जोगिन्दर नगर के कुठेहड़ा निवासी लवली ने बेकरी का काम शुरू कर हौंसलों को दी नई उड़ान
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ (श्रीमद् भगवद्गीता)
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Friday, 11 June 2021
कोरोना ने छीनी फाइव स्टार होटल की नौकरी, घर आकर शुरू कर दिया स्वरोजगार
Saturday, 15 May 2021
वैश्विक महामारी कोविड-19 में हारतीं मानवीय संवेदनाएं
वैश्विक महामारी कोविड 19 के इस कठिन समय में अब मानवीय संवदेनाएं न केवल हारती हुई नजर आ रही हैं बल्कि कभी ठोस रिश्ते-नातों का वास्ता देकर अपने होनेे का दंभ भरने वाले कहीं दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं। इस महामारी की दूसरी लहर के चंद दिनों में ही हमारे वास्तविक मानवीय चेहरे को न केवल नंगा कर दिया है बल्कि इसे स्वार्थ पर केंद्रित हो चुके अमानवीय मूल्यों के नीचे दफन भी कर दिया है। प्रतिदिन देश व प्रदेश के कई हिस्सों से इस महामारी के दौर में अमानवीय कुकृत्यों की न केवल खबरें देखने व सुनने को मिल रहीं हैं बल्कि उन्हे देखकर दिल भी दहल रहा है।
Wednesday, 21 April 2021
चौंतड़ा के देवराज भारती ने प्राकृतिक खेती से जुडक़र लिख डाली सफलता की कहानी
सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती करना बना अब फायदे का सौदा, 5 बीघा जमीन भी हुई जहरमुक्त
कहते हैं कि यदि दिल से कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो न उम्र, न संसाधनों का अभाव, न ही जीवन में असफल होने का डर आगे बढऩे से रोक पाता है। बल्कि धुन के पक्के ऐसे लोग तमाम सुविधाओं व किंतु परन्तु को दर किनार कर कड़ी मेहनत के दम पर जहां निर्धारित लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर लेते हैं तो वहीं दूसरों के लिए प्रेरणास्त्रोत भी बन जाते हैं। ऐसी ही कुछ कहानी है मंडी जिला के चौंतड़ा विकास खंड के अंर्तगत ग्राम पंचायत पस्सल के गांव डमेहड़ के 72 वर्षीय प्रगतिशील किसान देव राज भारती की। जिन्होने मात्र तीन वर्षों की अथक मेहनत व प्रयास के दम पर सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को अपनाकर सफलता की कहानी लिख डाली है। इनकी यह उपलब्धि आज पूरे जोगिन्दर नगर क्षेत्र ही नहीं बल्कि प्रदेश के लाखों किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत भी बन गई है।
साढ़े पांच क्विंटल मटर एवं 30 किलो धनिया तैयार कर बेचा, लगभग 12 हजार की हुई आमदन
देवराज भारती ने बताया कि इस वर्ष उन्होने लगभग एक बीघा जमीन में मटर व धनिया की खेती की जिससे लगभग साढ़े पांच क्विंटल मटर तथा 30 किलोग्राम हरा धनिया तैयार हुआ। जिससे लगभग 12 हजार रूपये की शुद्ध आमदन हुई है। इसके अलावा देसी किस्म की गेंहू की फसल भी लगभग तैयार है। साथ ही मस्सर व चना दालों की भी बिजाई की है जिनके परिणाम भी बेहतर आ रहे हैं। इसके अतिरिक्त खेतों में फूल गोभी, अरबी, मूली, आलू, अदरक इत्यादि की भी बिजाई कर रहे हैं जिनके परिणाम भी अच्छे आ रहे हैं। उन्होने बताया कि यह सब पूरी तरह देसी गाय के गोबर व गोमूत्र से तैयार घन जीवामृत, जीवमृत एवं बीजामृत के उपयोग से ही संभव हो पाया है तथा सभी तरह के उत्पाद पूरी तरह से प्राकृतिक तौर पर तैयार किये जा रहे हैं।
इसके अलावा उन्होने संसाधन भंडार भी स्थापित किया है जहां से आसपास के किसान मामूली दरों पर प्राकृतिक तौर पर तैयार घनजीवामृत, जीवामृत एवं बीजामृत प्राप्त कर सकते हैं। संसाधन केंद्र से ही उन्हे लगभग 10 हजार रूपये की आय प्राप्त हो चुकी है। साथ ही बताया कि गाय शैड निर्माण को सरकार ने 8 हजार रूपये की आर्थिक मदद की है। प्राकृतिक खेती की व्यापक जानकारी लेने को वर्ष 2020 में हरियाणा के कुरूक्षेत्र स्थित गुरूकूलम में भी तीन दिन का प्रवास कर चुके हैं। उन्होने ज्यादा से ज्यादा किसानों से सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती से जुडऩे का आहवान किया ताकि जहां हमारी फसलों को जहरमुक्त बनाया जा सके तो वहीं खाद्यान्नों की गुणवत्ता भी बढ़ सके। इससे न केवल व्यक्ति शरीरिक व मानसिक तौर पर स्वस्थ रहेगा बल्कि गंभीर बीमारियों से बचाव होगा।
तैयार फसल बेचने एवं देसी नस्ल की गाय को लेकर आ रही दिक्कतें, सरकार से मांगा उचित सहयोग
बकौल देवराज भारती का कहना है कि प्राकृतिक तौर पर तैयार फल, सब्जियां व अन्न इत्यादि को बेचने के लिए किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस दिशा में सरकार कुछ ऐसे कदम उठाए जिससे न केवल उनके यह तैयार उत्पाद आसानी से बिक जाएं बल्कि लोगों को भी इनका लाभ मिल सके। इसके अलावा देसी नस्ल की गाय खरीदने में भी किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है इस संबंध में भी सरकार उचित कदम उठाये ताकि किसानों को गुणवत्तायुक्त देसी गाय की आसानी से उपलब्धता हो सके।
क्या कहते हैं अधिकारी:जब इस बारे आत्मा परियोजना के खंड तकनीकी प्रबंधक (बी.टी.एम.) चौंतड़ा सुनील कुमार से बातचीत की तो इनका कहना है कि वर्ष 2018 में देवराज भारती सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के साथ जुड़े तथा वे अब एक सफल किसान बन चुके हैं। उन्होने बताया कि 66 किसानों से शुरूआत करते हुए वर्तमान में चौंतड़ा ब्लॉक के अंतर्गत लगभग 18 से 19 सौ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोडऩे का प्रयास हुआ है। घनजीवामृत, जीवमृत एवं बीजामृत उपलब्ध करवाने के लिए 16 संसाधन भंडार स्थापित किये हैं जिनके माध्यम से किसान 5 रूपये किलो देसी गाय का गोबर, दो रूपये प्रति लीटर जीवामृत तथा गोमूत्र आठ रूपये प्रति लीटर की दर से प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा देसी गाय खरीदने, गाय का शैड बनाने एवं प्लास्टिक का ड्रम खरीदने के लिए भी सरकार सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए किसानों को उपदान मुहैया करवा रही है।
Friday, 12 March 2021
अवैज्ञानिक दोहन के कारण खतरे में है पौष्टिक तत्वों से भरपूर जंगली कंद 'तरड़ी'
शिवरात्रि व होली पर्व में घरों में बड़े चाव के साथ पकाई जाती है तरड़ी की सब्जी
Wednesday, 3 March 2021
कोरोना महामारी के कठिन दौर में पीएम स्वनिधि बनी रेहड़ी-फहड़ी विक्रेताओं का सहारा
जोगिन्दर नगर में पीएम स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि के तहत 41 स्ट्रीट वेंडर्स लाभान्वित
जोगिन्दर नगर शहरी क्षेत्र में प्रधान मंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) के तहत 41 रेहड़ी-फहड़ी विक्रेताओं को लाभान्वित किया गया है। पीएम स्वनिधि के अंतर्गत इन लाभान्वित रेहड़ी-फहड़ी विक्रेताओं को आजीविका व रोजगार को पुन: पटरी पर लाने के लिए विभिन्न बैंकों के माध्यम से सरकार ने 10 हजार रूपये का लघु ब्याज सब्सिडी आधारित ऋण आवंटित किया है।
पीएम स्वनिधि के अंतर्गत ऋण प्राप्त करने वाले जोगिन्दर नगर शहर के रेहड़ी-फहड़ी विक्रेता साधु राम का कहना है कि वे जोगिन्दर नगर शहर के पुलिस थाना चौक में पिछले लगभग 13 वर्षों से फल व सब्जी की दुकान लगाते हैं जिसके माध्यम से उनका व परिवार का भरण पोषण होता है। उन्होने बताया कि पिछले वर्ष मार्च में कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन से उनका यह रोजगार काफी प्रभावित हुआ। लेकिन इस बीच उन्हे पीएम स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि बारे स्थानीय नगर परिषद के माध्यम से पता चला तथा उन्होने स्वयं को पीएम स्वनिधि के तहत पंजीकृत करवा लिया। उन्होने बताया कि पीएम स्वनिधि के तहत उन्हे 10 हजार रूपये का ऋण सस्ती व आसान दरों में कोरोबार को पुन: स्थापित करने को प्राप्त हुआ है। इसके लिए वे सरकार विशेषकर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हैं।






























