामिल है के 37 अध्यापक बच्चों को शिक्षित करने के लिए वहां तैनात हैं। उन्होने बताया कि इस योजना के माध्यम से वर्ष 2003 से लेकर 2018 तक लगभग तीन करोड 80 लाख रूपये की राशि व्यय कर लगभग 15 हजार बच्चों को लाभान्वित किया जा चुका है तथा 45 सौ बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा के साथ जोडा गया है।








Tuesday, 24 April 2018

लोअर देहलां के पवन कुमार के लिए मुख्य मंत्री खेत संरक्षण योजना बनी वरदान

एक हैक्टेयर में सोलरयुक्त बाडबंदी कर फसलों को किया सुरक्षित, उपज में हुई बढ़ौतरी
हिमाचल प्रदेश के किसान आए दिन बंदरों व अन्य जंगली जानवरों के कारण फसलों को हो रहे नुकसान के चलते जहां मजबूरीवश खेती को छोडने के लिए विवश हो रहे हैं तो वहीं खेती-बाड़ी लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है। इस समस्या को प्रदेश सरकार ने भी गंभीरता से लिया है तथा किसानों की फसलों को बचाने के लिए मुख्य मंत्री खेत संरक्षण योजना को शुरू किया है। इस योजना के माध्यम से किसानों को अपने खेतों की सोलरयुक्त बाडबंदी के लिए प्रदेश सरकार 80 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध करवा रही है। प्रदेश सरकार ने बजट 2018-19 के लिए तीन या इससे अधिक किसानों द्वारा संयुक्तरूप से बाडबंदी करवाने पर 85 प्रतिशत तक का अनुदान देने का प्रावधान किया है।
जिला ऊना के सांसद आदर्श गांव लोअर देहलां निवासी 62 वर्षीय पवन कुमार ऐरी के लिए मुख्य मंत्री खेत संरक्षण योजना किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई है। बाडबंदी के कारण जहां जंगली जानवरों द्वारा फसलों को होने वाला नुकसान कम हुआ है तो वहीं फसल के उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज हुई है। 
इस बारे जब पवन कुमार ऐरी से बातचीत की तो उनका कहना है कि उन्होने लगभग एक हैक्टेयर कृषि योग्य भूमि में सोलरयुक्त बाडबंदी कर रखी है जिससे न केवल विभिन्न तरह के जंगली जानवरों जैसे नील गाय, सांबर, जंगली सुअर इत्यादि से उनकी फसल सुरक्षित हुई है बल्कि वह अब घर में चैन की नींद सो पाते हैं। उनका कहना है कि उनके द्वारा खेतों में की गई सोलरयुक्त बाडबंदी का असर आसपास के खेतों पर भी पडा है तथा जंगली जानवरों के नुकसान में कमी आई है। उन्होने बताया कि पहले जहां उनके इस एक हैक्टेयर रकबे में लगभग 22 से 25 क्विंटल गेंहू की पैदावार हो पाती थी जो अब बढक़र 35 से 40 क्विटल तक  पहुंच गई है।

पवन कुमार का कहना है कि सोलरयुक्त बाडबंदी से पूर्व जहां जंगली जानवर उनकी फसलों को काफी नुकसान पहुंचाते थे तो वहीं खेतों की रखवाली के लिए उन्हे दिन-रात पहरा देना पड़ता था। लेकिन उन्हे जैसे ही प्रदेश सरकार की मुख्य मंत्री खेत संरक्षण योजना बारे पता चला तो उन्होने कृषि विभाग के अधिकारियों के सहयोग से यह बाडबंदी करवाई। उन्होने बताया कि सोलयुक्त बाड को छूने पर जहां 12 वोल्ट करंट का झटका लगता है तो वहीं इसका रखरखाव भी ज्यादा मुश्किल नहीं है। उनका कहना है कि यदि सरकार बाडबंदी करते वक्त निचले हिस्से को पक्का करने या पोलीशीट लगाने का भी प्रावधान कर दे तो घास व झाडियां इत्यादि उगने से अक्सर बाड़ में करंट अवरूद्ध होने की संभावना बनी रहती है से भी छुटकारा मिलेगा। 
उनका कहना है कि मुख्य मंत्री खेत संरक्षण योजना बंदरों व अन्य जंगली जानवरों से परेशान किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है तथा लोगों से इन योजना का भरपूर लाभ उठाने का आहवान किया है। 
क्या कहते हैं अधिकारी:
उपनिदेशक कृषि विभाग ऊना यशपाल चौधरी का कहना है कि मुख्य मंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत सरकार सोलरयुक्त बाडबंदी के लिए 80 प्रतिशत तक का अनुदान उपलब्ध करवा रही है। उन्होने बताया कि जिला ऊना में इस योजना के तहत वर्ष 2017-18 के दौरान 42 किसानों को लाभान्वित कर 1.14 करोड रूपये की राशि व्यय की गई है तथा 18 हजार 400 मीटर लंबी परिधि की 9 कतारों वाली तारें लगाई गई हैं। उन्होने बताया कि एक बैटरी से लगभग 15 सौ मीटर सोलरयुक्त बाडबंदी की जा सकती है, ऐसे में किसानों से सामूहिक तौर पर इस योजना का लाभ उठाने का आहवान किया है ताकि बाडबंदी की लागत कम हो सके। साथ ही जिला के ज्यादा से ज्यादा किसानों से इस योजना का लाभ उठाने का भी आग्रह किया है ताकि उनकी फसलों को बंदरों, अवारा पशुओं एवं अन्य जंगली जानवरों से सुरक्षित रखा जा सके।







Saturday, 17 March 2018

बजट से कृषि व बागवानी के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

भारत एक कृषि प्रधान राष्ट्र है तथा आज भी जहां देश की 70 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में वास करती है तो वहीं कृषि व बागवानी ग्रामीणों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभाते हैं। हिमाचल प्रदेश में भी लगभग 90 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है तथा कृषि के साथ-साथ बागवानी हमारी अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए गत 9 मार्च को प्रदेश विधानसभा में प्रदेश के नव निवार्चित मुख्य मंत्री जय राम ठाकुर ने भी अपने पहले आम बजट में कृषि व बागवानी के साथ-साथ ग्रामीण विकास से जुडी विभिन्न योजनाओं को विशेष प्राथमिकता प्रदान की है। प्रदेश के एक साधारण व किसान परिवार से संबंध रखने वाले प्रदेश के युवा व यशस्वी मुख्य मंत्री जय राम ठाकुर ने ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए कई अहम योजनाओं के साथ-साथ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 
हिमाचल प्रदेश को जैविक राज्य बनाने तथा जीरो बजट प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए जहां सरकार जैविक फसलों को बढ़ावा देने के लिए कृषकों के साथ-साथ कृषि, बागवानी तथा पशुपालन विभाग के विस्तार अधिकारियों को नई प्रणाली में प्रशिक्षित करने के लिए जागरूकता कार्यक्रमों को प्रारंभ किया जाएगा तो वहीं विश्वविद्यालयों द्वारा इसके लिए पैकेजिज ऑफ प्रैक्टिसिस तैयार किए जाएंगे। खेती में कीटनाशकों के प्रयोग को हतोत्साहित करने के साथ-साथ विभागों को कीटनाशक दवाईयों को दिए जाने वाले बजट को जैविक कीटनाशकों के लिए उपयोग किया जाएगा। प्रदेश में देसी नस्ल की गाय के संरक्षण व संवर्धन के लिए एक नीति के तहत कार्य तथा प्रदेश में जैविक उत्पादों के विपणन तथा प्रमाणीकरण को प्रोत्साहित करने व जैविक कीटनाशक संयत्र स्थापित करने को सरकार 50 प्रतिशत निवेश बतौर उपदान उपलब्ध करवाएगी। इस दिशा में किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान नामक योजना को शुरू किया जाएगा।
कृषि क्षेत्र में विभिन्न विस्तार कार्यों पर बल देते हुए जहां खरीफ व रबी की बिजाई से पहले पूरे राज्य के सभी खंडों तथा उसके उपरान्त उपयुक्त समय पर कृषक मेले आयोजित करने का भी ऐलान किया है। जिनके माध्यम से बैंकों व संबंधित विभागों को एक मंच पर लाकर जहां किसानों को कृषि की तकनीकों बारे जानकारी दी जाएगी तो वहीं ऋण संबंधी जानकारी भी उपलब्ध करवाई जाएगी ताकि किसानों को अनावश्यक परेशानियों से मुक्त किया जा सके। प्रदेश में संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए जहां वाईएस परमार किसान स्वरोजगार योजना के तहत 23 करोड रूपये का प्रावधान किया है तो वहीं क्षतिग्रस्त पॉलीशीटस को बदलने के लिए मिलने वाली अनुदान राशि को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत करने का भी प्रावधान किया है। आज के दौर में मजदूरों की कमी तथा खेती बाडी में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए सरकार ने किसानों को कम कीमत पर कृषक ट्रैक्टर, पॉवर वीडर, पॉवर टिलर इत्यादि उपकरण खरीदने के लिए प्रदेश में कृषि उपकरण सुविधा केंद्र स्थापित करने का प्रावधान किया है। इन केंद्रों के माध्यम से जहां प्रदेश के किसानों के साथ-साथ युवा उद्यमियों को 25 लाख रूपये तक की मशीनरी पर 40 प्रतिशत उपदान का प्रावधान किया है। इससे जहां किसानों को कम दाम पर कृषि उपकरण उपलब्ध हो सकेंगे तो वहीं बेरोजगार युवाओं को उद्यम स्थापित कर स्वरोजगार को भी बल मिलेगा। 
प्रदेश में बागवानी का ग्रामीण व प्रदेश अर्थव्यवस्था में अहम रोल है। ऐसे में ओलावृष्टि के कारण बागवानी को बचाने के लिए 30 वर्ग मीटर क्षेत्र में संरक्षित खेती के लिए सरकार एंटी हेलनेट प्रदान करने का प्रावधान किया है। इसके अलावा बागवानों को एंटी हेलनेट गन लगाने के लिए बागवानी सुरक्षा योजना के तहत 60 प्रतिशत उपदान मुहैया करवाने का भी बजट में प्रावधान किया है। साथ ही बागवानी विकास योजना के माध्यम से बागवानों व सब्जी उत्पादकों को 50 प्रतिशत उपदान पर प्लास्टिक क्रेट भी उपलब्ध करवाए जाएंगे। प्रदेश में किसानों की आय को दुगना करने तथा रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री कृषि संपदा योजना के माध्यम से एकीकृत शीत भंडारण, खाद्यान्न प्रसंस्करण तथा समूह अधोसंरचना के विकास पर जोर दिया जाएगा। जिसके माध्यम से 5 करोड रूपये तक के खाद्यान्न प्रसंस्करण तथा 10 करोड रूपये के शीत भंडारण के लिए मशीनरी व प्लांट पर 50 प्रतिशत उपदान प्रदान करेगी। 
प्रदेश में बंदरों, जंगली जानवरों तथा बेसहारा पशुओं के कारण कृषकों को काफी नुकसान उठाना पडता है जिससे निपटने के लिए सरकार मुख्य मंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत सौरयुक्त बाड बंदी के लिए 80 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध करवा रही है जिसे सामूहिक तौर पर लगाने के लिए अब सरकार किसानों को 85 प्रतिशत तक का अनुदान उपलब्ध करवाएगी। प्रदेश में किसानों की आय को बढ़ाने के लिए जहां प्रदेश में फल व सब्जी उत्पादन के तहत अतिरिक्त खेती को लाया जाएगा तो वहीं वर्तमान में प्रदेश के पांच जिलों में चल रही जाईका परियोजना को बढ़ाकर पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। संरक्षित फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में हिमाचल पुष्प क्रांति नामक योजना को प्रांरभ किया जाएगा।
पशुधन का भी हमारी आर्थिकी में अहम योगदान है। ऐसे में अच्छी नस्ल की देसी गाय पालने पर जहां किसानों को सरकार सहायता राशि प्रदान करेगी तो वहीं कृषक बकरी पालन योजना के माध्यम से 11 बकरियों की एक ईकाई की स्थापना पर सरकार 60 प्रतिशत तक का उपदान उपलब्ध करवाएगी। इसके अलावा मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए मुख्य मंत्री मधु विकास योजना के अंतर्गत 80 प्रतिशत तक उपदान मुहैया करवाया जाएगा।
इस तरह कह सकते हैं कि जयराम सरकार का पहला बजट जहां कृषि व बागवानी पर आधारित है तो वहीं ग्रामीण विकास को भी बढ़ावा देने के लिए सरकार अनेक योजनाएं लेकर आई है। इस बजट के माध्यम से किसानों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी तथा ग्रामीण स्तर पर कृषि, बागवानी, पशुपालन, मौनपालन को बढावा मिलने के साथ-साथ स्वरोजगार गतिविधियों को भी बल मिलेगा।


 (साभार: दैनिक न्याय सेतु एवं दैनिक आपका फैसला 15 मार्च, 2018 को संपादकीय पृष्ठ में प्रकाशित)

Tuesday, 27 February 2018

ऊना के कुटलैहड क्षेत्र में मौजूद हैं पर्यटन की अपार संभावनाएं

हिमाचल प्रदेश जहां अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है तो वहीं यहां के चप्पे-चप्पे में विराजमान देवी-देवताओं के कारण इसे देवभूमि के नाम से भी पुकारा जाता है। ऐसे में यदि प्रदेश के ऊना जिला की बात करें तो जिला का कुटलैहड क्षेत्र भी पर्यटन की दृष्टि से अनेक संभावनाएं संजोए हुए है।
सोलह सिंगीधार के  ऊंचे टीले में स्थापित प्राचीन किले का बाहरी दृश्य
कुटलैहड क्षेत्र में जहां प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर अनेक स्थान हैं तो वहीं धार्मिक दृष्टि से भी कई ऐतिहासिक एवं प्रमुख स्थान मौजूद हैं। यहीं नही कुटलैहड क्षेत्र में ऐतिहासिक दृष्टि से प्राचीन किले जहां इतिहास की खोज रखने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र हो सकते हैं बल्कि यहां पर मौजूद भरपूर जैविक संपदा व वनस्पति भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकती हैं।
सोलह सिंगीधार के  ऊंचे टीले में स्थापित प्राचीन किले का आंतरिक दृश्य
ऐसे में यदि कुटलैहड क्षेत्र को पर्यटन की इन तमाम संभावनाओं की दिशा में आगे बढ़ाने के प्रयास किए जाएं तो न केवल इस क्षेत्र में पर्यटन की गतिविधियों को बल मिलेगा बल्कि यहां की आर्थिकी को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ युवाओं को पर्यटन के क्षेत्र में स्वरोजगार के नए साधन भी सृजित हो सकते हैं। 
गोविंद सागर झील का विहंगम दृश्य
ऐसे में धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं पर चर्चा करें तो कुटलैहड क्षेत्र में प्राचीन व ऐतिहासिक दृष्टि से कई धार्मिक स्थान मौजूद हैं। जिनमें ब्रहम्होती स्थित ब्रहम्मा जी का प्राचीन मंदिर, बसोली में पीर गौंस पाक मंदिर, कोलका स्थित बाबा गरीबनाथ मंदिर, सोलहसिंगी धार के आंचल में बसा भगवान नरसिंह का ठाकुरद्वारा एवं मंदिर, तलमेहडा का ध्यूंसर महादेव मंदिर, बाबा रूद्रानंद आश्रम एवं पांच अश्वत्थ (पीपल) बोध वृक्ष नारी बसाल, डेरा बाबा रूद्रु, जोगीपंगा, जमासनी माता मंदिर, धुंदला, लठियाणीघाट, सोलह सिंगीधार के आंचल में पांडवों द्वारा स्थापित चामुखा मंदिर इत्यादि प्रमुख हैं। प्राकृतिक एवं जैव संपदा की दृष्टि से बात करें तो इस क्षेत्र में गोविंदसागर झील में जहां वाटर स्पोटर्स की अपार संभावनाएं मौजूद हैं तो वहीं प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज यहां की सुंदर, शांत व स्वच्छ वादियां पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख कारण हो सकती हैं। 
सोलह सिंगीधार के आंचल में प्राचीन एवं ऐतिहासिक चामुखा मंदिर
इसके अतिरिक्त ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की बात करें तो जनश्रुतियों के अनुसार कुटलैहड की सोलह सिंगीधार में महाराजा रणजीत सिंह या फिर कटोच वंश के शासक राजा संसार चंद द्वारा निर्मित किले जिन्हे स्थानीय लोग चौकियां कहकर पुकारते हैं हों या फिर कुटलैहड रियासत का रायपुर मैदान स्थित ऐतिहासिक राजमहल। कहा जाता है कि सोलह सिंगीधार में स्थित इन प्राचीन किलों से दूरबीन के माध्यम से जहां लाहौर (पाकिस्तान) का दृश्य तक देखा जा सकता था बल्कि यहां से ऊना सहित हमीरपुर व कांगडा जिला की प्राकृतिक वादियों का भी पर्यटक व प्रकृति प्रेमी खूब लुत्फ उठा सकते हैं। 
चामुखा मंदिर में स्थापित चारमुख वाला शिवलिंग
सोलह सिंगीधार ऊंचाई पर स्थित होने के कारण जहां गर्मियों के मौसम में मैदानी क्षेत्रों के पर्यटकों को ठंडक का एहसास दिलाती हैं बल्कि यहां से दूर-दूर तक नैना विभोर दृश्य बरबस ही पर्यटकों को अपनी ओर यहां बार-2 आने को आकर्षित करते हैं। इसके अलावा सोलह सिंगीधार हो या फिर रामगढ़धार की खूबसूरत वादियां यहां पर ट्रैकिंग साईटस की भी भरपूर संभावनाएं मौजूद हैं। इस तरह यदि पर्यटन की दृष्टि से कुटलैहड क्षेत्र का विकास किया जाए तो जहां यहां की प्राकृतिक, धार्मिक एवं ऐतिहासकि वादियां लाखों लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर सकती हैं तो वहीं यहां के युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के साधन भी उपलब्ध करवा सकते हैं। यह क्षेत्र जहां सडक़ सुविधा की दृष्टि से लगभग पूरी तरह से 12 माह सडक़ों से जुडा हुआ है तो वहीं रेल सुविधा भी यहां से महज कुछ किलोमीटर दूर ऊना तक उपलब्ध है। 
जमासनी माता परिसर
पर्यटन की दृष्टि से यदि इस क्षेत्र में अधोसंरचना को विकसित कर दिया जाए तो पर्यटन के लिए यह क्षेत्र किसी भी सूरत में प्रदेश के अन्य पर्यटक स्थलों से कमतर नहीं है। 
क्या कहते हैं स्थानीय लोग:
सोलह सिंगीधार के तहत गांव रछोह निवासी संजीव कुमार का कहना है कि यदि सरकार इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करती है तो जहां इस क्षेत्र का विकास होगा तो वहीं स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। इसी तरह हटली निवासी सुरेंद्र हटली का कहना है कि सोलहसिंगीधार में स्थापित प्राचीन किलों का यदि सरकार जीर्णोंद्धार कर इन्हे पर्यटन की दृष्टि से विकसित करती है तो यह क्षेत्र भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र हो सकता है जिससे इस क्षेत्र की आर्थिकी को बल मिलेगा तथा युवाओं को रोजगार के नए साधन भी सृजित होंगे। 
गोविंद सागर झील के मुहाने में स्थित बाबा गरीबनाथ मंदिर कोलका
रायपुर मैदान निवासी सुखदेव सिंह का कहना है कि गोविंद सागर झील तथा यहां का शांत व स्वच्छ वातारण पर्यटन की अपार संभावनाएं संजोए हुए है, जिसे सरकार को विकसित करने की दिशा में प्रयास करने चाहिए। इसके अलावा रामगढ़धार व सोलह सिंगीधार में पर्यटकों के लिए ट्रैकिंग साईटस भी विकसित करने की पूरी संभावानाएं मौजूद हैं। 
क्या कहते हैं मंत्री: 
गोविंद सागर झील का विहंगम दृश्य
कुटलैहड विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं हिमाचल सरकार में कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र कंवर का कहना है कि कुटलैहड क्षेत्र में प्राकृतिक सौंदर्य एवं स्वच्छ व साफ-सुथरा वातावरण तथा सोलह सिंगीधार, रामगढ़धार और गोविंदसागर झील में पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं जिनका वे ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देकर पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का हरसंभव प्रयास करेंगें।






Tuesday, 13 February 2018

स्वर्ग की दूसरी पौड़ी से विख्यात है पौड़ीवाला शिव मंदिर

हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में नाहन-कालाअम्ब राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर स्थित गांव अम्बवाला से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ऐतिहासिक व प्राचीन शिव मंदिर, पौड़ीवाला। स्वर्ग की दूसरी पौड़ी के नाम से विख्यात इस शिव मंदिर का शिवलिंग लंका नरेश रावण द्वारा स्थापित माना जाता है। द्वापर एवं त्रैता युग से ही अपनी महत्ता स्थापित किए हुए इस मंदिर को भारत के प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है।
रामायण में वर्णित उल्लेख के अनुसार लंका के राजा रावण शिव के अनन्य भक्त थे। महत्वकांक्षी रावण ने और अधिक शक्ति प्राप्त करने तथा अमरत्व का वरदान प्राप्त करने के लिए अपने आराध्य भगवान शिव की घोर तपस्या की। भगवान उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर प्रकट हुए तथा रावण से मनचाहा वरदान प्राप्त करने को कहा। रावण ने भगवान आशुतोश से अमरता का वरदान मांगा। भगवान ने रावण को निर्देश देते हुए कहा कि अगर वह एक ही दिन में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अलग-अलग स्थानों पर पांच शिवलिंग स्थापित कर सके तो उसे अमरत्व प्राप्त हो जाएगा। 
लंकाधिपति रावण भगवान की इस माया को न समझ पाया। अपने पुष्पक विमान में वह पांच पौड़ियां बनाने के लिए निकल पड़ा। पहली पौड़ी हर की पौड़ी हरिद्वार में, दूसरी नाहन के समीप इस पौड़ीवाला स्थान में, तीसरी चूड़धार में तथा किन्नर कैलाश में चैथी पौड़ी स्थापित करने के उपरान्त वह विश्राम करने के लिए लेट गया। इस दौरान उसे गहरी नींद आ गई। जब वह सोकर उठा तो दूसरा सूर्योदय हो चुका था। पांचवी पौड़ी बनाने से वंचित रहने के कारण वह अमर न हो सका।
कुछ इतिहासकार मानते हैं कि पाण्डुपुत्र अर्जुन ने भी पाशुपातेय अस्त्र के लिए इस स्थान पर भगवान शिव की तपस्या की थी। मृकण्डु ऋषि के पुत्र महर्षि मार्कण्डेय की तपस्या का तो यह क्षेत्र विशेष साक्षी रहा है। शतकुम्भा, पौड़ीवाला, ढिमकी मंदिर तथा बोहलियों स्थित मार्कण्डेश्वर धाम में उन्होंने शिव की गहन तपस्या कर अमरता पाई थी। मार्कण्डेय चालीसा में तो यह भी वर्णित है कि महर्षि मार्कण्डेय को अमरत्व प्रदान कर शिव यहां स्थापित शिवलिंग में लीन हो गए थे।
यहां आने वाले तमाम श्रद्धालु भगवान शिव से शांति, ऋद्धि, सिद्धी तथा सुख-सम्पति प्राप्त करने की कामना करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि भगवान आशुतोष उनकी तमाम मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से भी यह स्थान मनमोहक है। यहां पर शिवरात्रि व श्रावण मास में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।