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Friday, 17 April 2015

जिला ऊना में बेटियों को बचाने के लिए घर-घर तक पहुंचेगा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान

भारत वर्ष की जनगणना-2011 के आंकडों के आधार पर पूरे देश में 0-6 वर्ष आयु वर्ग में प्रति हजार लडक़ों के मुकाबले लड़कियों के लिंगानुपात में कमी दर्ज हुई है। आंकडों के अनुसार यह लिंगानुपात वर्ष 1961 में 976 से वर्ष 2011 में 918 तक पहुंच गया है जो कि अब तक हुई जनगणनाओं में सबसे कम आंका गया है। ऐसे में समाज में बेटियों के प्रति नजरिए में आए बदलाव तथा भ्रूण में ही कन्याओं की बढ़ती हत्यों के प्रति जागरूकता लाने के लिए पूरे देश के सबसे प्रभावित चुनिंदा 100 जिलों में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को आरंभ किया गया है। 
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का प्रमुख लक्ष्य जहां बालिका जन्मोत्सव मनाना और उसे शिक्षा दिलाना है तो वहीं जेंडर आधारित लिंग चयन में समापन का निवारण करना, बालिका की उत्तरजीविता और संरक्षण तथा बालिका की शिक्षा सुनिश्चित करना इस अभियान का प्रमुख उदेश्य है। इसके अतिरिक्त समाज में बालिकाओं के जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए सभी ग्राम पंचायतों में गुडडा गुडडी बोर्ड लगाकर प्रत्येक माह संबंधित गांव के बालक-बालिका अनुपात को दर्शाया जाएगा। साथ ही ग्राम पंचायत हर लडकी के जन्म होने पर उसके परिवार को तोहफे भेजेगी,प्रतिवर्ष कम से कम एक दर्जन लडकियों का जन्म दिवस मनाया जाएगा। यही नहीं जहां सभी ग्राम पंचायतों में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की शपथ दिलाई जाएगी तो वहीं जिस ग्राम पंचायत में बालक-बालिका अनुपात बढ़ता है तो उस ग्राम पंचायत को सम्मानित भी किया जाएगा। जबकि किसी भी गांव में बाल विवाह होने पर संबंधित ग्राम पंचायत प्रधान को जिम्मेदार माना जाएगा और उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। 
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत हमारे समाज में बेटियों के प्रति सामाजिक मानसिकता को बदल कर लडकियों एवं महिलाओं के प्रति हो रहे भेदभाव को समाप्त कर समाज की मुख्यधारा में जोडकर उन्हे आगे बढ़ाया जाएगा। आज भले ही हम अपनी कामयाबी के कितने ही झंडे गाडने के दावे कर रहे हों लेकिन हमारे समाज में बढ़ती कन्या भ्रूण हत्याएं तथा बालिकाओं के प्रति दोयम दर्जे के व्यवहार ने यह साबित कर दिया है आज भी हम मानवीय दृष्टिकोण से काफी पिछडे हुए हैं। जिसमें बात चाहे बालिकाओं के प्रति शिक्षा की हो या फिर गर्भ में ही कन्या भ्रूण हत्या करने की हो। ऐसे में बालिकाओं के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव लाने तथा जागरूकता पैदा करने के लिए देश भर के चुुनिंदा सौ जिलों में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को आरंभ किया गया है। 
इस अभियान के तहत हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला को भी शामिल किया गया है। जनगणना-2011 के आंकडों के अनुसार ऊना जिला देश के उन 100 जिलों में शामिल है जिन्हे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के साथ जोडा गया है। जनसंख्या आंकडे-2011 के आधार पर जिला में 0-6 वर्ष आयु वर्ग में प्रतिहजार लडक़ों के मुकाबले 875 लडकियां हैं जो राष्ट्रीय अनुपात 918 के मुकाबले काफी कम है। जिला में इस अभियान को उपायुक्त ऊना की अगुआई में चलाया जाएगा जिसमें महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा तथा पुलिस विभाग सहित गैर सरकारी एवं स्वयं सेवी संस्थों से मिलकर घर-घर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश पहुंचाया जाएगा। 
उपायुक्त ऊना अभिषेक जैन ने बताया कि जिला ऊना में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक्शन प्लान तैयार कर लिया गया है तथा इसके बेहतर कार्यान्वयन के लिए जिला स्तर पर उपायुक्त, खंड स्तर पर एसडीएम जबकि पंचायत स्तर पर स्थानीय पंचायत प्रधान की अध्यक्षता में तीन स्तरीय टॉस्क फोर्स गठित की गई है। जिला में स्कूली स्तर पर बेटियों के ड्राप आउट को कम करने व शिक्षा ग्रहण करने के लिए स्कूली स्तर पर विशेष प्रयास किए जाएंगे। लडकियों की शिक्षा में शतप्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने तथा आसपास के क्षेत्र में लडकियों को शिक्षा हासिल करने लिए के प्रेरित करने वाले स्कूल को जिला स्तर पर एक लाख रूपये का ईनाम भी दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रत्येक माह ही दस तरीख को विशेष कन्या दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। 
उपायुक्त ने बताया कि इस अभियान के तहत समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जोडने के लिए सोशल मीडिया का सहारा भी लिया जाएगा तथा बेटी बचाओ नाम से वाहटस ऐप ग्रुप बनाया जाएगा। जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों के अतिरिक्त समाज से आम जन को भी जोडा जाएगा ताकि वह बेटियों के प्रति अपने विचारों को साझा कर सकें तथा अपने बहुमूल्य सुझाव दे सकें। साथ ही जिला के उद्योगों में हजारों कर्मचारी कार्यरत हैं ऐसे में उद्योगों को भी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के साथ जोडा जाएगा।
डीसी ने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को जन-जन तक पहुंचाने तथा सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पुलिस, पंचायतीराज विभागों तथा पंचायत प्रतिनिधियों के साथ मिलकर इस अभियान को एक जनआंदोलन बनाया जाएगा। उन्होने बताया कि जिला में पीसी पीएनडीटी एक्ट के तहत अवैध तौर पर कन्या भ्रूण हत्या का मामला पकडने पर दी जाने वाली दस हजार रूपये की ईनाम राशि के अतरिक्त संबंधित पुलिस स्टेशन को 21 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि अलग से प्रदान की जाएगी। साथ ही इस अभियान के तहत जिला में पैदा होने वाली लडकियों के जन्म पंजीकरण को समय पर दर्ज करवाना सुनिश्चित बनाया जाएगा तथा मदर-चाईल्ड ट्रैकिंक सिस्टम को भी गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही मदर-चाईल्ड प्रोटेक्शन कॉर्ड को भी गंभीरता से बनाया जाएगा तथा समय पर अपडेट किया जाएगा। इसके अतिरिक्त जिला के सभी स्कूलों में लडकियों के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी जबकि सभी आंगनबाडी केन्द्रों में शौचालय की सुविधा मुहैया करवाने पर बल दिया जाएगा। 
उन्होने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मीडिया व अन्य प्रचार प्रसार माध्यमों के साथ-साथ जिला के धार्मिक व आध्यात्मिक गुरूओं को भी शामिल किया जाएगा। उपायुक्त ने बताया कि जिला के विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए पीसी पीएनडीटी एक्ट की कडाई से अनुपालना सुनिश्चित की जाएगी तथा अवहेलना करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस अभियान के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को जोडने तथा जागरूक करने के लिए विभिन्न स्तरों पर जागरूकता शिविर भी लगाए जाएंगें तथा उनका पूरा सहयोग लिया जाएगा ताकि बेटियों के प्रति व्याप्त इस सामाजिक विषमता को जल्दी ठीक किया जा सके।

(साभार: दिव्य हिमाचल, 7 अप्रैल, 2015 को संपादकीय पृष्ठ में प्रकाशित)  

Wednesday, 26 November 2014

श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए बेहतरीन स्थान है श्री रेणुका जी

हिमाचल प्रदेश अपने प्राकृतिक सौंदर्य व धार्मिक स्थानों के चलते न केवल राष्ट्रीय बल्कि अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी पर्यटन की दृष्टि से ख्याति प्राप्त है। जिसके चलते जहां प्रदेश में प्रतिवर्ष लाखों देशी व विदेशी सैलानी भ्रमण हेतु यहां पहुंचते हैं तो वहीं पर्यटकों के आवागमन के चलते प्रदेश को करोडों रुपयों की आमदन भी होती है। प्रदेश में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सैंकडों धार्मिक व प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थान है। जिनमें से एक है जिला सिरमौर का श्री रेणुका जी। यह स्थान जहां प्रदेश की सबसे बडी प्राकृतिक झील के नाते पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बिन्दु है तो वहीं भगवान परशुराम की जन्मस्थली होने के नाते एक पवित्र धार्मिक स्थान भी है।
रेणुका झील लगभग 3 वर्ग कि0मी0 के दायरे में फैली है। इस झील के चारों ओर हरे भरे जंगल तथा इसमें चहचाहते पक्षियों की मधुर आवाजें मन को मोह लेती हैं। सबसे अहम पहेलु यह है कि जहां झील का शीतल व निर्मल जल पर्यटकों को अपनी ओर आर्किषत करता है तो वहीं दूर से देखने पर झील की आकृति एक सोई हुई महिला जैसी प्रतीत होती है। किंवदतियों के अनुसार भगवान परशुराम की मां रेणुका जब तत्कालिन राम सरोवर में जलमग्न हुई तो इसका आकार एक निद्रामग्न नारी के रुप में परिवर्तित हो गया। तभी से ही इस झील के जल को भी गंगा जल के समान पवित्र माना गया है। झील में पवित्र स्नान हेतु स्नानाघाट भी बनें है। जिसमें महिलाओं व पुरुषों को अलग-अलग से पवित्र स्नान की व्यवस्था है। झील में अठखेलियां करती मछलियां तथा विचरण करते कछुए भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। रेणुका का एक अन्य आकर्षण है यहां का लघु चिडियाघर और लायन सफारी। जहां पर हम एशियाई बब्बर शेरों] काले भालू] तेंदुओं] हिरण आदि को देख सकते हैं। यहां पर झील के चारों ओर लगभग 3 कि0मी0 के दायरे में स्थापित रेणुका वन्य प्राणी अभयारण्य भी पर्यटकों को अपनी ओर आर्किषत करता है। जहां पर लंगूर] धोरल] उल्लू] लाल मुर्गे] मुर्गाबी] मोर] बतख इत्यादि भी देखे जा सकते हैंै। रेणुका झील में बोटिंग की सुविधा भी है] जिसके चलते पर्यटक यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का ज्यादा आनंद उठा सकते हैं।

                                                 इसके अलावा पर्यटक धार्मिक दृष्टि से यहां पर भगवान परशुराम का मंदिर(जिसे सिरमौर रियासत के तत्कालिन राजा सुरेन्द्र विक्रम प्रकाश ने बनाया था ¼मां रेणुका की प्रतिमा] परशुराम शीला] परशुराम ताल] सिरमौर रियासत की तत्कालिन राज नर्तकी कुब्जा देवी के नाम पर स्थापित कुब्जा पवेलियन) यहां देखने योग्य स्थान हैं। घने पेडों की छाया तथा भगवान परशुराम व मां रेणुका के आर्शीवाद से मन को एक आलौकिक शांति का भी अनुभव मिलता है। यहां आने वाले पर्यटक घण्टों ध्यान लगाते हैं। प्रतिवर्ष नवम्बर महीने में इस पवित्र स्थल पर देवोत्थान एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक विशाल अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का श्री रेणुका जी मेला मनाया जाता है। यहां से लगभग 10 कि0मी0 की दूरी पर गांव जामूकोटी में भगवान परशुराम का मंदिर है जहां जाकर भगवान परशुराम के दर्शन करने के साथ-साथ यहां से लगभग 3 कि0मी0 आगे पहाड़ी की चोटी पर पहुंचकर महर्षि जमदग्नि की तपोस्थली तपे-का-टिला भी देखने योग्य स्थान हैं। इस स्थान से जहां आसपास का विहंगम दृष्य देखा जा सकता है तो वहीं यहां का शुद्ध, शांत व स्वच्छ वातावरण यहां बार-बार आने को पे्ररित करता है।

पौराणिक कथानुसार भगवान परशुराम कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मां से मिलने श्रीरेणुकाजी में पधारते हैं। कहते हैं कि प्राचीन काल में आर्यवर्त में हैहवंषी क्षत्रीय राज्य राज करते थे तथा भृगुवंशी ब्राहमण उनके राज पुरोहित थे। इसी भृगुवंशी के महर्षि ऋचिक के घर महर्षि जमदग्नि का जन्म हुआ। इनका विवाह इक्ष्वाकु कुल के ऋषि रेणु की कन्या रेणुका से हुआ। महर्षि जमदग्नि सपरिवार इसी क्षेत्र में तपे का टिला] जो वर्तमान में जामुकोटी में स्थित है] रहने लगे। वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीय को मां रेणुका के गर्भ से भगवान परशुराम का जन्म हुआ। इन्हे भगवान विष्णु का छठा अवतार भी माना जाता है। कथानुसार महर्षि जमदग्नि के पास कामधेनु गाय थी] जिसे पाने के लिए सहóबाहु ने महर्षि जमदग्नि की हत्या कर दी। हत्या का समाचार सुनकर मां रेणुका शोकवश राम सरोवर में कूद गई] जो आज रेणुका झील के नाम से प्रसिद्ध है। उधर महेन्द्र पर्वत पर तपस्या में लीन भगवान परशुराम को जब मां रेणुका की मौत का पता चला तो क्रोधित होकर भगवान परशुराम सहóबाहु को ढ़ूंढ़ने निकल पड़े। तत्पश्चात भगवान परशुराम ने अपनी योगशक्ति से पिता महर्षि जमदग्नि व माता रेणुका को जीवित कर दिया। भगवान परशुराम ने महेन्द्रपर्वत  पर लौटने से पूर्व मां रेणुका को वचन दिया कि वह प्रतिवर्ष कार्तिक मास की दशमी को डेढ़ दिन के लिए रेणुकाजी में आया करेंगें] तभी से लेकर आजतक इस पावन तीर्थ पर प्रतिवर्ष रेणुका मेला बड़ी धूमधाम से यहां मनाया जाता है। मेले में प्रदेश व क्षेत्र की संस्कृति को देखने व जानने का सुअवसर भी मिलता है। पहले यह मेला राजस्तरीय था परन्तु वर्ष 2011 में प्रदेश सरकार ने इसे अन्र्तराष्ट्रीय स्तर का बना दिया है। जबकि इससे पहले प्रदेश सरकार ने वर्ष 1984 में इस क्षेत्र के बेहतर विकास हेतू श्री रेणुकाजी विकास बोर्ड की स्थापना भी की है। यहां ठहरने हेतू हिमाचल पर्यटन विकास निगम का होटल] श्री रेणुका जी विकास बोर्ड का विश्राम गृह] वन विभाग का विश्राम गृह प्रमुख है। इसके अलावा यहां से लगभग 02 कि0मी0 की दूरी पर ददाहू में लोक निर्माण विभाग व पंचायती राज विभाग के विश्राम गृह के साथ-साथ कई निजी होटल भी हैं।

यह स्थान वर्ष भर सडक मार्ग से जुडा हुआ है। यहां से जिला मुख्यालय नाहन लगभग 40 कि0मी0] पांवटा साहिब 60 कि0मी0] चण्डीगढ 100 कि0मी0 तथा देहरादून लगभग 105 कि0मी0 दूर है।



(साभार: आपका फैसला 22 अक्तूबर, 2014, दिव्य हिमाचल 6 नवम्बर, 2014 को संपादकीय पृष्ठ तथा गिरिराज 12 नवम्बर में प्रकाशित)