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Tuesday, 10 September 2024

महिलाएं सड़क किनारे मौसमी सब्जियां बेचकर परिवार की आर्थिकी को कर रही सुदृढ़

मंडी-जोगिन्दर नगर-पठानकोट हाईवे पर गलू व गुम्मा के बीच दो दर्जन महिलाएं बेच रही मौसमी फल व सब्जियां

कोविड काल के मुश्किल दौर ने दिखाई ये राह, अब दर्जनों महिलाओं की आर्थिकी का बना अहम जरिया

ग्रामीण महिलाएं अब बच्चों व परिवार की देखरेख के साथ-साथ परिवार की आर्थिकी को भी सुदृढ़ बनाने का प्रयास कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो आज भी बड़े स्तर पर महिलाएं खेती-बाड़ी व पशुपालन के साथ जुड़ी हुई हैं। लेकिन बदलते वक्त के साथ आज यही ग्रामीण महिलाएं घर की दहलीज पार कर परिवार की आर्थिकी को सुदृढ़ करने का प्रयास कर रहीं हैं। हकीकत तो यह है कि ग्रामीण महिलाओं ने पारंपरिक खेती-बाड़ी व पशुपालन को आज आर्थिकी का अहम जरिया बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
हमारी इन ग्रामीण महिलाओं की इस बदलती सोच का ही नतीजा है कि पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर जोगिन्दर नगर के गलू से लेकर गुम्मा नामक स्थान तक लगभग दो दर्जन से अधिक महिलाएं प्रतिदिन सड़क किनारे मौसमी फल व सब्जियां बेचते हुए नजर आ जाएंगी। ये मेहनतकश महिलाएं प्रतिदिन अपने घर से लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर का सफर तय कर सडक़ तक पहुंचती है। इस दौरान वे खेतों में तैयार मौसमी फल व सब्जियों को पीठ पर उठाकर न केवल सड़क तक पहुंचाती हैं बल्कि इन्हें बेचने का भी कार्य कर रही हैं। इससे न केवल उन्हे परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए धनराशि प्राप्त हो जाती है बल्कि घर में प्राकृतिक तौर पर तैयार इन मौसमी फल व सब्जियों को एक मार्केट भी उपलब्ध हो रही है। प्रतिदिन इस राष्ट्रीय उच्च मार्ग से सैंकड़ो वाहन गुजरते हैं, ऐसे में राहगीर प्राकृतिक तौर पर तैयार इन फलों व सब्जियों को खरीदने के लिए विशेष तरजीह भी देते हैं। इससे इन ग्रामीण महिलाओं को परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी धनराशि का इंतजाम भी हो रहा है।
जब इस संबंध में कुछ महिलाओं से बातचीत की तो इनका कहना है कि कोविड के दौरान जब परिवार की आय के साधन बंद हो गए थे, तो उन्होंने सड़क किनारे बैठकर फल व सब्जियां बेचनी शुरू की। इससे न केवल उन्हें उस मुश्किल दौर में आय का एक नया जरिया मिला बल्कि घर में तैयार होने वाली मौसमी फल व सब्जियां बेचने को एक मार्केट भी उपलब्ध हुई। शुरूआती दौर में मात्र कुछ महिलाएं ही सामने आई लेकिन वर्तमान में यह आंकड़ा दो दर्जन से भी अधिक का हो चुका है। इनका कहना है कि इस कार्य से न केवल उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिये जरूरी धनराशि प्राप्त हो रही है बल्कि उन्हें समाज के बीच स्वयं को स्थापित करने का एक अवसर भी मिल रहा है। ये महिलाएं अब पूरा वर्ष भर मौसम आधारित फलों व सब्जियों को बेचने का कार्य कर रही हैं। 
इसी बीच सब्जियां खरीदने के लिए रूके कुछ यात्रियों से बातचीत की तो इनका भी कहना है कि ग्रामीण महिलाओं द्वारा बेचे जा रहे ये उत्पाद जहां पूरी तरह से प्राकृतिक हैं तो वहीं कीमत बाजार भाव से भी कुछ कम है। जिसका सीधा असर उनकी सेहत के साथ-साथ आर्थिकी पर भी पड़ता है। साथ ही कहना है कि प्राकृतिक तौर पर तैयार सब्जियां बाजारों में आजकल बमुश्किल से ही मिल पाती हैं, लेकिन आज वे यहां से टमाटर, भिंडी, तोरी, देसी ककड़ी, करेला, घीया, कद्दू, घंघीरी, प्याज, आलू, अदरक, लहसुन, मूली इत्यादि खरीद कर ले जा रहे हैं जो पूरी तरह से प्राकृतिक तौर पर उगाए गए हैं तथा इनकी पौष्टिकता भी अधिक है।
ऐसे में कह सकते हैं कि ग्रामीण महिलाओं ने परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठाकर पशु पालन व खेती बाड़ी के साथ-साथ आर्थिकी को सुदृढ़ बनाने की दिशा में अहम कदम बढ़ाया है। ग्रामीण महिलाओं का यह प्रयास निश्चित तौर पर महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कड़ी साबित हो रहा है। DOP 10/09/2024
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Wednesday, 10 November 2021

महिला शक्ति सडक़ किनारे सब्जियां बेचकर परिवार की आर्थिकी को दे रही है मजबूती

मंडी-पठानकोट हाईवे पर गुम्मा के पास दर्जनों महिलाएं बेच रही मौसमी फल व सब्जिया

ग्रामीण महिलाएं बच्चों व परिवार की देखरेख के साथ-साथ अब परिवार की आर्थिकी का भी सहारा बन रही है। हमारे ग्रामीण परिवेश में महिलाएं न केवल खेती-बाड़ी व पशुपालन के साथ बड़े पैमाने पर जुड़ी रहती हैं बल्कि बच्चों के पालन-पोषण में भी अहम भूमिका अदा करती हैं। लेकिन बदलते वक्त के साथ आज ग्रामीण महिलाएं न केवल घर की दहलीज से बाहर निकल परिवार की आर्थिकी को मजबूती प्रदान कर रही हैं बल्कि काम करने से भी परहेज नहीं कर रही है। महिलाओं की इस बदलती सोच का ही नतीजा है कि कोरोना महामारी के इस कठिन दौर में वे परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए मनरेगा में दिहाड़ी मजदूरी के साथ-साथ मौसमी फल व सब्जियों को बेचने में भी अब पीछे नहीं है।

हमारी इन ग्रामीण महिलाओं की इस बदलती सोच का ही नतीजा है कि पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर जोगिन्दर नगर से लेकर गुम्मा तक ऐसी दर्जनों महिलाएं सडक़ किनारे मौसमी फल व सब्जियां बेचते हुए नजर आ जाएंगी। जब इस संबंध में इन स्थानीय महिलाओं जिनमें कमला देवी, रती देवी, कलू देवी, पुष्पा देवी, प्रीतो देवी आदि से बातचीत की तो इन महिलाओं ने बताया कि वे प्रतिदिन बरसाती मौसम के दौरान तैयार मौसमी फल व सब्जियों को बचने का काम कर रही हैं। इससे न केवल उन्हे परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए धनराशि प्राप्त हो जाती है बल्कि घर में प्राकृतिक तौर पर तैयार इन मौसमी फल व सब्जियों को एक मार्केट भी उपलब्ध हो रही है। इनका कहना है प्रतिदिन इस राष्ट्रीय उच्च मार्ग से सैंकड़ो वाहन गुजरते हैं, ऐसे में राहगीर प्राकृतिक तौर पर तैयार इन फलों व सब्जियों को खरीदने के लिए विशेष तरजीह देते हैं। इनका कहना है कि इससे उन्हे रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी आर्थिकी का इंतजाम भी हो जाता है।

इसी बीच सब्जियां खरीदने के लिए रूके कुछ यात्रियों से बातचीत की तो इनका भी कहना है कि ग्रामीण महिलाओं द्वारा बेचे जा रहे ये उत्पाद जहां पूरी तरह से प्राकृतिक तौर पर तैयार हुए हैं तो वहीं इनकी कीमत बाजार भाव से भी कम है। जिसका सीधा असर उनकी सेहत के साथ-साथ आर्थिकी पर भी पड़ता है। साथ ही कहना है कि प्राकृतिक तौर पर तैयार सब्जियां बाजारों में आज बमुश्किल से ही मिल पाती हैं, लेकिन आज वे यहां से भिंडी, तोरी, काकड़ी, करेला, कद्दू, प्याज, अदरक, लहुसन इत्यादि खरीद कर ले जा रहे हैं जो पूरी तरह से प्राकृतिक तौर पर उगाए गए हैं तथा इनकी पौष्टिकता भी अधिक है।

ऐसे में कह सकते हैं कि आज हमारे ग्रामीण परिवेश की महिलाओं ने परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठाकर पशु पालन व खेती बाड़ी के साथ-साथ परिवार की आर्थिकी को मजबूती प्रदान करने की दिशा में अहम कदम बढ़ाया है, जो निश्चित तौर पर महिलाओं के सशक्तीकरण में एक अहम कदम साबित हो रहा है।