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Monday, 1 February 2021

कोरोना महामारी : ठोस मुकाबला और भारत की विजयगाथा

 भारत ने दृढ़निश्चय और विश्वास के साथ पूरी दुनिया की तुलना में अग्रणी और अनुकरणीय बनकर कोरोना महामारी का डटकर मुकाबला किया | भारत की संवेदनशील और जिम्मेदार सरकार, सेवाभावी समाज ,अग्रिम पंक्ति के कोरोना योद्धाओं और हमारी अद्वितीय निर्माण क्षमता ने कोरोना को पराजित करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी |

चीन के वुहान में दिसंबर 2019 में ही अधिकारियों ने नए वायरस के मामले की पुष्टि कर दी थी |

वुहान से निकले इस घातक वैश्विक वायरस की असलियत देर से जैसे ही दुनिया में फैली भारत पूरी तरह से चौकन्ना होकर मुकाबले के लिए पूरी तैयारियों में जुट गया |

30 जनवरी-2020 को ठीक एक साल पहले भारत के केरल राज्य के त्रिशूर में कोरोना वायरस का सबसे पहला मामला दर्ज किया गया था।

चीन की वुहान यूनिवर्सिटी से एक भारतीय छात्र अपने देश वापस लौटा था, जिसमें कोरोना वायरस की पुष्टि की गई थी।

31 जनवरी 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)ने कोरोना वायरस को वैश्विक चिंता की अंतरराष्ट्रीय आपदा घोषित किया |

27 फ़रवरी 2020 को चीन से अपने 759 नागरिकों को भारत एयरलिफ़्ट करके लाया जिनमें43 विदेशी नागरिक भी चीन से लाए गए |

6 मार्च को भारत ने विदेश से आने वाले सभी लोगों की एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग शुरू करने के साथ संक्रमितों को क्वारंटीन करना शुरू कर दिया |

11 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना को वैश्विक महामारी घोषित कर दिया |

12 मार्च को भारत में कोरोना संक्रमण से पहली मौत की पुष्टि हुई |

केंद्र सरकार और राज्य सरकारें सतर्क हुईं और भारत के वज्ञानिक और चिकित्सक कोरोना वायरस की पहचान करने में सफल हुए |

17 मार्च को भारत सरकार ने निजी लैब्स को कोरोना वायरस की जांच की अनुमति दे दी |

22 मार्च 2020 कोभारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता कर्फ्यू का आह्वान किया जो एक प्रकार से  पूर्ण लॉकडाउन की तैयारी का श्रीगणेश था |.

25 मार्च को पीएम मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुएरात्रि 12 बजे से 21 दिन के पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की |

28 मार्च को भारत में पहले 1,000 मामलों की पुष्टि हुई,14 अप्रैल तक ही 10 हज़ार मामले और19 मई आते-आते देश में कोरोना संक्रमण के मामले एक लाख को पार कर गए |

14 अप्रैल को लॉकडाउन को तीन मई तक बढ़ाने की घोषणा हुई |

20 अप्रैल को देश में प्लाज़मा थेरेपी के द्वारा कोरना से ठीक होने का पहला मामला सामने आया |

01 मई को प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन को 17 मई तक के लिए और बढ़ा दिया |

मई में ही आईसीएमआर ने भारत बॉयोटेक के साथ मिलकर कोरोना वैक्सीन बनाने की घोषणा की |

01 जून कोलॉकडाउनसे बाहर निकलकर भारत सरकार ने अनलॉक-1 की गाइडलाइन घोषित कीं |

10 जून को भारत में पहली बार कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले लोगों की संख्या संक्रमित लोगों से ज़्यादा हो गई |

26 जून को भारत ने संक्रमण के पाँच लाख मामलों का आंकड़ा पार कर लिया जबकि 16 जुलाई को 10 लाख मामलों का आंकड़ा पार हो गया |

01 जुलाई को भारत सरकार ने अनलॉक 2.0 के दिशानिर्देश जारी किए |

06 जुलाई को भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कोरोना संक्रमित देश बन गया |

15 जुलाई को भारत बायोटेक की देश में बनी कोवैक्सिन वैक्सीन का पहले चरण का क्लीनिकल ट्रायल शुरू हुआ |

03  अगस्त को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया को डीसीजीआई से दूसरे और तीसरे चरण का ट्रायल करने की अनुमति मिल गई |

26 अगस्त को सीरम इंस्टीट्यूट ने अपनी वैक्सीन कोवीशील्ड का भारत में ट्रायल शुरू कर दिया.

सितंबर में भारत कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा. इस महीने में रोज़ाना सामने आ रहे मामलों का आँकड़ा औसत एक लाख पहुंच गया |

16 सितंबर इस मामले में भारत का 'पीक' था जब 97,894 मामले सामने आए |

18 दिसंबर को कोरोना संक्रमण के मामलों का आँकड़ा भारत में एक करोड़ को पार कर गया |

02 जनवरी 2021 को भारत के औषधि महानियंत्रक ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया की वैक्सीन

कोविशील्ड को आपात प्रयोग की स्वीकृति दी |

03 जनवरीको भारत बायोटेक और आईसीएमआर की वैक्सीन कोवैक्सिन को आपात इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी मिली |

कोरोना मौत के आंकड़ों पर नजर डालें तो पहले स्थान पर  4,47,459 मृतकों के साथ विश्वशक्ति अमेरिका है, दूसरे स्थान पर 2,22,775 मौतों के साथ ब्राजील और 1,56,000 के आंकड़ों के साथ मैक्सिको तीसरे स्थान पर पहुंच गया है |

वैश्विक स्तर पर सितंबर 2020 के पहले 14 दिनों में सर्वाधिक कोरोना संक्रमणयानी दस लाख से अधिक और कोरोना मौतों लगभग 16,400 के आंकड़ों के कारण भारत की स्थिति खराब रही ,लेकिन अक्तूबर में कोरोना वायरस के मामलों में थोड़ी राहत और दैनिक मामलों में कमी दिखाई पड़ने लगी।

वर्ष 2021 शुरू होते ही जनवरी माह में कोरोना वायरस से होने वाली दैनिक मौतों का आंकड़ा 200 से भी कम होने लगा है, देश में कोरोना वायरस से संक्रमित हुए लोगों की संख्या 1,07,20,048 है जिनमें से 1,03,94,352 लोग संक्रमणमुक्त हो चुके हैं | इसी तरह कोरोना मृतकों की संख्या 1,54,010 हो गई है तो कोरोना के एक्टिव मामलों की संख्या 1,71,686 है |

आर्थिक पैकेज की घोषणा

कोरोना संकट काल में अर्थव्यवस्था को बूस्ट देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया गया, इसे प्रधानमंत्री ने कोरोना काल में कमजोर हो रही अर्थव्यवस्था के लिए मिनी बजट की संज्ञा दी |

अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और देशवासियों के कर्जे,उनकी मासिक किश्तों के तनाव को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़े राहत की घोषणाएं कीं |

रिजर्व बैंक ने जहां ब्याज दरों में ऐतिहासिक कटौती की है. वहीं, केंद्रीय बैंक ने रिटेल लोन की EMI भरने पर भी 3 महीने का मोरेटोरियम लगाया |

आरबीआई ने होम लोन, कार लोन या किसी भी लोन की EMI नहीं चुकाने की छूट दे दी |

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, लॉकाडाउन के दौरान पीएम किसान फंड में 18,700 करोड़ ट्रांसफर किए गए है. PM फसल बीमा योजना के तहत 6,400 करोड़ की राहत दी गई |

कृषि में मार्च से अप्रैल के बीच में 86000 करोड़ रुपये के 63 लाख लोन मंजूर हुए |

आवास योजना से जुड़ी क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम की डेडलाइन बढ़ा दी गई है. इससे आवास क्षेत्र को 70,000 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन दिया गया |

माइक्रो फूड इंटरप्राइज के लिए 10,000 करोड़ की स्कीम लाई गई |

प्रवासी मजदूरों के लिए सरकार के ठोस उपाय

केंद्रीय गृह मंत्रालय और श्रम मंत्रालय ने राज्य सरकारों से 11 अप्रैल तक सभी प्रवासी मजदूरों का डेटा चीफ लेबर कमिश्नर (सीएलसी) के पास देने के लिए कहा |

डेटाबेस से ये पता लगाया जाना था कि इन मजदूरों के प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खोला गया बैंक खाता, या अन्य बैंक खाता है। साथ ही, मजदूरों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में आधार नंबर के तहत मुफ्त गैस सिलेंडर का लाभ मिले ।

25 मार्च से देशभर में 21 दिन का लॉकडाउनल लगाया गया ,प्रवासी मजदूर शहरों को छोड़कर अपने गांव वापस जाने लगे । उद्योंगो के बंद होने से उनके पास घर का किराया देने के साथ दूसरी बुनियादी जरूरतों के लिए भी पैसे नहीं थे औरस्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी उनके लिए चुनौती थी ।

5 से 6 लाख मजदूरों को पैदल घर वापस जाना पड़ा, क्योंकि ट्रांसपोर्ट की सेवाएं भी बंद थीं। देश की राज्य सरकारों द्वारा बनाए गए सेल्टर होम्स में भी सैंकड़ों प्रवासी मजदूर रह रहे थे ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 जून को देश को संबोधित करते हुए कहा कि नवंबर तक देश के करीब 80 करोड़ गरीब लोगों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ मिलेगा, जिसका पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी और अनाज वितरण राज्य सरकारों द्वारा किया जाएगा |

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत सभी गरीब परिवारों को जिनके पास राशन कार्ड है, और जिनके पास नहीं है, उन्हें 5 किलो गेहूं/चावल प्रति सदस्य और एक किलो चना अप्रैल माह से 30 नवंबर तक मुफ्त दिया गया | यह मुफ्त अनाज राशन कार्ड पर मिलने वाले अनाज के कोटे के अतिरिक्त था |

देश के सभी राज्यों ने अपने स्तर पर प्रवासी श्रमिकों के खातों में सीधे पैसे भेजने के साथ केंद्र सरकार की खाद्यान्न योजना को भी गंभीरता से पूरा किया | उत्तर प्रदेश सरकार ने  4 लाख 81 हजार शहरी रेहड़ी पटरी वालों के अलावा 11 लाख से अधिक श्रमिकों को एक -एक हजार रुपये की राशि दी | 20 लाख निर्माण श्रमिकों को भी यह धनराशि उपलब्ध करवाई गई |

लॉकडाउन से लेकर मास्क,सैनेटाइजर ,कोरोना टेस्ट की स्पीड ,पीपीई किट और उसे नेक नीयत,उत्साह और फुर्ती के साथ स्वावलंबन,आत्मविश्वास और स्वदेशी आविष्कार के द्वारा कोरोना मुक्त भारत का संकल्प लेकर सर्वे संतु निरामया के भाव को सार्थक सिद्ध करते हुए समूचे विश्व के लिए भी स्वदेशी कोरोना वैक्सीन उपलब्ध करने का गौरवपूर्ण इतिहास भारत ने रच डाला |

सही समय पर लॉकडाउन

भारत ने ठीक एक साल पहले कोरोना को रोकने के लिए एडवाइजरी जारी की। पीएम मोदी के शब्दों में –“भारत जैसी विशाल आबादी वाले देश के लिए तमाम तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं। दूसरे देशों में महामारी की भयावहता को देखते हुए लोगों का जीवन को बचाने के लिए लॉकडाउन के अलावा कोई उपाय नहीं था।“

आंकड़ों की दृष्टि से देखें तो लॉकडाउन की वजह से मात्र63 लाख कोरोना संक्रमण का मामला और लगभग 98 हजार मौत का आंकड़ा सितंबर-2020 के अंत में पहुंचा।
यह अनुमान लगया गया कि अगर लॉकडाउन नहीं लगाया जाता तो 1 करोड़ 40 लाख ज्यादा लक्षण वाले केस और 26 लाख से ज्यादा मरने वालों की संख्या जून– 2020 में ही हो जाती।

सजग और सेवभावी समाज की भूमिका

लॉकडाउन के समय प्रवासी मजदूर बेरोजगार हो गए,उन्हें भोजन,रहने और अपने गाँव तक पहुँचने के लिए आर्थिक संकट झेलना पड़ा | व्यापक स्तर पर सबको साथ लेकर सबके कष्टों को दूर करने का संकल्प भाव लेकर सेवा संस्थाओं और सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने अद्वितीय पहल की|

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से इस संकट में आर्थिक मदद की अपील की और सब ओर से भरपूर सहयोग मिला |

ऐसा आत्मीय भाव और सहयोग किया कि हताशा और निराशा के दौर में भी विश्व की तुलना में भारत कोरोना से लड़ने और मुकाबले के लिए एकजुट और प्रतिबद्ध दिखा |

धार्मिक क्षेत्र की विशेष भूमिका

कोरोना संक्रमण, और उसको फैलने से रोकने के लिए लगाए लॉकडाउन जैसी विषम स्थिति में देश के मठ मंदिरों,आश्रमों और गुरुद्वारों ने पीएम करे फंड में नकद दान देने के साथ ही प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन,दवाई,कपड़ों और अन्य सामान्य जरूरतों को पूरा करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई |

मंदिर और गुरुद्वारों में सैकड़ों हजारों लोगों के लिए निशुल्क भोजन के भंडारे और लंगर महीनों तक चलते रहे | भोजन आदि कल्याणकारी गतिविधियों के साथ प्रवासी श्रमिकों को उनके गांवों तक पहुंचाने, रक्तदान शिविर लगाने और प्लाज्मा डोनेट करने के लिए अभियान चलाए |

धार्मिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान देश को इस संकट के समय यथाशक्ति सहयोग करते दिखाई दिए | सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट गुजरात, कांची कामकोटि पीठम तमिलनाडु, माता वैष्णों देवी मंदिर जम्मू कश्मीर, महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन,पतंजलि योग ट्रस्ट हरिद्वार, माँ महामाया मंदिर ट्रस्ट, विलासपुर छत्तीसगढ़, श्री नित्य चिंताहरण गणपति मंदिर ट्रस्ट रतलाम मध्य प्रदेश, सिद्ध विनायक मंदिर मुंबई, दिल्ली के झंडेवाला माता मंदिर, गुरुद्वारा रकाबगंज साहब आदि अनगिनत धार्मिक ट्रस्ट,मंदिर और प्रतिष्ठान हैं जिन्होंने राज्यों के मुख्यमंत्री राहत कोश में भी भरपूर योगदान दिया

अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा टेस्ट भारत में

अगस्त 2020 तक देश में प्रतिदिन 5 लाख औसत टेस्ट हो रहे थे जो नवंबर तक 10 लाख प्रतिदिन के आँकड़े और अब 12 लाख टेस्ट प्रतिदिन के औसत तक पहुँच चुका है | |

जनवरी 2021 की स्थिति ये है कि भारत में करीब 10 करोड़ टेस्ट पूरे किए जा चुके हैं। भारत से ज्यादा 12.7 करोड़ टेस्ट अब तक सिर्फ अमेरिका में किए गए हैं। अभी अपने देश में हर दिन 12 लाख से भी ज्यादा टेस्ट किएजाते हैं।

इच्छाशक्ति ने बढ़ाई निर्माण क्षमता

मार्च 2020 तक जो भारत पीपीई किट के उत्पादन में शून्य की स्थिति में था, विदेश से ही आयात करता था ,जुलाई- 2020 तक भारत अन्य देशों को पीपीई किट का निर्यात करने की स्थिति में आ गया। हर दिन देश में विकसित की गई पांच लाख टेस्टिंग किट तैयार होना भारत के नेतृत्व की इच्छाशक्ति और देश की उत्पादन क्षमता को प्रमाणित करता है |

भारत दो महीने से कम समय के भीतर पीपीई किट बनाने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर बना, भारत से आगे रहने का दावा करने वाले चीन की क्वान्टिटी विश्वभर में क्वालिटी के मामले में खूब किरकिरी करवा गई |

भारत में अक्टूबर तक छह करोड़ से अधिक निजी सुरक्षा किट (पीपीई) और करीब 15 करोड़ एन-95 मास्क का उत्पादन हुआ।दो करोड़ से अधिक पीपीई और चार करोड़ से अधिक एन-95 मास्क का निर्यात अन्य आवश्यकता वाले देशों को भी किया गया |

लॉकडाउन की स्थिति में पीपीई किट और जांच में उपयोग होने वाले स्वैब के उत्पादन ने पांच लाख प्रत्यक्ष रोजगार का निर्माण किया। भारत ने 60 दिन के भीतर ही पीपीई किट में उपयोग होने वाले कपड़े के उत्पादन और परिधान निर्माताओं का घरेलू नेटवर्क तैयार कर लिया ।

स्वदेशी आत्मनिर्भर टीकों का आविष्कार 

देश में कोरोना वायरस की वैक्सीन कोविशील्ड सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एसआईआईपीएल) ने और कोवैक्सीन भारत बायोटेक और आईसीएमआर द्वारा भारत में ही तैयार की गई हैं |

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक तरफ दुनिया के तमाम देश दूसरे मुल्कों पर आश्रित हैं, लेकिन भारत दूसरी सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश होने के बावजूद अपने दम पर टीकाकरण अभियान की शुरुआत करने में सफल रहा |कोरोना संकट काल में अमेरिका सहित 150 देशों को भारत द्वारा भेजी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन उपयोगी सिद्ध हुई इसलिएवैक्सीन के लिए भी दुनिया उम्मीद लगा रही है |

संकट में अवसर खोजते हुए आत्मनिर्भर भारत को वैश्विक स्वीकार्यता दिलाने का आत्मविश्वास भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य में सिद्ध होता दिखाई देता है –

'कोरोना से हमारी लड़ाई आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की रही है | आज हम मास्क, PPE किट, टेस्टिंग किट, वेंटीलेटर के निर्माण में आत्मनिर्भर हो गए हैं और निर्यात भी कर रहे हैं | इसी ताकत को हमें टीकाकरण के इस दौर में भी सशक्त करना है |'

कोरोना टीकाकरण की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “यह भारत की साम‌र्थ्य की दिखाता है। भारत शुरू में ही जितने लोगों को टीका लगाने जा रहा है, वह कई देशों की आबादी से अधिक है।

टीकाकरण के प्रथम चरण में कोरोना योद्धा

पहले चरण में ही तीन करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों, सफाईकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों को मुफ़्त टीका लगाया जाएगा। जबकि दुनिया के 100 देशों की आबादी तीन करोड़ से कम है। 50 साल अधिक उम्र और गंभीर बीमारी ग्रसित लोगों को जोड़ लें, अगले कुछ महीने में 30 करोड़ लोगों को प्राथमिकता के साथ टीका लगने जा रहा है।“

वास्तव में अनुमानित आंकड़ों पर नजर डालें तो 16 जनवरी को देश में शुरू हुए टीकाकरण के प्रथम चरण में 3 करोड़ कोरोना योद्धाओं को चिन्हित किया गया है जिनमें चिकित्सक ,स्वास्थ्यकर्मी और सुरक्षा से जुड़े अग्रिम पंक्ति के योद्धा शामिल हैं |

अनुमानतः सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर देश में लगभग 70 लाख हेल्थकेयर वर्कर्स हैं। जिनमें 11 लाख चिकित्सक , 8 लाख आयुष प्रैक्टिशनर,15 लाख नर्सें ,10 लाखANM और आशा कार्यकर्ता और इनके अलावा सफाईकर्मी और दूसरे कर्मचारी भी शामिल हैं।

पुलिसकर्मियों की संख्या45 लाख और सैन्य जवानों की संख्या 15 लाख के आसपास होगी | सार्वजनिक सेवा ,समुदाय सेवा जिसमें शिक्षक ,सार्वजनिक परिवहन के ड्राइवर, कंडक्टर और क्लीनर
इत्यादि आते हैं जिनकी संख्या 1.50 करोड़ से अधिक है।

प्रथम चरण के टीकाकरण में 50 वर्ष से अधिक आयु के वे सभी नागरिक शामिल हैं जो किसी खतरनाक या असाध्य बीमारी से ग्रस्त हैं ,देश में ऐसे लोगों की अनुमानित जनसंख्या लगभग 26 करोड़ के आसपास होगी |

विश्व ने माना लोहा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने कोरोना वैक्सीन उत्पादन के मामले में भारत की प्रशंसा करते हुए कहा कि “भारत की वैक्सीन उत्पादन क्षमता दुनिया में सबसे बेहतर है, मुझे उम्मीद है कि दुनिया समझेगी कि इसका भरपूर उपयोग होना चाहिए। हमें उम्मीद है कि भारत का टीकाकरण में अहम योगदान रहेगा। भारत के पास सभी तरह के साधन हैं और दुनिया के टीकाकरण में उसकी भूमिका बेहद अहम रहेगी। उसके प्रयासों से वैश्विक टीकाकरण अभियान सफल हो सकेगा।“

We strongly hope that India will have all the instruments that are necessary to play a major role in making sure that a global vaccination is campaign is made possible: UN Secretary-General Antonio Guterres

ऑस्ट्रेलियाई राजदूत बैरी ओ'फारेल ने भारत की वैक्सीन क्षमता को देखते हुए कहा कि केवल भारत ही पूरी दुनिया की वैक्सीन आवश्यकता को संतुष्ट कर सकता है –

“There are many vaccines being produced in countries around the world. But there's only one country that has the manufacturing capacity to produce sufficient quantities to satisfy the demand of citizens in every country. And that's India. This is another example of the moment in which India will shine, because of the strength of this sector and the planning that has gone in. I suppose that's not unexpected from a country that itself has suffered so many pandemics in the past.

उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने इस उपलब्धि पर कहा कि “भारत की स्वदेशी वैक्सीन (कोवैक्‍सीन) में पूरे वायरस की पहुंच पर आधारित कुछ अनूठी विशेषताएं हैं। यह एक सराहनीय उपलब्धि है और दूरदर्शी मजबूत तथा उत्साही प्रयासों के लिए सभी संबंधित व्‍यक्ति बधाई के पात्र हैं।“

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'मोदी जी के नेतृत्व वाला यह ‘नया भारत’ आपदाओं को अवसर में और चुनौतियों को उपलब्धियों में बदलने वाला भारत है। यह 'मेड इन इंडिया' वैक्सीन इसी आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की परिचायक हैं। इस ऐतिहासिक दिन पर मैं हमारे सभी कोरोना योद्धाओं को कोटि-कोटि नमन करता हूं। भारत उन चुनिंदा देशों में से एक है, जिसने मानवता के विरुद्ध आए सबसे बड़े संकट को समाप्त करने की दिशा में विजय पायी है। इस अभूतपूर्व उपलब्धि से हर भारतीय गौरवान्वित है। यह विश्वपटल पर एक नये आत्मनिर्भर भारत का उदय है।“ 

को-विन (कोरोना वैक्सीन इंटेलीजेंस नेटवर्क)

को-विन (कोरोना वैक्सीन इंटेलीजेंस नेटवर्क) के द्वारा वैक्सीन के कंपनी से निकलने से लेकर व्यक्ति को लगने तक की जानकारी के साथ किसी क्षेत्र में इसकी आवश्यकता,उपलब्धता और इसको लेने वाले के विषय में पूरी जानकारी भी होगी |

पीएम केयर्सफंड ट्रस्ट ने देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अतिरिक्त 162 समर्पित प्रेशर स्विंग एडसोर्पश्‍न (पीएसए) चिकित्सा ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों की स्थापना के लिए 201.58 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

टीकाकरण में भी अव्वल

भारत में टीकाकरण अभियान की शुरुआत 16 जनवरी को हुई थी, भारत में देशव्यापी कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम के तहत कोविड-19 के खिलाफ टीका लगवाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या में उल्‍लेखनी वृद्धि दर्ज की गई है।

कोविड-19 का टीका लगवाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की कुल संख्या 29 जनवरी तक 33 लाख को पार कर गई है। 62,939 सत्रों के माध्यम से कोविड-19 का टीका लगा चुके स्वास्थ्य कर्मियों की कुल संख्या 33,68,734तक पहुंच गई |

अन्य देश दिसंबर के पहले हफ्ते से टीकाकरण कर रहे हैं। भारत ने मात्र छह दिनों में 10 लाख लोगों को वैक्सीन दे दी जबकि इतने ही लोगों को वैक्सीन देने में अमेरिका में 10 दिन, स्पेन में 12 दिन, इजरायल में 14 दिन, ब्रिटेन में 18 दिन, इटली में 19 दिन, जर्मनी में 20 दिन और यूएई में 27 दिन लग गए थे।

मानवता और पड़ोसी धर्म

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के अनुसार 20 जनवरी से हम अपने पड़ोसी देशों को कोरोना वायरस वैक्सीन की 55 लाख से अधिक खुराकें उपलब्ध करवा चुके हैं।

इस सूची में 13 देश- बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, मंगोलिया, म्यांमार, नेपाल, बहरीन, ब्राजील, मॉरीशस, मोरक्को, ओमान, सेशेल्स और श्रीलंका- शामिल हैं |

भूटान को वैक्सीन की 1.5 लाख खुराकें, मालदीव, मारीशस और बहरीन को एक लाख, नेपाल को 10 लाख, बांग्लादेश को 20 लाख, म्यांमार को 15 लाख, सेशेल्स को 50 हजार और श्रीलंका को पांच लाख खुराकें उपलब्ध कराई गई हैं।

अगले कुछ दिनों में ओमान को वैक्सीन की एक लाख खुराकें, CARICOM देशों (कैरेबियाई समुदाय) को पांच लाख और निकारागुआ व प्रशांत द्वीपीय देशों को दो-दो लाख खुराकें उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।

ऑस्ट्रेलियाने भारत से वैक्सीन की 14 करोड़ खुराकजापान ने 12 करोड़, इंडोनेशिया ने 10 करोड़ ,, फिलीपींस ने 5 करोड़ ,दक्षिण कोरिया ने दो करोड़ खुराक,दक्षिण अफ्रीका ने 15 लाख और इसी तरह सऊदी अरब,,कनाडा, मोरक्को ,मंगोलिया और अन्य देशों ने वैक्सीन की मांग की है।

दुनिया के 92 देशों ने मेड इन इंडिया वैक्सीन के लिए भारत से संपर्क किया है। इससे वैक्सीन हब के रूप में भारत की साख और मजबूत हुई है।

सस्ती और सुरक्षित वैक्सीन

दुनियाभर में प्रयोग हो रही वैक्सीन की तुलना में भारत की ये दोनों वैक्सीनअन्य कोरोना वैक्सीन की तुलना में काफी सस्ती है |

फाइजर-बायोएनटेक के टीके की लागत प्रति खुराक 1431 रुपये , मॉडर्ना का2348 रुपये से लेकर 2715 रुपये तक, नोवावैक्स का टीका1114 रुपये, स्पूतनिक-वी 734 रुपये और जॉनसन एंड जॉनसन निर्मित टीके की कीमत 734 रुपये है | चीन की साइनोफोर्म वैक्सीन की कीमत 77 यूएस डॉलर अर्थात5650 रुपये से अधिक |.

फाइजर की कोरोना वैक्‍सीन लगने के बाद ब्रिटेन में पहले ही दिन 24 घंटे के अंदर 2 स्वास्थ्यकर्मियों की तबीयत बिगड़ गई | नार्वे में 23 लोगों की मौत हो गई और 100 लोगों पर इसका दुष्‍प्रभाव देखा गया ।

यूरोपीय देश चाहे अमेरिका हो , ब्रिटेन या फ्रांस अथवा फ‍िनलैंड इस वैक्‍सीन को लगाने के बाद 32 लोगों में साइड इफेक्‍ट देखा गया । यही स्थिति दुनिया की अन्य वैक्सीन की है लेकिन भारत की दोनों वैक्सीन से दुनियाभर से कोई दुष्प्रभाव की खबर नहीं मिली |

फाइजर को जहां 70 डिग्री सेल्सियस नीचे के तापमान की आवश्यकता पड़ती है वहीं भारत की कोरोना वैक्सीन को दो से आठ डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जा सकता है |

भारी उत्पादन और मांग

विश्वभर में, लगभग 17 कोरोना वैक्सीन को अलग-अलग देशों में औपचारिक स्वीकृति दी जा चुकी है और इनकी 12.7 अरब डोज को विभिन्न देश अपने नागरिकों के लिए रिजर्व कर चुके हैं | कोरोना वैक्सीन के उत्पादन की क्षमता अमेरिका और भारत में सबसे ज्यादा है।

डाटा विश्लेषण कंपनी एयरफिनिटी के मुताबिक, अमेरिका 2021 तक 4.7 अरब कोरोना वैक्सीन का उत्पादन कर लेगा। डाइचीवेले के एक डाटा के मुताबिक, भारत में 2021 तक 3.13 अरब डोज का उत्पादन होगा।

इसके बाद चीन (1.90 अरब), ब्रिटेन (0.95 अरब), जर्मनी (0.50 अरब) और दक्षिण कोरिया (0.35 अरब) में ज्यादा संख्या में वैक्सीन बनाई जाएगी।

सबसे बड़ी कंपनी की भी यदि बात हो तो भारत की सीरम इंस्टीट्यूट दुनिया की सबसे बड़ी कोरोनापूरे वैक्सीन उत्पादक है। यह हर साल 1.4 अरब डोज वैक्सीन का उत्पादन अकेले ही करती है।  

कोरोना मुक्त भारत की ओर कदम

एक वर्ष के अंदर भारत दुनिया में कोरोना वायरस मामलों और इससे हुई मौतों की संख्या की दृष्टि से चौथे स्थान पर हैजहां कोरोना वायरस से 1,54,010 लोगों की मौत हुई है। | कोरोना मृतकों के मामले में सितंबर 2020 से भारत तीसरे स्थान पर था |

भारत की संवेदनशील सरकार ,सजग समाज और कोरोना योद्धाओं,वैज्ञानिकों और आत्मनिर्भर भारत के आत्मविश्वास और निर्माण क्षमता का सामूहिक प्रयास है जो भारत को कोरोना मुक्त करने के संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने में सफल होता दिखाई पड़ रहा हैं |

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भारत की सजग,सक्रिय और संवेदनशील सरकार के साथ यहाँ के सेवभावी समाज के बल पर कोरोना काल में भी अपने योग्य और समर्पित कोरोना योद्धाओं के बल पर देश ने वैश्विक स्तर पर आत्मनिर्भर भारत की गौरवमय छवि का निर्माण किया है |

(स्त्रोत विश्व संवाद केंद्र भारत)

Thursday, 17 December 2020

नई पंचायत गठन से अब भगेहड़ वासियों के विकास कार्यों को मिलेगी गति

मटरू व लडभड़ोल में आयोजित जन मंच में रखा था मामला, जय राम सरकार ने नई पंचायत का दिया तोहफा

जिला मंडी के उप मंडल जोगिन्दर नगर के अंतर्गत तहसील लडभड़ोल के दूर दराज क्षेत्र भगेहड़ को प्रदेश सरकार ने नई ग्राम पंचायत का तोहफा दिया है। अब इस क्षेत्र को अपनी पंचायत मिल जाने से जहां वर्षों से विकास की दृष्टि से पिछड़े इस क्षेत्र में विकास की गति तेज होगी तो वहीं अब क्षेत्र वासियों को पंचायत से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए लंबा सफर भी तय नहीं करना पड़ेगा। भौगोलिक दृष्टि से अति दुर्गम यह क्षेत्र न केवल विभिन्न विकास कार्यों से कोसों दूर रहा है बल्कि छोटे-छोटे विकास कार्य करवाने को भी यहां के लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। लेकिन यहां के लिए अलग पंचायत बने इस मामले को क्षेत्रवासियों ने जोगिन्दर नगर विस क्षेत्र के तहत मटरू व लडभड़ोल में आयोजित जन मंच में प्रदेश सरकार के समक्ष रखा, जिसका नतीजा है कि अब यहां के लोगों को जयराम ठाकुर सरकार ने नई पंचायत का तोहफा प्रदान किया है। सरकार के इस बेहतरीन तोहफे को लेकर यहां के क्षेत्रवासी न केवल बेहद खुश हैं बल्कि मुख्य मंत्री जय राम ठाकुर का आभार भी जता रहे हैं।

जब पंचायत गठन को लेकर स्थानीय निवासी कैप्टन शेष राम से बातचीत की तो उनका कहना है कि यहां के लोगों की यह लंबे समय से अहम मांग रही है। स्थानीय लोगों ने क्षेत्र से जुड़े गांवों की एक समिति गठित कर मामले को मटरू व लडभड़ोल में आयोजित जन मंच में प्रमुखता से उठाया जिसका नतीजा है कि आज इस दूर दराज क्षेत्र भगेहड़ को नई पंचायत मिली है। उनका कहना है कि इससे पहले यहां के लोगों को पंचायत से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए पंचायत मुख्यालय दलेड पहुंचने के लिए लगभग 14 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता था, जिसके कारण न केवल ग्राम सभा में पहुंचने में दिक्कत होती थी बल्कि विभिन्न विकास कार्यों को स्वीकृति प्रदान करवाने में भी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता था।

इसी तरह स्थानीय निवासी रमेश चंद राठौर से बातचीत की तो उनका भी कहना है कि दलेड पंचायत का हिस्सा रहे यहां के गांव भगेहड़, लंगेसर, सिलह व कवार वासियों की कई वर्षों से अलग पंचायत गठन की मांग रही है, जिसे प्रदेश की जय राम ठाकुर सरकार ने पूर्ण कर यहां के लोगों को बड़ी राहत प्रदान की है। सरकार के इस अहम निर्णय से अब यहां के लोगों को विकास कार्यों के लिए न केवल सुविधा होगी बल्कि विकास की गति भी बढ़ेगी। पंचायत गठन को लेकर स्थानीय निवासी मुख्य मंत्री जय राम ठाकुर के साथ-साथ स्थानीय सांसद राम स्वरूप शर्मा व विधायक प्रकाश राणा का भी विशेष तौर पर अभार जता रहे हैं जिनके प्रयासों से ही इस क्षेत्र को यह बड़ा तोहफा नसीब हुआ है। 

नव गठित भगेहड़ पंचायत में होगें पांच वार्ड व 601 मतदाता

नव गठित भगेहड़ पंचायत में पांच गांवो जिसमें भगेहड़, कसैड़ा, लंगेसर, सिलह व कवार को शामिल किया गया है। जबकि पंचायत को पंाच वार्ड जिसमें भगेहड़-एक व दो, लंगेसर, सिलह व कवार में विभाजित किया गया है। वर्तमान में इस पंचायत में कुल 601 मतदाता हैं जिनमें 303 पुरूष तथा 298 महिलाएं शामिल है। मतदाताओं की संख्या  मतदाता सूची पुनरीक्षण के बाद बढऩे की संभावना है। वार्ड स्तर पर मतदाताओं की संख्या को देखें तो सिलह में 177, कवार में 100, लंगेसर में 39, भगेहड़-एक में 160 तथा भगेहड़-दो में 125 मतदाता हैं। नव गठित पंचायत वासियों ने पंचायत भवन निर्माण के लिए भूमि को भी चिन्हित कर लिया है तथा उम्मीद जताई की सरकार जल्द ही इसका शिलान्यास कर निर्माण कार्य शुरू करेगी।

क्या कहते हैं विधायक :

जोगिन्दर नगर के विधायक प्रकाश राणा ने भगेहड़ वासियों को नई पंचायत गठित होने की बधाई देते हुए कहा कि इससे जहां इस दूर दराज क्षेत्र में विकास की गति तेज होगी तो वहीं सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों को घर-द्वार प्राप्त होगा। उनका कहना है कि जन मंच प्रदेश सरकार का एक ऐसा कार्यक्रम है जिसके माध्यम से सरकार सीधे लोगों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को न केवल सुना जाता है बल्कि प्राथमिकता के आधार पर हल भी किया जाता है। भगेहड़ पंचायत का मामला भी मटरू व लडभड़ोल जन मंच में लोगों ने प्रमुखता से उठाया था तथा इस वास्तविक मांग को देखते हुए जय राम ठाकुर सरकार ने इसे पूर्ण किया है जिसके लिए वे क्षेत्रवासियों की ओर से मुख्य मंत्री का आभार व्यक्त करते हैं। 

क्या कहते हैं सांसद :

मंडी से लोकसभा सांसद राम स्वरूप शर्मा का कहना है कि प्रदेश सरकार ने इस बार लोगों की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए नई पंचायतों का गठन किया है जिसके तहत ही जोगिन्दर नगर विस क्षेत्र में भी तीन नई पंचायतें गठित हुई हैं जिसमें भगेहड़ भी शामिल है। उन्होने भी क्षेत्रवासियों को नई पंचायत गठन की बधाई दी है तथा कहा कि इससे इस दूर दराज क्षेत्र के लोगों की दिक्कतें न केवल कम होगी बल्कि विकास की गति को भी बल मिलेगा।







Saturday, 28 November 2020

जसवाल ट्राऊट मछली फार्म शानन का दीवाना है पूरा उत्तरी भारत

 ट्राऊट मछली उत्पादन के साथ-साथ हैचरी से भी हो रही खूब कमाई

प्रदेश भर में 1166 रेसवेज के माध्यम से हो रहा है 600 मीट्रिक टन ट्राउट का उत्पादन

मंडी जिला के जोगिन्दर नगर के शानन स्थित जसवाल ट्राउट मछली फॉर्म की पहुंच न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित पूरे उत्तरी भारत में है। मजेदार बात तो यह है कि इस फॉर्म की तैयार मछली के दीवाने देशी व विदेशी पर्यटकों सहित देश की जानी मानी राजनैतिक हस्तियां भी रहीं हैं। ट्राऊट मछली उत्पादन में जसवाल ट्राउट फॉर्म शानन प्रदेश में एक अहम स्थान रखता है। 

जब इस संबंध में जसवाल ट्राउट फॉर्म के संचालक दोनों भाईयों राजीव व संजीव जसवाल से बातचीत की तो उन्होने बताया कि उनका यह फॉर्म उनके परिवार के लिए स्वरोजगार का एक बड़ा माध्यम बन गया है। इस फॉर्म से न केवल उनके परिवार का भरण-पोषण हो रहा है बल्कि आज वे प्रतिवर्ष लाखों रूपये का ट्राउट मछली का कारोबार भी कर पा रहे हैं। 

उन्होने बताया कि वर्ष 2001 में मात्र कुछ दिनों के लिए कॉर्प मछली पालन से शुरू किया गया यह कार्य आज ट्राउट मछली पालन के तौर पर एक बहुत बड़े कारोबार में तबदील हो गया है। यहां की भौगोलिक परिस्थितयों को देखते हुए ट्राउट मछली उत्पादन की ओर कदम बढ़ाए जिसके न केवल बेहतर परिणाम सामने आए हैं बल्कि उनका यह स्वरोजगार का जरिया धीरे-धीरे एक बड़े कारोबार में बढ़ता गया है। ट्राउट मछली पालन को उस समय नए पंख लग गए जब उन्होने इसकी हैचरी में भी सफलता प्राप्त कर ली। वर्ष 2003 में ट्राउट हैचरी तैयार होने से उनके मछली उत्पादन के काम को ओर अधिक बल मिला तथा अब दोनों भाई मिलकर इसे आगे बढ़ा रहे हैं।

उनका कहना है कि उनकी हैचरी में 98 प्रतिशत तक की सफलता मिली है जिससे उन्हे आय का अन्य बड़ा स्त्रोत मिल गया है। हैचरी को आधुनिक तकनीक प्रदान करते हुए उन्होने तुर्की से लाए गए वर्टिकल इंक्युबेटर स्थापित किये हैं जो संभवता पूरे देश में यह पहला प्रयास है। उन्होने बताया कि ट्राउट हैचरी में किये गए बेहतर प्रयासों को चलते उन्हे वर्ष 2019 में बिलासपुर में आयोजित कार्यक्रम में बेस्ट हैचरी आवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। 

दिल्ली सहित पूरे उत्तरी भारत में है जसवाल ट्राउट मछली फॉर्म की पहुंच

संजीव व राजीव जसवाल का कहना है कि उनकी ट्राउट की पहुंच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित उत्तर के भारत के अनेक राज्यों जिसमें चंडीगढ़, पंजाब व उत्तराखंड तक है। वर्तमान में वे प्रतिवर्ष लाखों रूपये तक का ट्राउट का उत्पादन कर रहे हैं। इसके अलावा हैचरी से भी प्रतिवर्ष औसतन 3 से 4 लाख रूपये तक की आय भी प्राप्त हो रही है। इनका कहना है कि हैचरी से तैयार बीज जहां आसपास के किसान प्राप्त करते हैं तो वहीं उत्तराखंड राज्य में भी भेजा जाता है। उनकी ट्राउट उत्पादन का एक बड़ा भाग इसी क्षेत्र के आसपास बिक जाता है जबकि मांग होने पर इसे दूसरे राज्यों व बड़े शहरों को भी भेजा जाता है।

उत्तराखंड का मत्स्य विभाग भी कर रहा है शोध

जसवाल ट्राउट फॉर्म में उत्तराखंड राज्य का मत्स्य विभाग ठंडेप पानी पर ट्राउट मछली पर विशेष शोध कार्य भी कर रहा है। शोध कार्य के दौरान मछलियों के लिए खुराक, ट्रिपलोयड़ के साथ-साथ बीज का भी विशेष वितरण किया जाता है।

मछली पालन के लिए सरकार से टैंक निर्माण को मिली है आर्थिक मदद

उन्होने बताया कि ट्राउट मछली पालन के लिए सरकार से टैंक निर्माण को अनुदान भी मिला है। वर्ष 2003-04 के दौरान आठ टैंक का निर्माण किया गया है जिसके लिए प्रति टैंक 20 हजार रूपये बतौर अनुदान सरकार ने उपलब्ध करवाए हैं। मछली पालन के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने पर वर्ष 2014 में चौंतड़ा में आयोजित किसान मेले में उन्हे प्रगतिशील किसान अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है जिसमें उन्हे 10 हजार रूपये का नकद पुरस्कार मिला है।

ट्राउट मछली पालन में है स्वरोजगार की अपार संभावनाएं

संजीव व राजीव जसवाल का कहना है कि देश में बड़े पैमाने पर ट्राउट दूसरे देशों से यहां मंगवाई जाती है। यदि हमारे प्रदेश का शिक्षित युवा ट्राउट मछली पालन को स्वरोजगार के तौर पर अपनाता है तो इस क्षेत्र में आगे बढऩे की अपार संभावनाएं हैं। इनका कहना है कि कोरोना महामारी के चलते लगे लॉकडाउन के दौर में उन्हे कुछ समय के लिए जरूर दिक्कत का सामना करना पड़ा लेकिन अब पुन: धीरे-धीरे उनका यह काम आगे बढऩे लगा है। कोरोना महामारी के इस कठिन दौर में रोजगार खो चुके युवा यहां की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ट्राउट मछली पालन से जुडक़र न केवल घर बैठे स्वरोजगार के नए अवसर का सृजन कर सकते हैं बल्कि उनकी आर्थिकी को बल देने में भी यह क्षेत्र सक्षम है। 

क्या कहते हैं अधिकारी


निदेशक मात्स्यिकी विभाग हिमाचल प्रदेश एसपी मैहता का कहना है कि प्रदेश में 31 मार्च, 2020 तक ट्राउट मछली पालन से 592 मछुआरे जुड़े हुए हैं जो 1166 रेसवेज से 600 मीट्रिक टन ट्राउट का उत्पादन कर रहे हैं। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के सात जिलों चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, किन्नौर, सिरमौर तथा शिमला में ट्राउट मछली पालन किया जा रहा है। उन्होने बताया कि प्रधान मंत्री संपदा मत्स्य योजना के तहत सरकार ने प्रति इकाई अनुदान राशि को एक लाख रूपये तक बढ़ा दिया है जिससे अब किसानों को अनुदान के तौर अधिक धनराशि प्राप्त होगी। 

उन्होने बताया कि ट्राउट मछली पालन के क्षेत्र में तीन लाख रूपये तक की युनिट पर अब सामान्य परिवारों को 40 प्रतिशत की दर से 1.20 लाख जबकि महिला एवं अनुसूचित जाति व जनजाति परिवार को 60 प्रतिशत की दर  से 1.80 लाख रूपये तक का अनुदान टैंक निर्माण को प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त बीज, खुराक व परिवहन सहायता के तौर पर सामान्य परिवार को एक लाख रूपये जबकि महिला एवं एससी व एसटी परिवार को डेढ़ लाख रूपये तक का अनुदान जो अढ़ाई लाख प्रति युनिट के तहत दिया जा रहा है। साथ ही ट्राउट हैचरी निर्माण की प्रति इकाई 50 लाख रूपये की लागत के आधार पर सामान्य परिवार को 40 प्रतिशत की दर से अधिकत्तम 20 लाख जबकि महिला तथा एससी व एसटी परिवार को 60 प्रतिशत की दर से अधिकत्तम 30 लाख रूपये तक के सरकारी अनुदान का प्रावधान किया गया है जो पहले 25 लाख रूपये प्रति इकाई था। उन्होने बताया कि प्रधान मंत्री संपदा मत्स्य योजना के तहत प्रदेश से लगभग 60 करोड़ रूपये के प्रोजैक्टस को मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया था जिसमें से 40 करोड़ रूपये के प्रोजैक्टस को स्वीकृति प्राप्त हो गई है। 

Wednesday, 11 November 2020

चौंतड़ा के कपिल सूद ने सॉफटवेयर इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ अपनाया स्वरोजगार

गैस्ट हाऊस कम रेस्टोरेंट चलाने को मुख्य मंत्री स्वावलंबन योजना से मिली उड़ान

पेशे से सॉफटवेयर इंजीनियर, 15 वर्षों का लंबा कार्य अनुभव लेकिन बावजूद इसके घर वापिसी कर स्वरोजगार के माध्यम से आगे बढऩे की जिद्द। ऊपर से देश के बड़े-बड़े शहरों की चकाचौंध ही नहीं बल्कि लंदन व थाईलैंड इत्यादि देशों का आकर्षण भी स्वरोजगार के माध्यम से आगे बढऩे की ललक के आगे फीका। बस जुंबा पर एक ही लक्ष्य घर लौटकर कुछ ऐसा करने का जिससे वह न केवल अपने घर पर ही रहे बल्कि स्वरोजगार से जुडक़र आर्थिकी को एक नई दिशा व ऊर्जा भी मिले। आखिर 15 वर्षों की लंबी नौकरी छोडक़र स्वरोजगार को अपनाना कोई छोटी हिम्मत वाला कार्य नहीं है। लेकिन यदि आगे बढऩे के लिए हौंसले बुलंद हों तो इंसान बड़ी से बड़ी चुनौती को भी आसानी से पार पा लेता है।

इन्ही कुछ सपनों को लेकर मंडी जिला के जोगिन्दर नगर के चौगान (मचकेहड़) निवासी 41 वर्षीय कपिल सूद ने गैस्ट हाऊस कम रेस्टोरेंट खोलकर यह साबित कर दिया कि हिमाचल प्रदेश का युवा महज डिग्रीयां हासिल कर नौकरी के माध्यम से ही नहीं बल्कि स्वरोजगार अपनाकर भी आगे बढऩे में सक्षम है। लेकिन कपिल सूद के इस सपने को हकीकत बनाने में प्रदेश सरकार की मुख्य मंत्री स्वावलंबन योजना ने बड़ी भूृमिका अदा की है। इसी योजना का लाभ उठाकर आज कपिल सूद ने स्वरोजगार के माध्यम से आगे बढऩे को कदम बढ़ाए हैं।


जब इस बारे कपिल सूद से बातचीत की तो उनका कहना है कि मार्च 2018 में उन्होने घर वापिसी की तथा स्वरोजगार शुरू कर आगे बढऩे का निर्णय लिया। प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज कांगड़ा व मंड़ी जिला की बिलिंग व बरोट घाटी में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए विश्व प्रसिद्ध पैराग्लाईडिंग साइट्स बीड़-बिलिंग घाटी के समीप मचकेहड़ में बिलिंग विस्टा नाम से गेस्ट हाऊस कम रैस्टोरेंट खोलने का कार्य शुरू कर दिया। बीड़-बिलिंग में आने वाले देशी व विदेशी पर्यटकों को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिले इस दृष्टिकोण से गैस्ट हाऊस को विकसित करने का निर्णय लिया। लेकिन कपिल सूद के इस सपने को प्रदेश सरकार की मुख्य मंत्री स्वावलंबन योजना ने न केवल एक नई दिशा दी बल्कि वह वे सब करने में कामयाब हो पाए जिसे वह करना चाहते थे।

उन्होने बताया कि मुख्य मत्री स्वावलंबन योजना के माध्यम से उन्हे सरकार ने 21 लाख रूपये का ऋण स्वीकृत किया है। इसी आर्थिक मदद की बदौलत आज उनके गेस्ट हाऊस में सभी सुविधाओं से युक्त जहां 7 डीलक्स कमरे हैं तो वहीं 50 लोगों के लिए एक बड़ा डाइनिंग हॉल भी है। उनका कहना है कि उनके गैस्ट हाऊस से बिलिंग घाटी का आंखों को सुकून प्रदान करने वाला नयनाविभोर दृश्य पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है। साथ ही यहां का स्वच्छ, साफ एवं ठंडी हवा वाला वातावरण पर्यटकों को लंबे समय तक रूकने को मजबूर कर देता है। ऐसे में पर्यटकों को गेस्ट हाऊस में अच्छी सुविधाएं मिले इसका भी खास ख्याल रखा जाता है। इसके अलावा स्थानीय लोग भी जन्मदिन एवं सेवानिवृति की पार्टियां भी यहां करना पसंद करते हैं।


कपिल सूद का कहना है कि शुरूआती दौर में यहां अच्छा काम चला लेकिन कोरोना महामारी के दौर में जरूर कुछ समय के लिए विराम लगा लेकिन अब धीरे-धीरे उनका यह काम फिर से जोर पकडऩे लगा है। उन्होने अपने गैस्ट हाऊस में तीन अन्य स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्रदान किया है।

उन्होने मुख्य मंत्री स्वावलंबन योजना को शुरू करने के लिए मुख्य मंत्री जय राम ठाकुर का आभार जताते हुए कहा कि इस तरह की योजनाएं स्वरोजगार को गति प्रदान करने में अहम कड़ी साबित होती हैं। जहां तक हिमाचल प्रदेश की बात है तो यहां पर्यटन क्षेत्र में स्वरोजगार की बड़ी संभावना है जो प्रदेश के लाखों बेरोजगारों को रोजगार प्रदान कर सकती हैं। पर्यटन क्षेत्र के विकास में यदि सरकार मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करे तो यह हमारे प्रदेश की तकदीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होने प्रदेश के नौजवानों विशेष कर शिक्षित युवाओं से सरकार की इस योजना का लाभ उठाकर स्वरोजगार के माध्यम से आगे बढऩे का आहवान् किया है।

क्या कहते हैं अधिकारी:

जब इस बारे महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र मंडी ओपी जरयाल से बातचीत की तो उनका कहना है कि मुख्य मंत्री स्वावलंबन योजना के माध्यम से अकेले जिला मंडी में ही अब तक 298 मामलों को स्वीकृति प्रदान कर बैंकों के माध्यम से 60.74 करोड़ रूपये का ऋण उपलब्ध करवाया है तथा इससे 1104 लोगों को संभावित रोजगार सुनिश्चित होगा। जबकि 128 मामलों में सरकार की ओर से 6.55 करोड़ रूपये का अनुदान लाभार्थियों को मुहैया करवा दिया गया है।

उन्होने बताया कि इस योजना के माध्यम 18-45 वर्षं के पुरूषों को सरकार 40 लाख रूपये के निवेश पर 25 प्रतिशत जबकि महिलाओं को 30 प्रतिशत अनुदान प्रदान कर रही है। जबकि विधवा महिलाओं को 35 प्रतिशत की दर से यह अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा स्वीकृत ऋण पर 3 वर्ष तक ब्याज में पांच फीसदी की प्रतिपूर्ति तथा बैकों की सीजीटीएमएसई के तहत प्रोसैसिंग फीस का भुगतान भी सरकार कर रही है।