Himdhaara Search This Blog

Wednesday, 4 March 2020

मशरूम खेती से जुडक़र छत्र गांव के कशमीर सिंह आगे बढ़ा रहे हैं आजीविका

हिमाचल खुम्ब विकास योजना के तहत प्रदेश सरकार आर्थिक तौर पर कर रही है किसानों की मदद
जोगिन्दर नगर उप-मंडल के अंतर्गत ग्राम पंचायत मसौली के तहत गांव छत्र के 65 वर्षीय किसान कशमीर सिंह मशरूम की खेती से जुडक़र अपनी आजीविका को आगे बढ़ाने में कार्यरत हैं। बीपीएल परिवार में शामिल कशमीर सिंह दिहाड़ी मजदूरी करने के साथ-साथ पारंपरिक खेती-बाड़ी के माध्यम से अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मशरूम की खेती से जुडक़र वे अपनी आजीविका को आगे बढ़ावा देने में प्रयासरत हैं।
जब इस संबंध में किसान कशमीर सिंह से बातचीत की तो उनका कहना है कि पारंपरिक खेती-बाड़ी के साथ-साथ वे मेलों इत्यादि में घर में ही तैयार की जाने वाली आइसक्रीम को बेचकर अपनी आजीविका को चलाने का प्रयास करते हैं। लेकिन वर्ष 1990-91 के दौरान उन्होने मशरूम उत्पादन से जुडक़र आजीविका को बढ़ावा देने का प्रयास किया तथा इस दिशा में कुछ हद तक वे कामयाब भी हुए हैं। उनका कहना है कि घर के ही एक कमरे में वे मौसमी तौर पर मशरूम का उत्पादन करते हैं। मौसमी मशरूम का उत्पादन तीन से चार माह तक ही चलता है इस दौरान वे लगभग 18 से 20 हजार रूपये तक की अतिरिक्त आमदनी कमा लेते हैं।
बुढ़ापे की दहलीज पर खड़े कशमीर सिंह का कहना है कि मंहगाई भरे इस दौर में 6 सदस्यों वाले परिवार का भरण पोषण करना किसी चुनौती से कम नहीं है, बावजूद इसके उन्होने सोलन से एक सप्ताह का मशरूम खेती को लेकर प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा घर के एक कमरे में ही इसका उत्पादन शुरू कर दिया। उन्होने बताया कि वर्तमान में उन्होने 75 बैग मशरूम के लाए हैं जिनमें से प्रत्येक बैग से औसतन तीन से पांच किलोग्राम तक का उत्पादन हो जाता है। मार्केटिंग पर जानना चाहा तो वे कहते हैं कि वे स्वयं ही थैला भरकर मशरूम के पैकेट को जोगिन्दर नगर शहर व आसपास के गांवों में बेचते हैं तथा 100 से 125 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से दाम प्राप्त हो जाते हैं। उनका कहना है कि वे इस इकाई को बड़ी इकाई में परिवर्तित करना चाहते हैं लेकिन जमीन के साथ-साथ आर्थिक संसाधनों की कमी आड़े आ रही है।
जब सरकार की अन्य योजनाओं बारे जानना चाहा तो उनका कहना है कि उन्हे सरकार की ओर से प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी प्राप्त हो रही है। इसके अलावा मकान बनाने के लिए मामला संबंधित विभाग को भी प्रस्तुत किया है ताकि बढ़ते परिवार की जरूरतों को भी पूरा किया जा सके।
क्या कहते हैं अधिकारी
उद्यान विकास अधिकारी चौंतड़ा नवीन कुमार का कहना है कि हिमाचल खुम्ब विकास योजना के तहत सरकार जहां बड़ा मशरूम घर बनाने को 50 हजार रूपये तो वहीं छोटा मशरूम शैड बनाने को 25 हजार रूपये तक की आर्थिक मदद प्रदान कर रही है। साथ ही मशरूम प्रोडक्शन युनिट स्थापना को कुल लागत का 40 प्रतिशत यानि की आठ लाख रूपये तक की भी आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके अलावा पांच दिन तक के प्रशिक्षण हेतु एक हजार रूपये प्रतिदिन प्रति किसान तथा देश के अंदर एक्सपोजर विजिट पर जाने वाले किसानों का सारा खर्चा भी सरकार वहन करती है। साथ ही खाद तथा स्पॉन बनाने की इकाई स्थापना को लेकर भी सरकार कुल लागत का 40 प्रतिशत प्रदान कर रही है। उन्होने किसानों विशेषकर शिक्षित बेरोजगार युवाओं से सरकार की हिमाचल खुम्ब विकास योजना का लाभ उठाकर स्वरोजगार के माध्यम से स्वावलंबी बनने का आहवान किया है।




Thursday, 20 February 2020

मुख्य मंत्री रोशनी योजना के तहत चौंतड़ा के रवि कुमार,विशन दास व लाल सिंह के घर हुए रोशन

मुख्य मंत्री रोशनी योजना के अंतर्गत सरकार पात्र परिवारों को दे रही है  बिजली कनेक्शन सुविधा
मंडी जिला के जोगिन्दर नगर विधानसभा क्षेत्र के चौंतड़ा विकास खंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत बदेहड़ के बदेहड़ निवासी प्रीतम चंद, ग्राम पंचायत तलकेहड़ निवासी राज कुमार, ग्राम पंचायत सगनेहड़ निवासी रवि कुमार, ढेलु पंचायत निवासी विशन दास, लाल सिंह, सैंथल निवासी राम लाल इत्यादि के घरों में प्रदेश सरकार की मुख्य मंत्री रोशनी योजना उजाला लेकर आई है। इस योजना के माध्यम से न केवल इन परिवारों के घरों में बिजली का उजाला हुआ है बल्कि मुफत में बिजली का कनेक्शन पाकर ये परिवार बेहद खुश भी हैं।
जब इस बारे चौंतड़ा विकास खंड की ग्राम पंचायत ढेलु निवासी लाल सिंह से बातचीत की तो उनका कहना है कि प्रदेश सरकार ने उनके जैसे बीपीएल परिवारों के लिए मुफत में बिजली का कनेक्शन प्रदान कर मंहगाई के इस दौर में बड़ी राहत प्रदान की है। बीमारी के कारण 75 प्रतिशत तक अक्षम हो चुके 60 वर्षीय लाल सिंह का कहना है कि मुख्य मंत्री रोशनी योजना के तहत आज उनके घर में ही नहीं बल्कि जिंदगी में भी उजाला हुआ है जिसके लिए वे मुख्य मंत्री जय राम ठाकुर व प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हैं। उन्होने बताया कि दिव्यांगता के चलते वे बिस्तर पर पड़े-पड़े टीवी देखते रहते हैं। जब टीवी के माध्यम से सरकार की इस योजना का पता चला तो उन्होने अपने नजदीकी बिजली बोर्ड कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा कर दिया तथा दिसम्बर, 2019 में उनके घर बिना एक रूपया चुकाये बिजली का कनेक्शन लग गया है। जब इसी बारे इसी गांव के विशन दास के परिजनों से बातचीत की तो उनका भी कहना है कि सरकार की इस तरह की ये योजनाएं उनके जैसे गरीब परिवारों के लिए फायदेमंद साबित होती है। सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से आज प्रदेश में उनके जैसे लाखों गरीब परिवारों के घरों में बिना एक रूपया खर्च किये बिजली का मीटर लगने से उजाला होने जा रहा है।
बिजली का नया कनेक्शन प्राप्त करने के लिए उपभोक्ता को औसतन तीन से चार हजार रूपये तक का खर्च वहन करना पड़ता है। ऐसे में हिमाचल सरकार मुख्य मंत्री रोशनी योजना के माध्यम से प्रदेश के हजारों बीपीएल परिवारों को मुफत में बिजली कनेक्शन प्रदान कर लाभान्वित कर रही है।
क्या है मुख्य मंत्री रोशनी योजना:
हिमाचल सरकार ने वित्तीय बजट 2019-20 में प्रदेश के गरीब परिवारों को मुफत में बिजली कनेक्शन उपलब्ध करवाने के लिए इस योजना की घोषणा की थी। जिसके तहत पूरे प्रदेश भर में 17 हजार 550 गरीब पात्र परिवारों को मुफत में बिजली कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए चालू वित्त वर्ष के लिए बजट में 13 करोड़ 16 लाख रूपये का भी प्रावधान किया है। मंडी जिला की बात करें तो इस योजना के माध्यम से 1.20 करोड़ रूपये व्यय कर 1600 पात्र परिवारों को मुफत में बिजली कनेक्शन की सुविधा दी जानी है। 
क्या हैं पात्रता की शर्तें:
इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए सरकार ने कुछ शर्तें निर्धारित की हैं जिन में से किसी एक का होना अनिवार्य है। जिनमें सभी स्त्रोतों से परिवार की वार्षिक आय 35 हजार रूपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। घर का बिजली लोड दो किलोवाट से कम होना चाहिए। परिवार का चयन बीपीएल परिवारों की सूची में होना चाहिए। परिवार अंत्योदय अन्न योजना के तहत आना चाहिए तथा परिवार का चयन प्राथमिकता वाले परिवार की सूची में शामिल हो।
क्या कहते हैं अधिकारी:
वरिष्ठ अधिशाषी अभियन्ता विद्युत मंडल जोगिन्दर नगर अनिल शर्मा का कहना है कि मुख्य मंत्री रोशनी योजना के तहत जोगिन्दर नगर मंडल के सभी सातों विद्युत उप-मंडलों में भी पात्र परिवारों को फ्री में बिजली कनेक्शन लगाए जा रहे हैं। उन्होने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में अकेले जोगिन्दर नगर विद्युत मंडल में ही 26.25 लाख रूपये व्यय कर कुल 350 पात्र परिवारों को फ्री में विद्युत कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होने अधिक से अधिक पात्र परिवारों से इस योजना का लाभ उठाने का आग्रह किया है। 


Thursday, 6 February 2020

पीएमजीएसवाई के तहत जोगिन्दर विस क्षेत्र को 98 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत


गत पांच वर्षों में सडक़ सुविधाओं से जुड़े कई गांवो, बेहतर व आसान हुआ आवागमन
जोगिन्दर नगर विधान सभा क्षेत्र में गत पांच वर्षों के दौरान प्रधान मंत्री ग्राम सडक़ योजना (पीएमजीएसवाई) के माध्यम से लगभग 98 करोड़ रूपये की विभिन्न सडक़ परियोजनाओं को स्वीकृति प्राप्त हुई है। जोगिन्दर नगर क्षेत्र में इन विभिन्न सडक़ परियोजनाओं के कारण जहां कई गांवों सडक़ सुविधाओं से जुड़े हैं तो वहीं लोगों का आवागमन पहले से बेहतर व आसान भी हुआ है। सडक़ें किसी भी क्षेत्र के विकास का मूल आधार होती हैं। गांवों में सडक़ उपलब्ध होने से लोगों को आवागमन की सुविधा तो होती ही है बल्कि इससे क्षेत्र की आर्थिकी को भी बल मिलता है। सडक़ सुविधा का सबसे बड़ा लाभ किसान को होता है। किसान द्वारा तैयार नकदी फसलों, दूध इत्यादि को बाजार तक ले जाने में सुगमता होती है तथा इससे समय की भी बचत होती है।
जोगिन्दर नगर विस क्षेत्र की बात करें तो गत पांच वर्षों के दौरान पीएमजीएसवाई के तहत लगभग 98 करोड़ रूपये की कुल 23 सडक़ परियोजनाओं को स्वीकृति प्राप्त हुई है जिनमें से कई परियोजनाओं का कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है। वर्ष 2016-17 के दौरान कुल 9 सडक़ परियोजनाएं जिनमें अढ़ाई करोड़ रूपये की ढ़ेलु हार-टिकरू सडक़, सवा दो करोड़ रूपये की घट्टा-बाग सडक़ चरण-दो, अढ़ाई करोड़ की नौहली ऊपरली से अंदरालू ऊपरला चरण-दो, पौने दो करोड़ रूपये की बलोटू-गवैला सडक़, दो करोड़ रूपये की सांडा-माकनवाल सडक़, अढ़ाई करोड़ की गियुणी-परैण सडक़, साढ़े तीन करोड़ रूपये की भरड़ौण-गंगोटी सडक़, साढ़े पंाच करोड़ रूपये की मच्छयाल-बटाड़ी ब्यूंह सडक़ का सुधारीकरण तथा लगभग पौने दो करोड़ रूपये की कुंडुनी-भलयांदरा सडक़ शामिल है। इनमें कुंडुनी-भलयांदरा सडक़ को छोडक़र बाकी का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है।
इसी तरह वर्ष 2017-18 के दौरान कुल 11 सडक़ परियोजनाओं को स्वीकृति प्राप्त हुई है जिनमें अढ़ाई करोड़ रूपये की खद्दर-बडान सडक़, डेढ़ करोड़ रूपये की गदयाड़ा-ठारा सडक़ का सुधारीकरण, पौने सात करोड़ रूपये की गलू-भटवाड़ सडक़, सवा 12 करोड़ रूपये की भराडू-बनाडू डोम सडक़, लगभग अढ़ाई करोड़ रूपये की कस-पथोलू सडक़ का सुधारीकरण, लगभग सवा चार करोड़ रूपये की गुम्मा-खारसा सडक़, सवा एक करोड़ रूपये की शानन-आरठी सडक़, एक करोड़ रूपये की पेटू नाला से गडूही सडक़, अढ़ाई करोड़ रूपये की बालकरूपी-दारट बगला सडक़, 57 लाख रूपये की चौंतड़ा से टिकरी मुशैहरा सडक़ का सुधारीकरण तथा पौने पांच करोड़ रूपये की द्रुबल-बनवाड़ सडक़ का कार्य शामिल है।
वर्ष 2018-19 की बात करें तो इस क्षेत्र को कुल 8 सडक़ परियोजनाओं को मंजूरी प्राप्त हुई जिनमें एक करोड़ रूपये की चल्हाणू-सौं सडक़, लगभग सात करोड़ रूपयेे की बडौन-पीपली सडक़, लगभग अढ़ाई करोड़ रूपये की चक्का-झमेहड़ सडक़, पौने दो करोड़ रूपये की भडयाड़ा-धनयातर सडक़, डेढ़ करोड़ रूपये की भटेड़-त्रामट सडक़, 88 लाख रूपये की चौंतड़ा-पस्सल सडक़ का सुधारीकरण तथा एक करोड़ रूपये की मकरीड़ी-खिल्ल-छतरी व सवा दो करोड़ रूपये की सुजा-भजराला सडक़ का निर्माण कार्य शामिल है।
क्या कहते हैं सांसद:
मंडी लोकसभा क्षेत्र से सांसद राम स्वरूप शर्मा का कहना है कि प्रधान मंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत अकेले जोगिन्दर नगर विस क्षेत्र को गत पांच वर्षों के दौरान लगभग 98 करोड़ रूपये की सडक़ परियोजनाओं को मंजूर करवाया है। उन्होने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में लगभग 16 करोड़ रूपये की दो नई सडक़ परियोजनाओं को स्वीकृति प्राप्त हुई है जिनमें लगभग 13 करोड़ रूपये की ढेलू-भटेहड़ तथा तीन करोड़ रूपये की आहजू-सूजा सडक़ शामिल है। उन्होने कहा कि सभी औपचारिकताएं पूर्ण होते ही इनका भी निर्माण कार्य जल्द प्रारंभ होगा। इसके अतिरिक्त जोगिन्दर नगर-सरकाघाट-घुमारवीं मुख्य सडक़ पर मच्छयाल में लगभग साढ़े पांच करोड़ रूपये की लागत से 40 मीटर स्पैन पुल का निर्माण कार्य भी जारी है।
क्या कहते हैं विधायक:
जोगिन्दर नगर के विधायक प्रकाश राणा का कहना है कि मुख्य मंत्री जय राम ठाकुर के आशीर्वाद तथा सांसद राम स्वरूप शर्मा के सहयोग से इस क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं रखी जा रही है। उनका कहना है कि चालू वित्तीय वर्ष के दौरान सरकार ने जोगिन्दर नगर विस क्षेत्र की लगभग 35 कि.मी. सडक़ों के रखरखाव को लगभग पांच करोड़ रूपये स्वीकृत किये हैं। इसके अलावा लगभग साढ़े 15 कि.मी. अतिरिक्त सडक़ों के रखरखाव को लगभग पौने दो करोड़ रूपये से अधिक की धनराशि भी जारी की है। साथ ही कहा कि नाबार्ड के माध्यम से जोगिन्दर नगर विस क्षेत्र को 22 करोड़ रूपये की लागत वाली पांच सडक़ परियोजनाओं को भी स्वीकृति प्राप्त हुई है।


Thursday, 30 January 2020

अपने खेतों में सर्पगंधा की खेती अपनाएं, 18 माह में ही करें चोखी कमाई


तीन वर्ष में प्रति एकड़ अढ़ाई लाख रूपये तक की हो सकती है आय, सरकार दे रही है वित्तीय मदद
हिमाचल प्रदेश के भौगोलिक दृष्टि से निचले क्षेत्रों में रहने वाले किसान अपने खेतों में बेशकीमती सर्पगंधा की खेती अपनाकर महज 18 माह में ही प्रति एकड़ अढ़ाई लाख रूपये तक की आय अर्जित कर सकते हैं। जलवायु की दृष्टि से हिमाचल प्रदेश के समुद्रतल से 1800 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सर्पगंधा की औषधीय खेती को किसानों द्वारा आसानी से किया जा सकता है। खास बात यह है कि सर्पगंधा के पौधों की नर्सरी प्रदेश में ही तैयार की गई है तथा किसान सर्पगंधा की खेती से जुडऩे के लिए प्रदेश में ही सर्पगंधा के पौधे भी प्राप्त कर सकते हैं।
जड़ के रूप में प्रदेश की जलवायु के आधार पर यह पौधा निचले हिमाचल प्रदेश में आसानी से उगाया जा सकता है। एक से सवा एक किलोग्राम बीज प्रति एकड़ भूमि के लिए पर्याप्त होता है। इसकी रोपाई छायादार क्षेत्रों में मार्च-अप्रैल व खुली धूप वाले क्षेत्रों के लिए जुलाई-अक्तूबर माह के दौरान की जा सकती है। इस पौधे को 40-40 सेंटीमीटर की दूरी पर प्रत्यारोपित किया जा सकता है। सर्पगंधा की फसल बीज के माध्यम से 3 से 4 वर्ष और कलम के माध्यम से 2 से 3 वर्ष में तैयार हो जाती है। प्रति एकड़ इसकी उपज 300 किलोग्राम तक रहती है तथा नौ सौ रूपये प्रति किलोग्राम की दर से 2 लाख 70 हजार रूपये तक की आय अर्जित की जा सकती है।
क्या है सर्पगंधा औषधि
सर्पगंधा एक अत्यंत उपयोगी पौधा है जो 75 सेंटीमीटर से लेकर एक मीटर तक की ऊंचाई तक बढ़ता है। इसकी जड़ें 0.5 सेंटीमीटर से 2.5 सेंटीमीटर व्यास तक जबकि इसकी गहराई 40 से 60 सेंटीमीटर तक जमीन में जाती है। सर्पगंधा पर अप्रैल से नवम्बर माह तक लाल सफेद फूल गुच्छों में लगते हैं। इसके अलावा इसकी जड़ों में भी अनेक एल्कलाइड्स पाए जाते हैं जिनका उपयोग विभिन्न बीमारियों के उपचार में किया जाता है।
सर्पगंधा की खेती व फसल प्रबंधन
सर्पगंधा की खेती के लिए मई माह के दौरान खेत की गहरी जुताई कर लें तथा खेत को कुछ समय के लिए खाली छोड़ दें। इसके बाद पहली वर्षा होने पर खेत की जुताई करें तथा नाप की क्यारियां व पानी देने के लिए नालियां बना लें। सर्पगंधा को बीज, जड़ या कटिंग के माध्यम से उगाया जा सकता है। साथ ही करीब 25 टन कम्पोस्ट खाद प्रति हेक्टेयर से अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है तथा वर्षा के दौरान कम पानी एवं गर्मियों में 30 दिन के अंतर से पानी लगाना चाहिए।
सर्पगंधा की फसल 18 माह में तैयार हो जाती है। इसकी जड़ों को सावधानी पूर्वक खोदकर निकालें तथा बड़ी व मोटी जड़ों को अलग और पतली जड़ों को अलग-अलग कर लें। इसके उपरान्त 12 से 15 सेंटीमीटर के टुकड़े काटकर सुखा लें और इन्हे पॉलिथीन की थैलियों में सुरक्षित रख लें। सर्पगंधा की बढ़ती मांग को देखते हुए नेशनल मेडिसनल प्लांट बोर्ड की ओर से इसके कृषिकरण पर बल दिया जा रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
क्षेत्रीय निदेशक, क्षेत्रीय एवं सुगमता केंद्र उत्तर भारत स्थित जोगिन्दर नगर डॉ. अरूण चंदन का कहना है कि सरकार राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के अंतर्गत राज्य औषधीय पादप बोर्ड के माध्यम से सर्पगंधा की खेती को प्रति हैक्टेयर 49 हजार 724 रूपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है जो अधिकत्तम 20 हैक्टेयर के हिसाब से लगभग 9.94 लाख रूपये तक हो सकती है। उन्होने जलवायु की दृष्टि से हिमाचल प्रदेश के निचले क्षेत्रों के किसानों से व्यक्तिगत या सामूहिक तौर पर सर्पगंधा की औषधीय खेती अपनाने का आह्वान किया है ताकि उनकी आय का एक अतिरिक्त साधन सृजित किया जा सके। उन्होने कहा कि सर्पगंधा के पौधों की नर्सरी प्रदेश में ही तैयार की गई है तथा किसान सर्पगंधा की खेती से जुडऩे के लिए प्रदेश में ही सर्पगंधा के पौधे प्राप्त कर सकते हैं।
इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए किसान अपने जिला के जिला आयुर्वेदिक अधिकारी या राज्य औषधीय पादप बोर्ड शिमला के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय एवं सुगमता केंद्र जोगिन्दर नगर या आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (आईएसएम) जोगिन्दर नगर जिला मंडी के कार्यालयों से भी संपर्क किया जा सकता है।
इसके अलावा वैबसाइट www.ayurveda.hp.gov.in से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।




Tuesday, 28 January 2020

जोगिन्दर नगर में गृह अनुदान योजना के तहत 50 लाख व्यय कर 38 परिवार हुए लाभान्वित

गृह अनुदान योजना के तहत मकान बनाने को सरकार देती है 1.30 लाख रूपये

जिला मंडी के जोगिन्दर नगर विधानसभा क्षेत्र के गांव गरोडू के जोगिन्द्र सिंह, ग्राम पंचायत तलकेहड़ के सतैण गांव निवासी गिल्ली देवी, ग्राम पंचायत सगनेहड़ के गांव त्रामट निवासी संतोष कुमार, इसी गांव के ही रोशन लाल, ग्राम पंचायत कोलंग के सपड़ोह निवासी दुनी चंद, ऊटपर पंचायत निवासी थोगली राम, दलेड़ पंचायत के धधौन निवासी काचरा, गौरा निवासी जय राम सभी अनुसूचित जाति परिवार जबकि अनुसूचित जनजाति परिवार से संबंधित ग्राम पंचायत बदेहड़ के गांव बदेहड़ निवासी रोशन लाल सुपुत्र जोंडा राम जैसे कई नाम हैं जिनके लिए सरकार की गृह अनुदान योजना इस मंहगाई भरे दौर में मकान बनाने में किसी लाटरी से कम साबित नहीं हो रही है। 
प्रदेश में अनुसूचित जाति, अन्य पिछडा वर्ग व अल्पसंख्यक मामलों के विभाग के माध्यम से चलाई जा रही गृह अनुदान योजना के तहत न केवल प्रदेश के गरीब, जरुरतमंद व मकान विहीन लोग लाभान्वित हो रहे हैं, बल्कि स्वयं का मकान पाकर समाज में अपनी मान मर्यादा व प्रतिष्ठा को भी स्थापित कर पा रहे हैं। जोगिन्दर नगर तहसील में ही ऐसे तीन दर्जन से अधिक जरुरत मंद परिवारों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है।
जोगिन्दर नगर विधानसभा क्षेत्र की जोगिन्दर नगर व लडभड़ोल तहसीलों में गृह अनुदान योजना के तहत गत तीन वर्षों के दौरान लगभग 50 लाख रूपये का अनुदान प्रदान कर 38 परिवारों को लाभान्वित किया गया है। जिनमें वर्ष 2017-18 के दौरान कुल नौ परिवार जिसमें अनुसूचित जाति के आठ तथा अन्य पिछड़ा वर्ग का एक, वर्ष 2018-19 के दौरान कुल 16 परिवार जिसमें एससी के 12, एसटी का एक तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के तीन परिवार शामिल हैं को लाभान्वित किया जा चुका है। इसी तरह चालू वित्तीय वर्ष के दौरान कुल 13 परिवारों को मकान बनाने की स्वीकृति प्राप्त हुई है जिनमें अनुसूचित जाति के 12 तथा अन्य पिछड़ा वर्ग का एक परिवार शामिल है। इसके अलावा अनुसूचित जनजाति के एक परिवार को मकान की मरम्मत को भी सरकार ने 25 हजार रूपये की धनराशि प्रदान करने को स्वीकृति प्रदान की है।
किन्हे मिलती है सहायता:
गृह अनुदान योजना के तहत अनुसूचित जाति/जनजाति तथा अन्य पिछडा वर्ग परिवारों के सदस्य, जिनकी वार्षिक आय समस्त साधनों से 35 हजार रुपये से अधिक न हो, जिनके नाम राजस्व रिकार्ड में मकान बनाने हेतु भूमि उपलब्ध हो तथा जिनके पास अपना मकान न हो तो सरकार ऐसे जरुरतमंद लोगों को मकान बनाने हेतू दो किस्तों में कुल एक लाख 30 हजार रुपये की अनुदान राशि मुहैया करवाती है। प्रदेश सरकार ने मंत्रीमंडल की बैठक में मकान बनाने की राशि को बढ़ाकर डेढ़ लाख जबकि रिपेयर को 25 हजार से बढ़ाकर 35 हजार रूपये करने का निर्णय लिया है।
कैसे करें आवेदन:
इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र व्यक्ति निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन पत्र के साथ वार्षिक आय का प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, हिमाचली प्रमाण पत्र जो कार्यकारी दण्डाधिकारी से जारी किया गया हो तथा जिस भूमि पर मकान बनाना प्रस्तावित है की जमाबंदी नकल व ततीमा भी प्रस्तुत करना अनिवार्य है। इसके अलावा मकान बनाने को ग्राम सभा द्वारा पारित प्रस्ताव की कापी भी साथ संलग्न करना जरूरी है। इस योजना के अंतर्गत अब सामान्य परिवारों के दिव्यांगजन, विधवा, परित्यक्ता व 45 वर्ष आयु वर्ग से अधिक उम्र की एकल नारी को भी शामिल किया गया है।
किसे सम्पर्क करें:
इस योजना का लाभ प्राप्त करने तथा अधिक जानकारी हासिल करने के लिए पात्र व्यक्ति या परिवार अपने क्षेत्र के तहसील कल्याण अधिकारी या जिला कल्याण अधिकारी के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी:
इस संबंध में तहसील कल्याण अधिकारी, जोगिन्दर नगर व लडभड़ोल चंदन वीर सिंह का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए गृह अनुदान योजना के अंतर्गत जोगिन्दर नगर तहसील क्षेत्र को कुल आठ मकान स्वीकृत किये हैं जिनमें से सात अनुसूचित जाति जबकि एक अन्य पिछड़ा वर्ग परिवार के लिए है। इसके अलावा अनुसूचित जनजाति परिवार के एक व्यक्ति के मकान रिपेयर हेतु भी 25 हजार रूपये की राशि स्वीकृत की है। इसी तरह लडभड़ोल तहसील के तहत एससी परिवारों के लिए कुल पांच मकान बनाने को स्वीकृति प्राप्त हुई है।

Friday, 27 December 2019

अश्वगंधा की खेती अपनाएं, घर में खुशहाली लाएं

मात्र 5-6 माह में ही प्रति एकड़ आठ से 12 हजार रूपये की करें कमाई
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर, बिलासपुर, ऊना, मंडी, कांगड़ा, सोलन, हमीरपुर व कुल्लू जिला के किसान अश्वगंधा की औषधीय खेती से जुडक़र अपनी आर्थिकी को मजबूती प्रदान कर सकते हैं। जलवायु की दृष्टि से हिमाचल प्रदेश के निचले क्षेत्र अश्वगंधा की खेती के लिए उपयुक्त है तथा किसान थोड़ी सी मेहनत कर अश्वगंधा के माध्यम से अपनी आर्थिकी को बल प्रदान कर सकते हैं।
अश्वगंधा की खेती समुद्रतल से 14 सौ मीटर से नीचे वाले क्षेत्रों में की जा सकती है। जड़ के रूप में यह पौधा हिमाचल प्रदेश के आठ जिलों बिलासपुर, ऊना, मंडी, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर, हमीरपुर व कुल्लू में आसानी से उगाया जा सकता है। 7-8 किलोग्राम बीज प्रति हैक्टेयर के लिए पर्याप्त होता है तथा इसकी रोपाई जून-जुलाई नर्सरी के दो महीने बाद की जा सकती है तथा पौधों को 4-6 इंच की दूरी पर प्रत्यारोपित किया जाता है। अश्वगंधा की फसल मात्र 5-6 महीने में ही तैयार हो जाती है। प्रति एकड़ इसकी उपज 250 से 300 किलोग्राम तक रहती है तथा प्रति एकड़ किसान आठ से 12 हजार रूपये के बीच में शुद्ध आय अर्जित कर सकता है।
क्या है अश्वगंधा
अश्वगंधा एक झाड़ीदार रोमयुक्त पौधा है, जो एक से चार फुट ऊंचा तथा बहुशाखीय होता है। इसकी शाखाएं गोलाकार रूप में चारों ओर फैली रहती है। इसका डंठल बहुत ही छोटा जबकि फल शाखाओं के अग्र भाग में खिलते हैं तथा फल छोटे-छोटे गोल मटर के फल के समान पहले हरे, फिर लाल रंग के हो जाते हैं। यह बहुवर्षीय पौधा पौष्टिक जड़ों से युक्त है। अश्वगंधा के बीज, फल व छाल का विभिन्न रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है तथा सूख जाने पर अश्वगंधा की गंध कम हो जाती है।
अश्वगंधा की जड़ में होते हैं कई एल्केलाइड्स
अश्वगंधा की जड़ में कई एल्केलाइड्स पाए जाते हैं। इनमें कुस्कोहाइग्रीन, एनाहाइग्रीन, ट्रोपीन, स्टुडोट्रोपीन, ऐनाफेरीन, आईसोपेलीन, टोरीन और तीन प्रकार के ट्रोपिलीटग्लोएट शामिल है तथा इनकी मात्रा 0.13 से 0.31 प्रतिशत तक होती है। इसके अलावा जड़ में स्टार्च, शर्करा, ग्लाइकोमाइड्स-हेट्रियाकाल्टेन, अलसिटॉल व विदनाल, तने में प्रोटीन तथा बहुत से अमीनो अम्ल भी पाए जाते हैं। इसमें रेशा बहुत कम तथा कैल्शियम व फॅास्फोरस भी प्रचुर मात्रा होती है। इसके अलावा अश्वगंधा के फलों में प्रोटीनों को पचाने वाला एन्जाइम कैमेस भी पाया जाता है।
बड़ी बलवर्धक है अश्वगंधा
अश्वगंधा कशकाय रोगियों, सूखा रोग से ग्रस्त बच्चों व व्याधि उपरांत कमजोरी में, शारीरिक व मानसिक थकान में पुष्टिकारक बलवर्धक के नाते प्रयोग होती है। कुपोषण, बुढ़ापे व मांसपेशियों की कमजोरी और थकान जैसे रोगों में अश्वगंधा का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लगातार सेवन करने से शरीर के सारे विकार बाहर निकल जाते हैं। अश्वगंधा को आयुर्वेद में पुरातन काल से ही वीर्यवर्धक, शरीर में ओज और कांति लाने वाले, परम पौष्टिक व सर्वांग शक्ति देने वाली, क्षय रोगनाशक, रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने वाली तथा वृद्धावस्था को दूर रखने वाली सर्वोत्तम वनौषधि माना है।
क्या कहते हैं अधिकारी
क्षेत्रीय निदेशक, क्षेत्रीय एवं सुगमता केंद्र उत्तर भारत, जोगिन्दर नगर डॉ. अरूण चंदन का कहना है कि सरकार राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के अंतर्गत राज्य औषधीय पादप बोर्ड के माध्यम से अश्वगंधा की खेती को प्रति हैक्टेयर लगभग 11 हजार रूपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। उन्होने हिमाचल प्रदेश के निचले क्षेत्रों में रहने वाले किसानों से व्यक्तिगत या सामूहिक तौर पर अश्वगंधा की औषधीय खेती अपनाने का आह्वान किया है ताकि आय का एक नया साधन सृजित कर उनकी आर्थिकी को मजबूती प्रदान की जा सके।
इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए अपने जिला के जिला आयुर्वेदिक अधिकारी या राज्य औषधीय पादप बोर्ड शिमला के कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय एवं सुगमता केंद्र जोगिन्दर नगर या आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (आईएसएम) जोगिन्दर नगर जिला मंडी के कार्यालयों से भी संपर्क कर सकते हैं।
इसके अलावा वैबसाइट www.ayurveda.hp.gov.in से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।


Thursday, 12 December 2019

मुख्य मंत्री कन्या दान योजना के अंतर्गत बेटी की शादी पर सरकार दे रही है 51 हजार

चौंतड़ा ब्लॉक में गत वर्ष 16 बेटियों को मिले 6.40 लाख रूपये, इस बर्ष 22 नये मामले स्वीकृत
घर में कमाने वाला पुरूष न हो या फिर कमाने में असमर्थ हो, ऊपर से गरीबी का आलम तो ऐसे में बेटी के हाथ कैसे पीले हों, इस बात की चिंता तो केवल एक मां ही समझ सकती है। ऊपर से आज के इस मंहगाई भरे दौर में बेटी की शादी करना मानो किसी बड़ी चुनौती को पार करने जैसा है। लेकिन इस घड़ी में यदि कोई अपना महज सहारा बनकर ही सामने खड़ा हो जाए तो माने बहुत सारी समस्याओं का अंत स्वयं ही हो जाता है। ऐसी ही मुश्किल भरी घड़ी में हिमाचल प्रदेश सरकार की मुख्य मंत्री कन्यादान योजना आज कई गरीब परिवारों की बेटी की शादी में सहारा बनकर खड़ी हुई है।
ऐसे में मंडी जिला के विकास खंड चौंतड़ा की बात करें तो कंचन सुपुत्री कांता देवी गांव भटेड, राजकुमारी सुपुत्री सरोजनी देवी गांव कफलौण (गंगोटी), विशाली सुुपुत्री सुधा देवी गांव सारली (डोह), सपना देवी सुपुत्री शीला देवी गांव सूजा (मटरू) जैसी अनेक बेटियां है जिनके लिए प्रदेश सरकार की मुख्य मंत्री कन्या दान योजना शादी में सहारा बनकर खड़ी हुई है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश सरकार गरीब परिवार की बेटी की शादी पर 51 हजार रूपये बतौर शगुन देती है। पहले इस योजना के तहत सरकार 40 हजार रूपये की आर्थिक मदद करती थी लेकिन इसे अब बढ़ाकर 51 हजार रूपये कर दिया गया है।
योजना को क्या है पात्रता की शर्तें
इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए जहां परिवार की समस्त स्त्रोतों से आय 35 हजार रूपये वार्षिक से कम होनी चाहिए। बेटी के पिता की मृत्यु हो गई हो या फिर शारीरिक या मानसिक तौर पर अजीविका कमाने में असमर्थ हो। इसके अलावा परित्यक्त या तलाकशुदा महिलाओं की पुत्रियां, जिनके संरक्षक की वार्षिक आय 35 हजार रूपये से कम हो। साथ ही शादी के समय बेटी की आयु 18 वर्ष जबकि दुल्हे की आयु 21 वर्ष पूर्ण होनी चाहिए।
कैसे करें आवेदन
पात्र परिवार इस योजना के तहत आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए अपने आवेदन पत्र को बेटी की शादी का कार्ड, कार्यकारी दंडाधिकारी से सत्यापित आय प्रमाणपत्र तथा अन्य सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपने नजदीकी बाल विकास परियोजना अधिकारी के कार्यालय में प्रस्तुत कर सकते हैं। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी आंगनबाडी कार्यकत्र्ता, आंगनबाडी पर्यवेक्षिका या बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय से संपर्क स्थापित कर सकते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
बाल विकास परियोजना अधिकारी चौंतड़ा पूर्ण चंद ठाकुर का कहना है कि मुख्य मंत्री कन्यादान योजना के तहत चौंतड़ा विकास खंड में वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान 40 हजार रूपये प्रति बेटी 16 बेटियों की शादी पर सरकार ने 6 लाख 40 हजार रूपये का शगुन दिया है। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 40 हजार रूपये की दर से अब तक कुल 22 नये मामलों को स्वीकृति प्रदान की गई है। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान सरकार ने इस शगुन राशि को अब बढ़ाकर 51 हजार रूपये कर दिया है। उन्होने बताया कि यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में सरकार जमा करती है।





Tuesday, 26 November 2019

पीएमएवाई के तहत जोगिन्दर नगर में 1.22 करोड़ रूपये व्यय कर बनेंगे 74 मकान

प्रधान मंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत मकान बनाने को सरकार देती है 1.65 लाख रूपये
मंडी जिला के नगर परिषद क्षेत्र जोगिन्दर नगर के लक्ष्मी बाजार वार्ड नम्बर एक निवासी जितेन्द्र कुमार व प्रीतम चंद के लिए आर्थिक तंगी में प्रधान मंत्री आवास योजना सहारा बनकर आई है। प्रधान मंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्का मकान बनाने के लिए इन दोनों परिवारों को सरकार ने क्रमश: 1.65-1.65 लाख रूपये की मदद की है। मंहगाई भरे इस दौर में सरकार की इस मदद के कारण आज इन दोनों परिवारों का पक्के मकान का सपना भी पूरा हो गया है। जोगिन्दर नगर शहरी क्षेत्र में प्रधान मंत्री आवास योजना के अंतर्गत सरकार ने 74 परिवारों को पक्का मकान बनाने की स्वीकृति प्रदान की है जिन पर लगभग 1.22 करोड़ रूपये की राशि खर्च होगी।  
जब इस बारे दो बच्चों के पिता जितेन्द्र कुमार से बातचीत हुई तो उनका कहना है कि उनके पास एक पुश्तैनी कच्चा मकान है जो न केवल वर्तमान में परिवार की जरूरतों के अनुसार कम पड़ रहा है बल्कि हालत भी कुछ अच्छी नहीं है। घर में ही टेलर का काम कर अपने परिवार की गुजर बसर कर रहे जितेन्द्र कुमार चेहरे में खुशी लाते हुए कहते हैं कि अब उनका न केवल पक्के मकान का स्वप्र पूरा हुआ है बल्कि जरूरत के अनुसार मकान में दो कमरे, किचन व बाथरूम की सुविधा भी सुनिश्चित हुई है। मकान बनाने को मिली इस आर्थिक सहायता के लिए वे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी व सरकार का धन्यवाद व्यक्त करते हैं। 
इसी संबंध में दूसरे लाभार्थी प्रीतम चंद से बातचीत हुई तो उनका भी कहना है कि स्वरोजगार के माध्यम से जीवन की गाड़ी को बढ़ाते-2 पिछले कुछ वर्ष पूर्व वे बीमारी से ग्रस्त हो गए। ऐसे में उनका पक्के मकान का सपना न केवल अधूरा रहा बल्कि दो बेटियों की शादी की जिम्मेदारी भी भारी पड़ी। लेकिन अब प्रधान मंत्री आवास योजना के माध्यम से आज उनके पक्के मकान का सपना भी पूरा हो गया है। वे सरकार की ओर से मिली इस 1.65 लाख रूपये की मदद के लिए आभार जताते हुए कहते हैं कि सरकार की यह योजना उनके जैसे आर्थिक तौर पर कमजोर परिवारों के लिए न केवल लाभकारी सिद्ध हो रही है बल्कि आर्थिक तंगी में पक्के मकान का सपना भी पूरा हो रहा है।
किन्हे मिलता है इस योजना का लाभ
प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सरकार मकान बनाने के लिए एक लाख 65 हजार रूपये की राशि को चार किस्तों में प्रदान करती है। जिनमें पहली तीन किस्तें 45-45 हजार रूपये जबकि चौथी किस्त 30 हजार रूपये की मिलती है। इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवेदक की समस्त स्त्रोतों से आय 3 लाख रूपये से अधिक नहीं होनी चाहिए तथा साथ ही मकान बनाने के लिए जमीन भी उपलब्ध हो। इस योजना के तहत मकान का निर्माण निर्धारित नक्शे के तहत 30 वर्गमीटर कारपेट क्षेत्र में लाभार्थी को स्वयं करना होता है। जिसमें कुल दो कमरों के साथ-साथ किचन, शौचालय व बाथरूम का निर्माण शामिल है। 
कैसे होता है पात्रों का चयन
प्रधान मंत्री आवास योजना के अंतर्गत पात्र परिवार लाभ प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड, जमीन के कागजात इत्यादि के साथ अपना आवेदन पत्र स्थानीय नगर निकाय के कार्यालय में प्रस्तुत कर सकते हैं। चयनित होने पर संबंधित पात्र परिवार को मकान बनाने के लिए सरकार की ओर से एक लाख 65 हजार रूपये की आर्थिक मदद चार किस्तों में मिलती है।
क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में तहसीलदार एवं कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद् जोगिन्दर नगर बीएस ठाकुर का कहना है कि प्रधान मंत्री आवास योजना के अंतर्गत जोगिन्दर नगर नगर परिषद् क्षेत्र में अब तक कुल 74 मकान स्वीकृत हुए हैं जिन पर कुल 1.22 करोड़ रूपये की राशि व्यय होगी। उन्होने बताया कि स्वीकृत मकानों में से 20 मकानों का निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। 
इसके अलावा इस योजना के तहत नए पात्र परिवार भी आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन पत्र को किसी भी कार्य दिवस पर नगर परिषद् कार्यालय से नि:शुल्क प्राप्त किया जा सकता है।






Thursday, 14 November 2019

बेटी है अनमोल योजना के अंतर्गत चौंतड़ा ब्लॉक में 38 बेटियां लाभान्वित

बेटी है अनमोल योजना के तहत अब सरकार दे रही है 12 हजार रूपये
बेटी है अनमोल योजना के अंतर्गत चौंतड़ा विकास खंड में गत दो वर्षों के दौरान अब तक कुल 38 बेटियों को लाभान्वित किया जा चुका है जिनमें वर्ष 2018-19 के दौरान 22 जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 16 बेटियों को लाभान्वित किया गया है। बेटी है अनमोल योजना के अंतर्गत सरकार ने दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को भी 10 हजार रूपये से बढ़ाकर 12 हजार रूपये कर दिया है। यह योजना बीपीएल परिवार में पैदा होने वाली केवल दो बेटियों तक ही सीमित है।
बेटी है अनमोल योजना को सरकार दो चरणों में चला रही है। पहले चरण में परिवार में बेटी के जन्म लेने पर सरकार 12 हजार रूपये की धनराशि बतौर सावधि जमा राशि प्रदान करती है जो बेटी के 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर ब्याज सहित वापिस मिलेगी। इस चरण में सरकार पहले दस हजार रूपये की राशि बतौर प्रोत्साहन प्रदान करती थी जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर 12 हजार रूपये कर दिया है। इसी योजना के दूसरे चरण में बेटी को पहली कक्षा से लेकर स्नातक स्तर तक की शिक्षा ग्रहण करने पर सरकार छात्रवृति प्रदान करती है। पहली से तीसरी कक्षा के लिए यह छात्रवृति 450 रूपये वार्षिक, चौथी कक्षा के लिए 750 रूपये, पांचवीं कक्षा के लिए 900 रूपये, छठी व सातवीं कक्षा के लिए 1050 रूपये, आठवीं कक्षा के लिए 12 सौ रूपये, नौवीं व दसवीं कक्षा के लिए 15सौ रूपये, 11वीं व 12वीं कक्षा के लिए 2250 रूपये जबकि स्नातक स्तर की कक्षा में पढ़ाई करने के लिए पांच हजार रूपये वार्षिक दर से यह राशि प्रदान की जाती है। बेटी है अनमोल योजना के दूसरे चरण के अंर्तगत चौंतड़ा विकास खंड में लगभग अढ़ाई सौ पात्र बच्चियों को लाभान्वित किया जा रहा है।
कैसे करें आवेदन
बेटी है अनमोल योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र परिवारों को बेटी के जन्म लेने के प्रमाणपत्र, बीपीएल प्रमाणपत्र सहित अपना ई-डिस्ट्रिक्ट वैब पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन भरना होगा। आवेदन पत्रों की जांच के बाद पात्र परिवार की नवजात बेटी को सरकार की ओर से 12 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि बतौर सावधि जमा प्रदान की जाती है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र, आंगनबाड़ी वृत पर्यवेक्षक कार्यालय या बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय से संपर्क स्थापित किया जा सकता है।
क्या कहते हैं अधिकारी
बाल विकास परियोजना अधिकारी चौंतड़ा पूर्ण चंद ठाकुर का कहना है कि चौंतड़ा ब्लॉक में गत दो वर्षों के दौरान इस योजना के प्रथम चरण के अंतर्गत अब तक कुल 38 बेटियों को लभान्वित किया जा चुका है जिनमें 16 बेटियां चालू वित्तीय वर्ष के दौरान लाभान्वित की गई हैं। जबकि द्वितीय चरण के तहत अढ़ाई सौ से अधिक बेटियों को लाभान्वित किया जा रहा है। इसके अलावा प्रोत्साहन राशि को भी अब सरकार ने बढ़ाकर 12 हजार रूपये कर दिया है।