Himdhaara Search This Blog

Tuesday, 23 December 2025

रोहल झंडुता के अमन शर्मा का सुख आश्रय योजना से पूरा हुआ मकान का सपना

प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना में मकान निर्माण को दी है 3 लाख की आर्थिक मदद

जिला बिलासपुर के झंडुता उपमंडल के गांव रोहल निवासी 25 वर्षीय अमन शर्मा का मकान बनाने का सपना मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत पूरा हुआ है। प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के अंतर्गत मकान निर्माण को 3 लाख रुपये की आर्थिक मदद की है। ‘चिल्ड्रन ऑफ दि स्टेट’ अमन शर्मा प्रदेश सरकार की आर्थिक मदद से न केवल स्वयं का मकान निर्मित करने में कामयाब हो पाए हैं बल्कि प्रतिमाह मिलने वाले 4 हजार रुपये जेब खर्च से वह अपना जीवन-यापन भी बेहतर तरीके से कर पा रहे हैं।
आत्मविश्वास से लबरेज 25 वर्षीय अमन शर्मा से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि अढ़ाई वर्ष की आयु में पिता तथा साढ़े तीन वर्ष की आयु में माता का साथ छूट गया। दादा-दादी तथा चाचा ने पालन पोषण किया। दसवीं तक की शिक्षा हासिल करने के उपरांत छोटा-मोटा रोजगार की तलाश में वह लगातार प्रयासरत रहे। उन्होंने स्वयं के भरण-पोषण के लिए कई जगह कार्य किया तथा अंत में उन्होंने पारिवारिक सदस्यों के सहयोग से स्वयं की टैक्सी पा ली। वर्तमान में वह झंडुता में टैक्सी चलाकर भरण-पोषण कर रहे हैं।
अमन शर्मा कहते हैं कि वह 25 वर्ष के हो गए लेकिन आज तक मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना को छोड़कर उन्हें किसी भी अन्य सरकारी योजना में लाभ नहीं मिला है। उनके पिता द्वारा निर्मित मकान इतनी जर्जर हालत में है कि उसमें एक दिन भी रहना खतरे से खाली नहीं है। ऐसे में उसे चाचा या फिर नानी के घर ही निवास करना पड़ रहा है। अमन शर्मा कहते हैं कि जब भी सरकारी योजनाओं की मदद की मांग की तो उन्हें हमेशा अनाथालय छोड़ने का ही दबाव बनाया गया। लेकिन गरीबी के वाबजूद न केवल दादी व चाचा ने उनका पालन-पोषण किया बल्कि आज वह कड़ी मेहनत से स्वयं को अपने पांव में खड़ा कर पाए हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का कोटी-कोटी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह न केवल उनके जैसे हजारों बच्चों और युवाओं के लिए फरिश्ता बनकर सामने आए हैं बल्कि ‘चिल्ड्रन ऑफ दि स्टेट’ का दर्जा प्रदान कर उन्हें समाज में पूरा मान-सम्मान भी प्रदान किया है। मुख्यमंत्री की बदौलत आज न केवल उनका अपना मकान बनकर तैयार हो गया है बल्कि प्रतिमाह दी जा रही आर्थिक मदद भी जीवन में आगे बढ़ने का हौंसला दे रही है। उन्होंने बताया कि तीन किस्तों में अब तक उन्हें अढ़ाई लाख रूपये प्राप्त हो चुके हैं तथा अंतिम किस्त के तौर पर शेष 50 हजार रूपये आने बाकी हैं।  
क्या कहते हैं अधिकारी:
जिला कार्यक्रम अधिकारी हरीश मिश्रा का कहना है कि जिला बिलासपुर में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत कुल 166 पात्रों को लाभान्वित किया जा रहा है। जिनमें से 23   को मकान निर्माण के लिए 3-3 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है जिनमें झंडुता के रोहल गांव निवासी अमन शर्मा भी शामिल हंै। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा के 19, शादी के 20, वोकेशनल कोर्स के 8, स्टार्टअप के 9 तथा कौशल विकास, कोचिंग एवं भू आवंटन के एक-एक मामले में पात्रों को लाभान्वित किया है।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है कि प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना को संबंधित विभाग के माध्यम से धरातल पर क्रियान्वित कर जिला के ‘चिल्ड्रन ऑफ दि स्टेट’ को लाभान्वित किया जा रहा हैं। जिसमें मकान निर्माण को आर्थिक मदद, कारोबार शुरू करने को स्टार्टअप के तहत आर्थिक सहायता, शादी होने पर दी जाने वाली आर्थिक मदद, शिक्षा सहायता इत्यादि शामिल है। इसके अतिरिक्त जिला के विभिन्न बाल आश्रमों में रह रहे बच्चों को एक्सपोजर विजिट के साथ-साथ अन्य लाभ भी प्रदान किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिला में सभी सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं को पूरी गंभीरता के साथ लागू किया जा रहा है ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। DOP 22/12/2025
-000-






शंकर सिंह व रमेश कुमार को सरकार की ई-टैक्सी योजना से मिला रोजगार

 प्रदेश सरकार की राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना बन रही युवाओं की मददगार

जिला बिलासपुर के घुमारवीं उपमंडल के गांव सवारा निवासी 45 वर्षीय शंकर सिंह तथा जिला हमीरपुर के भोरंज उपमंडल के लठवाण निवासी 50 वर्षीय रमेश कुमार के लिए प्रदेश सरकार की राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना (ई-टैक्सी) रोजगार उपलब्ध करवाने में मददगार साबित हुई है।
शंकर सिंह तथा रमेश कुमार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदकर प्रदेश सरकार के माध्यम से सरकारी विभागों में तैनात किया है। शंकर सिंह का वाहन उपायुक्त के सहायक आयुक्त के साथ जबकि रमेश कुमार का वाहन बी.डी.ओ. सदर बिलासपुर के साथ तैनात किया गया है। इन दोनों वाहनों पर प्रदेश सरकार 18 प्रतिशत जीएसटी सहित कुल 59 हजार रुपये प्रतिमाह उपलब्ध करवा रही है। इससे न केवल दोनों लाभार्थियों की वाहन किस्त आसानी से निकल रही है, बल्कि 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह की अतिरिक्त बचत भी हो रही है।
जब लाभार्थी शंकर सिंह से बातचीत की तो उनका कहना है कि वह पिछले लगभग 20 वर्षों से टैक्सी चलाने का कार्य कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते रहे हैं। इस दौरान उन्होंने 102 एंबुलेंस सेवा में भी कुछ वर्षों तक कार्य किया। लेकिन जब वर्ष 2023 में उन्हें समाचार पत्रों के माध्यम से प्रदेश सरकार की ई-टैक्सी योजना का पता चला तो उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने वर्ष 2025 में 15 लाख रुपये की लागत से इलेक्ट्रिक वाहन खरीदा तथा प्रदेश सरकार ने जुलाई, 2025 से इसे सरकारी विभाग के साथ अटैच कर दिया है।
इसी तरह लाभार्थी रमेश कुमार का भी कहना है कि उन्हें भी दिसम्बर, 2023 में प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना की जानकारी मिली तथा लोकमित्र केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत कर दिया। उन्होंने भी वर्ष 2025 में नया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदा तथा प्रदेश सरकार ने जुलाई, 2025 से इसे सरकारी विभाग में लगा दिया है। उनका कहना है कि इससे पहले वह टैक्सी चलाते थे, लेकिन स्थाई आय का कोई साधन नहीं था। लेकिन अब उन्हें प्रतिमाह 15 से 20 हजार रूपये की आय हो रही है तथा वह गाड़ी की किस्त भी आसानी से निकाल पा रहे हैं।
दोनो लाभार्थियों ने 15-15 लाख रुपये का इलेक्ट्रिक वाहन खरीदा है जिस पर प्रदेश सरकार ने 50 प्रतिशत उपदान मुहैया करवाया है। उनका कहना है कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के लिए सरकार की यह योजना न केवल लाभकारी सिद्ध हो रही है बल्कि उन्हें अगले पांच वर्षों तक स्थाई रोजगार भी सुनिश्चित हुआ है।
शंकर सिंह तथा रमेश कुमार ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार की यह योजना बेरोजगार युवाओं के लिए एक बेहतरीन अवसर है। प्रदेश में पहली बार कोई ऐसी योजना आई है जिसमें निजी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर 50 प्रतिशत उपदान और सरकारी विभागों में वाहन अटैच कर रोजगार की गारंटी भी उपलब्ध करवाई जा रही है।
दोनों लाभार्थियों ने प्रदेश के युवाओं से सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया है ताकि न केवल उन्हें सरकार आर्थिक मदद प्रदान करेगी बल्कि सरकारी विभागों के माध्यम से रोजगार की गारंटी भी मिलेगी।
क्या कहते हैं अधिकारी:
जिला रोजगार अधिकारी बिलासपुर राजेश मैहता का कहना है कि राजीव गांधी स्वरोजगार स्र्टाटअप योजना के अंतर्गत जिला बिलासपुर में अब तक 16 लोगों को लाभान्वित किया जा चुका है। प्रदेश सरकार ने 50 प्रतिशत सब्सिड़ी प्रदान कर लगभग एक करोड़ 16 लाख 44 हजार 900 रूपये की आर्थिक मदद दी है। साथ ही सभी 16 लाभार्थियों की ई-टैक्सी को प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में अटैच कर उन्हें रोजगार भी मुहैया करवाया है।
उपायुक्त बिलासपुर, राहुल कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी एवं रोजगारोन्मुखी योजनाओं को विभागों के माध्यम से पूरी गंभीरता के साथ लागू किया जा रहा है ताकि अधिकतम पात्र व्यक्तियों को लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं को समयबद्ध धरातल पर उतारकर पात्र लोगों तक पहुंचाना और उन्हें आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। DOP 08/12/2025
-000-




Thursday, 27 November 2025

सोनिका बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल, डेयरी फार्मिंग से रच रहीं सफलता की नई कहानी

 टीजीटी साइंस से डेयरी उद्यमी तक का सफर, सोनिका का ‘स्मार्ट वर्क’ बना प्रेरणा स्रोत

घुमारवीं की सोनिका ने दिखाया रास्ता, डेयरी फार्मिंग से महिलाएं भी बन सकती हैं स्वावलंबी

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की दूरदर्शी सोच एवं सशक्त नेतृत्व के कारण प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए दूध उत्पादकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति लागू कर प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक पहल की है। सरकार के इस कदम से न केवल प्रदेश के दूध उत्पादक किसान सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे है, बल्कि प्रदेश के शिक्षित युवा भी दुग्ध उत्पादन क्षेत्र से जुड़कर अपनी आर्थिकी को न केवल सशक्त बना रहे हैं बल्कि सफलता की नई-नई कहानियां भी लिख रहे हैं।  
जिला बिलासपुर के घुमारवीं क्षेत्र की ग्राम पंचायत घुमारवीं के गांव चुवाड़ी की सोनिका ने डेयरी फार्मिंग के क्षेत्र में प्रगति और आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। निजी मिनर्वा सीनियर सेकेंडरी स्कूल, घुमारवीं में टीजीटी साइंस के रूप में कार्यरत सोनिका न केवल शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही हंै, बल्कि पशुपालन के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन की एक नई कहानी भी लिख रही है।
सोनिका ने वर्ष 2019 में डेयरी फार्मिंग की शुरुआत एक जर्सी गाय के साथ करते हुए आज उनके पास कुल छह गायें और एक हीफर है। सोनिका डेयरी फार्म को पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति से संचालित कर रही हैं तथा दुधारू गायों का दुहन आधुनिक मिल्किंग मशीन से करती हैं। हरे चारे की कटाई के लिए चाफ कटर मशीन का उपयोग कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर वह समय-समय पर पशुपालन विभाग के अधिकारियों एवं चिकित्सकों का मार्गदर्शन भी प्राप्त करती हैं।
जब इस संबंध में सोनिका से बातचीत की उन्होंने बताया कि वह प्रतिदिन सुबह 5ः30 बजे से गाय से जुड़े कार्यों को प्रारंभ करती है तथा प्रातः 7 बजे तक पूर्ण कर लेती हैं। इस दौरान पति भी उनका सहयोग करते हैं, जबकि दिन के समय परिवार के अन्य सदस्यों का पूरा सहयोग मिलता है। इसी तरह प्रतिदिन शाम को 5 बजे से गायों से जुड़े कार्यों को शुरू करते हुए इन्हे 6ः30 बजे तक पूरा कर लिया जाता है।
प्रतिदिन 57 लीटर दूध का उत्पादन, एक माह में लगभग 74 हजार की शुद्ध आय
सोनिका कहती है कि उनका डेयरी फार्म प्रतिदिन लगभग 57 लीटर दूध का उत्पादन कर रहा है, जिसे 65 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचने पर प्रतिमाह लगभग एक लाख 10 हजार रूपये की आय होती है। उनका कहना है कि सभी खर्चों को निकालकर प्रतिमाह लगभग 74 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हो रहा है। ऐसे में सोनिका के लिए डेयरी फार्मिंग का कार्य एक लाभदायक व्यवसाय साबित हो रहा है।
डेयरी फार्मिंग से महिलाएं एवं युवा आर्थिक तौर पर बन सकते हैं सशक्त
सोनिका का कहना है कि महिलाएं और युवा 1 या 2 गायों से भी डेयरी फार्मिंग की शुरुआत करते हैं तो भी वह आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं। यह कार्य सुबह और शाम सिर्फ एक-एक घंटे का है, जिसे नौकरी पेशा महिलाएं भी आसानी से कर सकती हैं।
उनका कहना है कि प्रदेश सरकार ने गाय व भैंस का न्यूनतम समर्थन मूल्य क्रमशः 51 तथा 61 रुपये निर्धारित किया है जिससे न केवल उनका दूध उच्च दामों पर बाजार में आसानी से बिक रहा है बल्कि अन्य पशुपालकों की आय में भी आशातीत वृद्धि हो रही है।
सोनिका का प्रदेश व क्षेत्र के शिक्षित युवाओं एवं महिलाओं से कहना है कि “स्मार्ट वर्क करें, आत्मनिर्भर बनें और डेयरी फार्मिंग से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करें।”
क्या कहते हैं अधिकारीः
सहायक निदेशक पशुपालन विभाग डाॅ. किशोरी लाल शर्मा का कहना है कि प्रदेश सरकार डेयरी फार्मिंग के माध्यम से पशु पालकों को बढ़ावा दे रही है। पंजीकृत दुग्ध उत्पादक समितियों को दूध बेचने पर किसानों को सरकार प्रति लीटर की दर से से 3 रुपये प्रोत्साहन राशि प्रदान कर रही है। इसके अतिरिक्त दो किलोमीटर से अधिक दूरी तक दूध खरीद केंद्र तक स्वयं दूध ले जाने वाले पशुपालकों और समितियों को 2 रुपये प्रति लीटर उपदान देने का भी प्रावधान किया है। जिला बिलासपुर में 15 नई दुग्ध उत्पादक समितियों का गठन किया गया है तथा जिला में 40 अन्य दुग्ध उत्पादक समितियां पहले से ही कार्यरत हैं।
उन्होंने बताया कि जो किसान डेयरी फाॅर्मिंग से जुड़ना चाहते हैं, उन्हें प्रदेश सरकार उद्योग विभाग के माध्यम से उपदान की सुविधा प्रदान कर रही है। उन्होंने बताया कि कांगड़ा जिला में स्थापित हो रहे ढगवार दूध प्रसंस्करण संयंत्र का लाभ जिला बिलासपुर के दूध उत्पादक किसानों को भी प्राप्त होगा।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है कि प्रदेश सरकार किसानों व बागवानों के उत्थान व कल्याण को अनेकों कल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं। दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए दुग्ध उत्पादन समितियों का गठन कर किसानों एवं पशुपालकों को आर्थिक मदद भी प्रदान कर रही है। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा किसानों से डेयरी फाॅर्मिंग गतिविधियों से जुड़कर आर्थिकी को सुदृढ़ करने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने का आह्वान किया है।
-000- DOP 04/11/2025







Monday, 29 September 2025

साहसिक पर्यटन गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा हिमाचल का बिलासपुर

 गोविंद सागर झील में जलक्रीड़ा और बंदलाधार से पैराग्लाइडिंग बन रही आकर्षण का केंद्र

हिमाचल प्रदेश पर्यटन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण गंतव्य है तथा पर्यटन की अपार संभावनाएं संजोए हुए है। प्रदेश में धार्मिक, साहसिक और स्वास्थ्य पर्यटन विकास के मुख्य स्तंभ हैं। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए प्रदेश सरकार ने बिलासपुर की गोविंद सागर झील में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के मार्गदर्शन में वर्ष 2024 में साहसिक जलक्रीड़ा (एडवेंचर स्पोर्ट्स) की विभिन्न गतिविधियां शुरू की हैं। इन प्रयासों से न केवल जिला बिलासपुर को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिल रही है, बल्कि स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
बंदलाधार की तलहटी में भाखड़ा बांध निर्माण से सतलुज नदी पर बनी गोविंद सागर झील के किनारे बसा बिलासपुर कस्बा प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। झील का नीला पानी यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को आकर्षित करता है। बडोलधार व बंदलाधार के मध्य फैली यह झील कश्मीर की डल झील जैसा मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करती है। सरकार ने यहां मौजूद पर्यटन विकास की अपार संभावनाओं को देखते हुए साहसिक जलक्रीड़ा गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
प्रदेश सरकार ने जिला प्रशासन के माध्यम से पर्यटन, खेल, व्यापार एवं रोजगार सृजन सोसायटी का गठन कर झील में अनेक जलक्रीड़ा और साहसिक पर्यटन गतिविधियां शुरू की हैं। इनमें स्पीड बोट, क्रूज राइड, वाटर स्कूटर, बनाना राइड जैसी रोमांचक सवारी शामिल हैं। पर्यटकों को कश्मीर की डल झील जैसा अनुभव देने के लिए शिकारा राइड की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। ये सभी सेवाएं बिलासपुर के मंडी भराड़ी फोरलेन पुल के समीप संचालित हो रही हैं। साहसिक जलक्रीड़ा को और बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन शीघ्र ही तीन दिवसीय वॉटर स्पोर्ट्स महोत्सव आयोजित करने जा रहा है, जिसमें ड्रैगन बोट रेस, कायकिंग तथा कैनोइंग प्रतियोगिताएं मुख्य आकर्षण होंगी। बिलासपुर की गोविंद सागर झील चंडीगढ़-कीरतपुर-मनाली फोरलेन सड़क पर स्थित होने के कारण पर्यटक आसानी से इन साहसिक जलक्रीड़ाओं का आनंद ले सकते हैं।
साहसिक खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए पर्यटन विभाग के सहयोग से जिला की प्रसिद्ध बंदलाधार से पैराग्लाइडिंग गतिविधियां भी चलाई जा रही हैं। यह साइट उत्तर भारत की बेहतरीन पैराग्लाइडिंग स्थलों में से एक है, जहां पर्यटक न केवल इस खेल का रोमांच अनुभव करते हैं, बल्कि गोविंद सागर झील का बेहद मनमोहक एवं आकर्षक नजारा भी देखने को मिलता है। मार्च 2025 में यहां अंतरराष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग फिएस्टा सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है, जिसमें छह देशों के पैराग्लाइडरों सहित 70 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त एयरो स्पोर्ट्स गतिविधियों के लिए भी गोविंद सागर झील को उत्तरी भारत का सबसे उपयुक्त स्थान माना गया है। सरकार के सतत प्रयासों से आज बिलासपुर साहसिक जलक्रीड़ा, पैराग्लाइडिंग और एयरो स्पोर्ट्स के लिए पर्यटन की दृष्टि से उत्कृष्ट गंतव्य बनकर उभरा है। साथ ही, झील में आइलैंड टूरिज्म की अवधारणा पर भी कार्य जारी है, जिससे पर्यटक अंडमान-निकोबार की तर्ज पर झील के द्वीपों पर सैर का आनंद भी ले सकेंगे।
प्रदेश सरकार की इन पहलों से न केवल बिलासपुर के पर्यटन विकास को नई गति मिली है, बल्कि युवाओं के लिए परिवहन, आतिथ्य और सेवा क्षेत्रों में रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर भी बढ़े हैं। हिमाचल सरकार ने पर्यटन को राज्य अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनाते हुए रोजगार और विकास के नए द्वार खोल दिए हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी :
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है कि बिलासपुर को एडवेंचर स्पोर्ट्स का प्रमुख हब बनाने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत है। यहां वाॅटर स्पोर्ट्स, एयरो स्पोर्ट्स सहित अन्य साहसिक गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि यह क्षेत्र न केवल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर सके बल्कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे तथा क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा। जिला प्रशासन पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए लगातार प्रयासरत है तथा आने वाले समय में और नई साहसिक गतिविधियों को भी यहां शुरू करने के प्रयास किये जाएंगे। DOP 29/09/2025
-000-








Sunday, 31 August 2025

जिला बिलासपुर के बरठीं के टिहरी क्लस्टर में लहलहा रही है अनार की फसल

शिवा परियोजना ने बदली 44 किसानों की तकदीर, 60 मीट्रिक टन अनार उत्पादन का लक्ष्य 

प्रदेश सरकार एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से चालू वितवर्ष में व्यय कर रही है 100 करोड़

हिमाचल प्रदेश में बागवानी न केवल किसानों व बागवानों के लिए आजीविका का स्त्रोत है बल्कि यह ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक स्थिरता का भी प्रमुख स्तंभ है। प्रदेश में ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार ने बागवानी को बढ़ावा देते हुए वितीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से 100 करोड़ रूपये व्यय करने का प्रावधान किया है। सरकार इस महत्वपूर्ण कदम से न केवल प्रदेश के निचले क्षेत्रों में शिवा परियोजना के माध्यम से बागवानी को बल मिल रहा है बल्कि प्रदेश सरकार के यह प्रयास धरातल में फलीभूत भी हो रहे हैं।

हिमाचल सरकार के निरंतर प्रयासों का ही नतीजा है कि आजकल जिला बिलासपुर के बरठीं के अंतर्गत टिहरी कलस्टर में अनार की फसल लहलहा रही है। एचपी शिवा परियोजना के तहत लगभग 100 बीघा में स्थापित इस बगीचे में अनार की फसल पक कर तैयार हो चुकी है तथा लाभार्थी किसान अब इसे बाजार भेजने की तैयारी में जुट गए हैं। वर्ष 2021 में फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन (एफएलडी) के तौर पर टीहरी-एक व टीहरी-दो में लगभग 2 हैक्टेयर क्षेत्र में अनार के पौधों का रोपण किया गया, जिसे वर्ष 2022 में बढ़ाकर 8 हैक्टेयर (लगभग 100 बीघा) भूमि में 44 किसानों को जोड़ते हुए कलस्टर के तौर पर विकसित किया गया है। इस कलस्टर में भगवा प्रजाति के लगभग 8900 अनार के पौधे रोपित किये हैं तथा इस वर्ष 60 मिट्रिक टन अनार उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। कलस्टर में जुडे़ किसानों की विभिन्न गतिविधियों को संचालित करने के लिए दि बरठीं कन्वर्जिंग हॉर्टिकल्चर प्रोडक्शन मार्केटिंग एसोसिएशन (सीएचपीएमए) सहकारी समिति लिमिटेड का भी गठन किया गया है।

जब इस संबंध में लाभार्थी किसान एवं कलस्टर के अंतर्गत गठित दि बरठीं सीएचपीएमए सहकारी समिति लिमिटेड के प्रधान प्रेम लाल नड्डा से बातचीत की तो बताया कि वर्ष 2021 में बतौर एफएलडी-एक व दो में बागवानी विभाग के माध्यम से अनार के पौधे रोपित किये गए। वर्ष 2022 में अन्य किसानों को जोड़ते हुए लगभग 100 बीघा क्षेत्र में इसे कलस्टर के तौर पर विकसित किया गया है। वर्तमान में लगभग 44 किसान जुड़ चुके हैं, और कुछ किसानों ने गत वर्ष अनार बेचकर लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये तक की आमदनी अर्जित कर ली है। इस वर्ष कुछ किसान लगभग 3 से 4 लाख रुपये तक की आमदनी अर्जित कर सकते हैं।
प्रेम लाल नड्डा ने बताया कि शिवा परियोजना के अंतर्गत स्थापित इस अनार क्लस्टर में बागवानी एवं जलशक्ति विभाग के माध्यम से विभिन्न विकास कार्य किए गए हैं, जिनमें भूमि का विकास, बेड व पिट तैयार करना, सोलर बाड़बंदी, ड्रिप सिंचाई सुविधा तथा उठाऊ सिंचाई परियोजना के माध्यम से जल उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अतिरिक्त जलशक्ति विभाग द्वारा सिंचाई सुविधा हेतु लगभग 2 लाख लीटर क्षमता वाला पानी का टैंक भी निर्मित किया गया है।
इसी बीच लाभार्थी किसान सोम देव शर्मा का कहना है कि गत वर्ष लगभग 1 से डेढ लाख रूपये अनार से आमदनी हुई है। इस वर्ष फसल ज्यादा अच्छी है, लगभग 3 से 4 लाख रूपये आमदनी की उम्मीद है। क्लस्टर में उनके लगभग 125 अनार के पौधे हैं जिनसे औसतन प्रति पौधा 25 से 30 किलोग्राम अनार उत्पादन की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अनार की फसल के साथ-साथ गेंदे का फूल भी लगाया, जिससे भी लगभग 25 हजार रूपये की अतिरिक्त आमदनी हुई है।
लाभार्थी किसानों का कहना है कि भगवा प्रजाति का यह अनार लगभग बिना बीज का होता है, जिसे बच्चे व बुजुर्ग भी आसानी से खा सकते हैं। इसके छिलके पतले होते हैं और इसमें रस की मात्रा अधिक होती है। यह अनार स्वाद में भी अत्यंत उत्तम है। किसानों को उम्मीद है कि इस बार उन्हें अच्छे दाम मिलेंगे और आमदनी में और वृद्धि होगी। बागवानी विभाग ने किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन देने के लिए फैसिलिटेटर, क्लस्टर इंचार्ज तथा फील्ड ऑपरेटर भी तैनात किए हुए हैं।
उन्होंने युवाओं से भी बागवानी के साथ जुड़ने का आहवान किया है ताकि घर के समीप ही न केवल रोजगार के अवसर सृजित किये जा सकते हैं बल्कि वह स्वावलंबी बनकर दूसरों के लिए रोजगार सृजन का कार्य भी कर सकते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारीः
उपनिदेशक बागवानी डॉ. जगदीश चंद वर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश शिवा परियोजना के माध्यम से जिला बिलासपुर में कुल 37 क्लस्टर स्थापित किए हैं। इन क्लस्टरों के अंतर्गत नींबू प्रजाति, अमरूद और अनार की खेती को बढ़ावा दिया गया है तथा लगभग 134 हेक्टेयर भूमि को कवर किया गया है। उन्होंने कहा कि टिहरी क्लस्टर जिला का एकमात्र अनार का क्लस्टर है, और इस वर्ष लगभग 60 मीट्रिक टन अनार उत्पादन का लक्ष्य है। बागवानी विभाग किसानों को मार्केटिंग की सुविधा भी उपलब्ध करवा रहा है ताकि फसल के बेहतर दाम मिल सकें।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने कहा कि सरकार ने किसानों व बागवानों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं आरंभ की हैं ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अधिक सशक्त हो सके। शिवा परियोजना के माध्यम से जिला के किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं और संबंधित विभागों के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान भी किया। DOP 01/09/2025